गिरिडीह में एफसीआई गोदाम के ठेकेदार के घर पर सीबीआई की दबिश, एजेंसी ने नोट गिनने की मशीन मंगवाई

गिरिडीह में सीबीआई की टीम ने दबिश दी है। एफसीआई से जुडे़ ठेकेदार के ठिकानों पर छापेमारी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने गिरिडीह में एफसीआई से जुड़े ठेकेदार रामजी पांडे के घर और गोदाम में छापेमारी की है। बुधवार की सुबह सीबीआई की टीम रामजी पांडे के शास्त्री नगर स्थित घर पर और सरिया स्थित गोदाम

Sep 04, 2024 - 09:42
Updated: 2 years ago
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गिरिडीह में सीबीआई की टीम ने दबिश दी है। एफसीआई से जुडे़ ठेकेदार के ठिकानों पर छापेमारी की है। केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) ने गिरिडीह में एफसीआई से जुड़े ठेकेदार रामजी पांडे के घर और गोदाम में छापेमारी की है। बुधवार की सुबह सीबीआई की टीम रामजी पांडे के शास्त्री नगर स्थित घर पर और सरिया स्थित गोदाम पर पहुंची और तलाशी ले रही है। वहीं सीबीआई की एक टीम गिरिडीह के पांडेयडीह स्थित एफसीआई गोदाम संचालक संजय शर्मा के घर की तलाशी ले रही है। छापेमारी के दौरा भारी नकदी और कई दस्तावेजों की बरामदगी की सूचना मिल रही है। सीबीआई ने नोट गिनने की मशीन भी मंगवायी है। मिली जानकारी के अनुसार, अनाज घोटाले को लेकर यह छापेमारी की जा रही है।

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फर्जी कागजात के आधार पर 16 हजार टन अनाज की निकासी और कालाबाजारी का आरोप

गिरिडीह जिले के सरिया में एफसीआई के गोदाम संचालन का ठेका लंबे समय से रामजी पांडे के पास था। आरोप है कि रामजी पांडे ने गोदाम से 16 हजार टन से भी ज्यादा अनाज की फर्जी कागजात के आधार पर निकासी की और उसकी कालाबाजारी की है। इससे निगम को करोड़ों रुपए की चपत लगी है। एफसीआई ने सरिया में दस हजार टन क्षमता का गोदाम शास्त्रीनगर गिरिडीह में रहने वाले रामजी पांडे से किराये पर लिया था। इसके संचालन की जिम्मेदारी भी उन्हें ही दी गई थी। अनाज की हेराफेरी और कालाबाजारी का यह मामला एफसीआई की एक टीम द्वारा गोदामों के निरीक्षण के दौरान पकड़ में आया था। जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि जनवितरण प्रणाली के तहत वितरण के लिए रखा गया हजारों टन अनाज फर्जी कागजात के आधार पर निकाला गया। इसके बाद एफसीआई ने इसकी जांच सीबीआई से कराने का निवेदन किया था। शुरुआती जांच के दौरान यह जानकारी सामने आयी थी कि एफसीआई के गोदामों से निकाला गया अनाज बंगाल के राइस मिलों में पहुंचाया गया और फिर पॉलिश कर उसे बाजार में बेच दिया गया। इसमें जेएसएफसी (झारखंड स्टेट फूड कॉरपोरेशन) के कुछ अफसरों की भी मिलीभगत की आशंका है।

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