रांची : डॉ बिशेश्वरन बी ने रांची करमटोली स्थित रांची प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर अस्थमा के बारे में दी जानकारी

अस्थमा की समस्या इन दिनों बढ़ रही है। अस्थमा एक पुरानी फेफड़ों की बीमारी है जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। इसके उचित उपचार के लिए हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल के डॉ बिशेश्वरन बी ने बुधवार को रांची करमटोली स्थित रांची प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर जानकारी दी। डॉ विशेश्वरन बी ने कह

Sep 25, 2024 - 14:26
Updated: 2 years ago
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अस्थमा की समस्या इन दिनों बढ़ रही है। अस्थमा एक पुरानी फेफड़ों की बीमारी है जो हर उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। इसके उचित उपचार के लिए हैदराबाद स्थित यशोदा हॉस्पिटल के डॉ बिशेश्वरन बी ने बुधवार को रांची करमटोली स्थित रांची प्रेस क्लब में संवाददाता सम्मेलन कर जानकारी दी। डॉ विशेश्वरन बी ने कहा कि झारखंड की मरीज़ रीता सिन्हा, 70 वर्षीय महिला को सांस लेने में गंभीर कठिनाई और खांसी से पीड़ित थीं। जिससे उनकी दिन-प्रतिदिन की गतिविधिया प्रभावित हुईं। वह ऑक्सीजन पर निर्भर हो गई थी। वह अधिकतम चिकित्सा प्रबंधन के प्रति अनुत्तरदायी थी। मरीज़ का पहले कई डॉक्टरों द्वारा इलाज किया गया था और फिर उसे आगे के मूल्यांकन और प्रबंधन के लिए हैदराबाद के सोमाजीगुडा में यशोदा अस्पताल में रेफर किया गया था। मरीज़ को डॉ विश्वेश्वरन बालासुब्रमण्यम, एमडी, डीएम (पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर- गोल्ड मेडलिस्ट), वरिष्ठ सलाहकार- इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजी और स्लीप मेडिसिन विशेषज्ञ के अधीन भर्ती कराया गया था। मरीज़ का बड़े पैमाने पर मूल्यांकन किया गया और पाया गया कि उसे गंभीर अस्थमा और ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया है। उचित दवाओं के साथ आईसीयू में मरीज़ का प्रबंधन करने के बाद, मरीज़ के उपचार को अनुकूलित किया गया और उसे बायोलॉजिक्स जैसी उन्नत दवाएं दी जाने लगीं।

डॉ बिशेश्वरन बी ने कहा कि फेफड़े के कैंसर के शुरुआती लक्षणों में खांसी का बढ़ना या सांस लेने में तकलीफ होना शामिल हो सकता है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि फेफड़े का कौन सा हिस्सा प्रभावित है और मरीज को किस तरह का फेफड़े का कैंसर है। जैसे-जैसे कैंसर विकसित होता है, ये लक्षण अधिक गंभीर या तीव्र हो सकते हैं। कई अन्य प्रकार के कैंसर की तरह, फेफड़े के कैंसर के कारण भी प्रणालीगत लक्षण हो सकते हैं, जो प्रकृति में अधिक सामान्य होते हैं। इनमें भूख न लगना या सामान्य थकान शामिल हो सकती है। इसकी पहचान कर सही समय पर उचित इलाज से मरीज को बचाया जा सकता है। वहीं मकेश वीपी कॉर्पोरेट ने बताया कि झारखंड से आने वाले सभी मरीजों को पूर्व सूचना पर मुफ्त पिक अप और ड्रॉप की सुविधा दी जाएगी । झारखंड में हमारे समन्वयक हैं जो मरीजों को प्रवेश से लेकर ड्रॉप तक संभालते हैं और मरीजों की सुविधा के अनुसार आवास प्रदान करते हैं।

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