पेड़ लगाओ जीवन बचाओ : प्रदीप पांडेय

जैसे धरती, जल, अम्बर, पवन, प्रकाश आदि परमार्थ के कार्यों में नित्य संलग्न हैं, वैसे ही महापुरूषों का जीवन भी दूसरों के लिए और प्रकृति संरक्षण में समर्पित होता है। प्रकृति की हरीतिमा और उसके संतुलन में वृक्षों का महत्वपूर्ण स्थान है। वृक्ष के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती है। पेड़ के पास फल-फूल, उसका बीज, छाल-छाया, गोंद, उसकी हरीतिमा और सुखने के बाद लकड़ियाँ जो किसी के उदर पूर्ति में अग्नि में भस्म हो जाती हैं, ऐसे वृक्ष के महत्व को समझें। वेदों में कहा गया है कि दस पुत्रों के बराबर एक कन्या और सौ कन्या के बराबर एक वृक्ष है। यदि किसी के जीवन में पुत्र का सुख नहीं है, अथवा किसी कारणवश कन्यादान भी न कर सकें तो अपने जीवन में कम से कम एक वृक्ष तो अवश्य लगायें। उक्त बातें संस्था के संयोजक प्रदीप पांडेय ने व्यक्त किया।

प्रधानाचार्य महोदया ने कहा कि आओ पर्यावरण बचाए जीवन को खुशहाल बनाए। विश्व पर्यावरण दिवस पर पर्यावरण के संरक्षण के प्रति संकल्पवान बने।
मनोज सिंह ने कहा कि पर्यावरण दिवस के मौके पर ही नहीं, बल्कि आए दिन हमें अपने घरों में पेड़-पौधे लगाने चाहिए। वो कहते हैं ‘पर्यावरण सुरक्षित है तो इस धरती का हर इंसान सुरक्षित है। अगर पर्यावरण सुरक्षित नहीं है तो इंसान का अस्तित्व कभी भी खत्म हो सकता है’।

योगाचार्य बृजमोहन ने कहा कि आज प्रकृति से दूर जाने का ही परिणाम है – प्रकृति में विकृति और प्रकृति के इस विकृति को पेड़ लगाकर दूर किया जा सकता है।

अध्यात्मिक साधक: निधि अग्रहरि, आरती रावत, सरला मौर्या, रनिता सिंह, नीलू सिंह, आदित्य अग्रहरि राक, शशि वर्मा, दिलीप, अन्नू आदि लोग मौजूद रहे।

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