E20 Petrol : केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 17 फरवरी 2026 की अधिसूचना के तहत 1 अप्रैल 2026 से देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) की बिक्री अनिवार्य कर दी है। यह ईंधन BIS मानकों के अनुरूप होगा और इसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (RON) 95 निर्धारित किया गया है।
सरकार का कहना है कि इस कदम से कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटेगी, कार्बन उत्सर्जन कम होगा और किसानों को इथेनॉल उत्पादन से अतिरिक्त आय मिलेगी। लेकिन सड़क पर चल रही करोड़ों गाड़ियों की स्थिति को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

ज्यादातर वाहन E20 के लिए तैयार नहीं?
देश में पंजीकृत वाहनों की संख्या 40 करोड़ से अधिक बताई जाती है। इनमें बड़ी संख्या 2023 से पहले खरीदे गए दोपहिया और चारपहिया वाहनों की है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के स्पेसिफिकेशन के अनुसार E20 ईंधन तैयार किया गया है, लेकिन पूरी तरह E20-compatible वाहन मुख्यतः अप्रैल 2023 के बाद लागू हुए BS6 Phase-II मानकों के अंतर्गत निर्मित हुए हैं।
2012–2022 के बीच बने कई मॉडलों में फ्यूल सिस्टम, रबर-प्लास्टिक पार्ट्स, फ्यूल लाइन और इंजन कंपोनेंट्स E20 के लिए डिजाइन नहीं किए गए थे। विशेषज्ञों के अनुसार संभावित असर:
- 3–7% तक माइलेज में कमी
- कोल्ड स्टार्ट की समस्या
- फ्यूल इंजेक्टर/पंप पर दबाव
- रबर सील व होज़ पर असर
- मेंटेनेंस लागत में वृद्धि
जिम्मेदारी किसकी, असर किस पर?
- सरकार का तर्क: आयात बिल में कमी, किसानों को लाभ, पर्यावरण संरक्षण।
- ऑटो कंपनियों का पक्ष: वाहन मैनुअल के अनुसार ईंधन इस्तेमाल करें, अन्यथा वारंटी प्रभावित हो सकती है।
- उपभोक्ता की स्थिति: 10–15 साल पुरानी गाड़ियों के मालिक असमंजस में।
यदि 1 अप्रैल के बाद अधिकतर पेट्रोल पंपों पर E20 ही उपलब्ध होगा, तो पुराने वाहन मालिकों के सामने विकल्प सीमित रह जाएंगे—या तो अतिरिक्त मेंटेनेंस कराएं, संभावित अपग्रेड किट लगवाएं (जहां उपलब्ध हो), या नई E20-compatible गाड़ी खरीदें।
फायदा बनाम जोखिम
संभावित फायदा:
- विदेशी मुद्रा की बचत
- इथेनॉल उत्पादक कंपनियों और चीनी मिलों को प्रोत्साहन
- गन्ना व मक्का किसानों को अतिरिक्त आय
संभावित जोखिम:
- इंजन संबंधी समस्याएं
- माइलेज में गिरावट
- सर्विसिंग खर्च में बढ़ोतरी
- पुरानी गाड़ियों की रीसेल वैल्यू में कमी
अनुमान है कि करोड़ों वाहन इस बदलाव से सीधे प्रभावित हो सकते हैं। आलोचकों का कहना है कि पूरे वाहन बेड़े को अपग्रेड करने की ठोस योजना के बिना इसे अनिवार्य करना उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाल सकता है।
वाहन मालिक क्या करें?
- अपनी गाड़ी का मैनुअल जांचें—क्या वह E20-compatible है?
- अधिकृत डीलर/सर्विस सेंटर से परामर्श लें।
- यदि नई गाड़ी खरीद रहे हैं तो E20-compatible मॉडल ही चुनें।
- ईंधन के बाद गाड़ी के प्रदर्शन पर नजर रखें—स्टार्टिंग, माइलेज, इंजन की आवाज आदि।
यह नीति ऊर्जा आत्मनिर्भरता और हरित ईंधन की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मत है कि आम उपभोक्ताओं को संक्रमण काल में तकनीकी सहायता, स्पष्ट दिशा-निर्देश और संभावित राहत पैकेज की आवश्यकता होगी, ताकि “ग्रीन फ्यूल” का उद्देश्य आर्थिक बोझ में न बदल जाए।










