20 दिसंबर तक अयोग्य धारक स्वेच्छा से सरेंडर करें राशनकार्ड नही तो होगी करवाई
पीडीएस डिलरों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक निर्देश सतबरवा : सीओ सह बीडीओ कृष्णमुरारी तिर्की ने शनिवार को सतबरवा प्रखंड कार्यालय स्थित सभागार में प्रखंड क्षेत्र के पीडीएस डीलरों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने ई केवाईसी कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए बताया कि अभी तक 20 प्रतिशत लाभु
पीडीएस डिलरों के साथ बैठक कर दिए आवश्यक निर्देश
सतबरवा : सीओ सह बीडीओ कृष्णमुरारी तिर्की ने शनिवार को सतबरवा प्रखंड कार्यालय स्थित सभागार में प्रखंड क्षेत्र के पीडीएस डीलरों के साथ बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने ई केवाईसी कार्य में तेजी लाने का निर्देश देते हुए बताया कि अभी तक 20 प्रतिशत लाभुकों का ही ई केवाईसी हो पाया है। जिसे दिसंबर माह तक पूरा किया जाना है। उन्होंने बैठक में अयोग्य कार्ड धारकों को चिन्हित कर उनसे 20 दिसंबर तक स्वेच्छा से राशनकार्ड सरेंडर करने की अपील की और चेतावनी देते हुए कहा कि वैसे कार्डधारी जो सक्षम हैं और जो निर्धारित मापदंडों पर खरे नही उतरते हैं। यदि वे 20 दिसंबर तक स्वेच्छा से राशनकार्ड सरेंडर नही करते हैं तो 25 दिसंबर से डीलरकार्ड डिलेशन शुरू करते हुए वर्ष 2016 से उठाए गए राशन की कीमत 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वसूल की जाएगी। उन्होंने पीडीएस डिलरों को वजन सही रखने,सही समय पर राशन वितरण,अंगूठा लगाने के साथ ही राशन देने का निर्देश देते हुए आमजनों की शिकायतों का त्वरित निष्पादन करने को कहा। उन्होंने बताया कि ई केवाईसी हो जाने से जनता की अधिकांश समस्याओं का समाधान संभव है। बैठक में एमओ अरविंद कुमार, पोंची मुखिया गिरिवर राम, धावाडीह मुखिया रिंकी यादव, बोहीता मुखिया प्रतिनिधि लालबिहारी साव, बकोरिया मुखिया प्रतिनिधि संतोष उरांव, ममता समूह के सदस्य, संचय समिति सदस्य, पहाड़ी एसएचसी के सदस्य, कृष्णा आजीविका सखी मंडल के सदस्य, भारतभूषण जायसवाल, बैजनाथ प्रसाद, अमरेश पाठक, भूषण शुक्ला, नंदू पासवान, राजेश राम, पप्पू प्रसाद सहित प्रखंड क्षेत्र के दर्जनों पीडीएस डीलर मौजूद रहे।
कौन हैं अयोग्य राशकार्डधारी परिवार
- जिस परिवार का कोई व्यक्ति भारत सरकार,राज्य सरकार से वेतन या पेंशन प्राप्त करता हो।
- आयकर,सेवाकर या जीएसटी करदाता हो।
- जिस परिवार के पास 5 एकड़ सिंचित भूमि या 10 एकड़ असिंचित भूमि हो।
- जिस परिवार के पास चार पहिया वाहन हो।
- जिस परिवार के पास सरकारी योजना से अनक्षादित दो कमरों से अधिक का पक्का मकान हो।
- परिवार का कोई सदस्य सरकारी उद्यम का मालिक या संचालक हो।
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