चाइना से अखिल पाराशर की रिपोर्ट
बीजिंग : जब भारत और चीन के बीच 75 साल पहले राजनयिक संबंधों की नींव रखी गई थी, तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि ये दोनों देश एक दिन दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होंगे। 1 अप्रैल 1950 को जब दोनों ने औपचारिक रूप से डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू किए थे, तब से लेकर आज तक का सफर कुछ ऐसा रहा है जैसे कोई बॉलीवुड मूवी हो। उसमें ड्रामा भी है, ट्विस्ट भी है, इमोशन भी है और ढेर सारी उम्मीदें भी हैं। इतने सालों में रिश्तों में उतार-चढ़ाव जरूर आए, लेकिन दोनों देशों के बीच सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लगातार गहराते गए। आज टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इनोवेशन, व्यापार और लोगों-से-लोगों के बीच कनेक्शन इन रिश्तों को एक नए मुकाम तक ले जा रहे हैं, तो चलिए, इस रिश्ते को थोड़ा करीब से देखते हैं और कुछ दिलचस्प पहलुओं पर एक नजर डालते हैं।
पुरानी दोस्ती, नई शुरुआत
भारत और चीन का रिश्ता तो वैसे सदियों पुराना है। सिल्करोड से लेकर बौद्ध धर्म तक दोनों देशों ने एक-दूसरे को बहुत कुछ दिया। लेकिन 1950 मेंजब डिप्लोमैटिक रिलेशन शुरू हुए, तो ये एक नया चैप्टर था। उस वक्त पंडित नेहरू ने “हिंदी-चीनी भाई-भाई” का नारा दिया था और सचमुच उस दौर में दोनों देशों में गर्म जोशी थी। खैर, जिंदगी हो या रिश्ता, उतार-चढ़ाव तो आते ही हैं और अब 75 साल बाद दोनों देश फिर से एक-दूसरे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं।
कारोबार और इकोनॉमिक कनेक्शन
क्या आप जानते हैं कि भारत और चीन के बीच व्यापार साल 2023 में 136 बिलियनडॉलर से ज्यादा का था? जी हां, चीन आज भी भारत का सबसे बड़ा ट्रेडिंगपार्टनर है। स्मार्टफोन्स से लेकर मशीनरी तक, मेड-इन-चाइना प्रोडक्ट्स हर भारतीय बाजार में मिलते हैं, वहीं भारतीय IT और फार्मास्युटिकलकंपनियां भी चीन में अपनी मजबूत पकड़ बना रही हैं। लेकिन बात सिर्फ ट्रेड तक ही सीमित नहीं है। चीन के कई बड़े इन्वेस्टर्स भारत में स्टार्टअप्स में इन्वेस्ट कर चुके हैं। ज़ोमैटो, बिगबास्केट और मेकमाईट्रिप जैसी कंपनियों को चीनी निवेश मिला है, जिससे भारतीय टेक्नोलॉजी और स्टार्टअपइकोसिस्टम को जबरदस्त ग्रोथ मिली है।
टेक्नोलॉजी और AI : इनोवेशन के नए आयाम
अब थोड़ा फ्यूचर की बात करते हैं। टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में भारत और चीन दोनों ही तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। चीन AI और टेक्नोलॉजी के मामले में दुनिया में सबसे आगे है और भारत भी इसमें तेजी से कदम बढ़ा रहा है। AI, मशीन लर्निंग और डेटासाइंस में भारत-चीन की पार्टनरशिप भविष्य में बहुत कुछ बदल सकती है। आज भारतीय टेक एक्सपर्ट्स और चीनी कंपनियां मिलकर कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं, जिससे दोनों देशों को फायदा हो रहा है। आपने Chat GPT और चीन का Deepseek का नाम सुना होगा? AI के इस दौर में भारत और चीन दोनों ही देश एक-दूसरे से सीख रहे हैं और इस टेक्नोलॉजी का फायदा उठाकर बिजनेस और लाइफस्टाइल को आसान बना रहे हैं।
म्यूजिक, मूवीज़ और कल्चर का मेल
बात अगर दिलों को जोड़ने की हो, तो संगीत और सिनेमा से बेहतर कुछ नहीं। क्या आपको पता है कि भारत में चीनी गाने और चीन में बॉलीवुड फिल्में दोनों ही खूब पसंद किए जाते हैं? आमिर खान की ‘दंगल’ और ‘सीक्रेटसुपरस्टार’ चीन में जबरदस्त हिटहुईं, वहीं भारतीय यूथ को चीनी वेबसीरीज और फिल्में भी खूब भा रहे हैं। भारत में चाइनीजपॉप (C-Pop) और कोरियनपॉप (K-Pop) का असर दिखता है। भारत में चीनी पॉपम्यूजिक का एक खास फैनबेस तैयार हो रहा है। वहीं, चीन में भी योग, मेडिटेशन और आयुर्वेद जैसे भारतीय कल्चर को अपनाया जा रहा है।
लोगों -से- लोगों का कनेक्शन : दोस्ती और एडुकेशन
टेक्नोलॉजी और ट्रेड से परे, दोनों देशों के लोगों के बीच कनेक्शन भी लगातार बढ़ रहा है। आज कल सोशल मीडिया के जमाने में भारत और चीन के लोग एक-दूसरे को पहले से कहीं ज्यादा जान रहे हैं। लोगों का आपस में मिलना-जुलना भी बढ़ा है। पहले जहां सिर्फ बिजनेस याटूरिज्म के लिए ट्रैवल होता था, अब स्टूडेंट्स एक्सचेंज प्रोग्राम्स, कल्चरल फेस्टिवल्स और ऑनलाइन इवेंट्सने दोनों देशों के लोगों को करीब लाया है। मिसाल के तौर पर योग और आयुर्वेद का क्रेज अब चीन में भी देखने को मिल रहा है। वहीं, चाइनीज न्यू ईयर और लैंटर्न फेस्टिवल जैसे इवेंट्स भारत में भी पॉपुलर हो रहे हैं। ये छोटी-छोटी चीजें दोनों देशों के बीच की दीवार को तोड़ रही हैं। हर साल सैकड़ों भारतीय स्टूडेंट्स चीन की यूनिवर्सिटीज़ में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने जाते हैं। वहीं, कई चीनी स्टूडेंट्स भी भारतीय यूनिवर्सिटीज़ में संस्कृत, योग और आयुर्वेद पढ़ने आते हैं। इसी तरह टूरिज्म भी दोनों देशों को जोड़ने में अहम रोलनिभा रहा है। महामारी से पहले लाखों चीनी टूरिस्ट भारत आते थे और भारतीय भी चीन की खूबसूरत जगहों जैसे बीजिंग, शांगहाई, युन्नान आदि की सैर करते थे।
भविष्य की ओर: साथ मिलकर बढ़ने का समय
भारत और चीन दोनों ही प्राचीन सभ्यताओं के वारिस हैं और आज आधुनिक दुनिया में नए-नए इनोवेशन के साथ आगे बढ़ रहे हैं। दोनों देशों के बीच मतभेद हो सकते हैं, लेकिन सहयोग और साझेदारी के अवसर भी अनगिनत हैं। आज, जब हम 75 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, तो यह समय है उन संभावनाओं पर ध्यान देने का, जो भारत-चीन रिश्तों को और मजबूत बना सकती हैं। चाहे वह व्यापार हो, टेक्नोलॉजी हो, म्यूजिक हो या लोगों के बीच दोस्ती साथ मिलकर हम एक बेहतर भविष्य की ओर बढ़ सकते हैं। 75वीं सालगिरह सिर्फ एक मील का पत्थर नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। भारत और चीन अगर हाथ मिलाएं तो न सिर्फ एशिया, बल्कि पूरी दुनिया में एक नया बैलेंस बन सकता है और एक बात पक्की है, ये रिश्ता जितना पुराना है, उतना ही नया और रोमांचक भी है।