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फुसरो के ढोरी में विस्थापित संघर्ष समन्वय समिति का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित

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फुसरो नप क्षेत्र के ढोरी बस्ती के राजा बंगला स्थित भारत माता विवाह मंडप में रविवार विस्थापित संघर्ष समन्वय समिति का एक दिवसीय सम्मेलन आयोजन किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सूरज महतो व संचालन दशरथ महतो ने किया। यहां बेरमो कोयलांचल क्षेत्र के रैयत व विस्थापित शामिल हुए। मुख्य वक्ता सह समिति के केंद्रीय अध्यक्ष सूरज महतो ने कहा कि बेरमो कोयलांचल क्षेत्र में विस्थापितों की समस्या जटिल है। रैयतों और विस्थापितों के अधिकार दिलाने के लिए गिरीडीह के पूर्व सांसद स्वर्गीय विनोद बिहारी महतो व स्वर्गीय राजकिशोर महतो के विचार धारा में चल कर लड़ाई लड़ी जाएगी। कहा कि यहां के कोलियरी में प्रबंधन द्वारा मनमानी किया जा रहा है। जिससे यहां के स्थानीय लोगों को आए दिन समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। कहा कि सीसीएल के ढोरी, बीएंडके, कथारा एवं डीवीसी बोकारो थर्मल चंद्रपुरा में रैयतों किसानों का जमीन अधिग्रहण किया गया है। रैयत किसान की जमीन पर ग्रामीण क्षेत्रों के घर के पास बिना नौकरी मुआवजा एवं पुनर्वास दिए जबरदस्ती जमीन पर कोयला निकाला जा रहा है। बिना पूर्णवास स्थल की व्यवस्था एवं सुविधाएं दिए बिना घर के बगल में हैवी ब्लास्टिंग कर भयभीत किया जा रहा है। प्रबंधन द्वारा रैयत किसान को केस मुकदमा में फसाया जा रहा है इन सब मुद्दों को लेकर विस्थापितों का एक दिवसीय सम्मेलन का आयोजन किया गया है। कहा कि हमारे पूर्वजो की जमीन को बचाना है एवं उस जमीन के हक व अधिकार के लिए प्रबंधन से लडाई लडनी है। कहा कि विस्थापितों के हक अधिकार के लिए सीसीएल प्रबंधन से जमीनी व कानूनी दोनो लड़ाई लड़ना है। झारखंड सरकार द्वारा अभी तक विस्थापन नीति नहीं बना है। जिससे यहां के विस्थापितों को उसका अधिकार नहीं मिल पाया। सीसीएल के विरुद्ध आर पार की लड़ाई लड़ने की आवश्यता है। जिसके लिए यहां के रैयतो को समय समय पर बैठक करना होगा। सीसीएल में पांच ट्रेड यूनियन चल रहा है जो विस्थापितों की आवाज नहीं उठा पाते। सीसीएल प्रबंधन द्वारा नौकरी मुआवजा पूर्णवास जैसी मूलभूत सुविधा प्रदान नहीं किया जा रहा है। प्रबंधन यहां के विस्थापितों के साथ मनमानी कर रहा है। गांव के विकास व अपनी जमीन के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। कहा कि विस्थापितों के हक अधिकार के लिए सीसीएल प्रबंधन से जमीनी व कानूनी दोनो लड़ाई लड़ना है। कहा कि आगामी लोकसभा चुनाव के बाद हक और अधिकार दिलाने के लिए एक वृहद आंदोलन का शंखनाद किया जाएगा। कहा कि इस बैनर की लड़ाई के कारण आज करगली ग्राउंड का नाम स्वं विनोद बिहारी महतो पडा एवं उनकी प्रतिमा भी लगी। आज भी लोग 1932 की लड़ाई विभिन्न संगठन, विभिन्न नेताओं के द्वारा उठाए जा रहा है मगर अभी तक पूरी तरह से कोई पहल नहीं है। यहॉ संबोधित लालपनिया विस्थापित के अध्यक्ष प्रमानंद प्रजापति, धनेश्वर महतो, हरख लाल महतो, रविंद्र कुमार महतो, जलील अंसारी, राजेंद्र महतो, मनोज कुमार नायक, द्वारिका महतो आदि ने किया। मौके पर रतिलाल महतो, दीनदयाल यादव, काली पोदो गोराई, जलेश्वर महतो, शिव शंकर महतो, नारायण महतो, फूलवंती देवी आदि लोग मौजूद थे।

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