कानपुर का ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद अब झारखंड तक, रामगढ़ में सड़कों पर उतरे प्रदर्शनकारी

आई लव मोहम्मद का विवाद का असर झारखंड में भी, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया पैदल मार्च

कानपुर के ‘आई लव मोहम्मद’ विवाद का असर अब झारखंड के रामगढ़ जिले में भी दिखाई देने लगा है। शनिवार को यहां सैकड़ों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग “खिदमत-ए-इंसानियत फेडरेशन” के बैनर तले सड़क पर पैदल मार्च करते हुए नजर आए। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “आई लव मोहम्मद” लिखी तख्तियां थीं और वे यूपी सरकार व पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इनकी मुख्य मांग है कि उत्तर प्रदेश में उनके समाज के जिन लोगों पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं, उन्हें वापस लिया जाए। आखिर क्या है पूरा मामला ? चलिए जानते हैं…

कानपुर विवाद का पृष्ठभूमि

कानपुर में ‘आई लव मोहम्मद’ से जुड़ा विवाद पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया और सार्वजनिक जगहों पर इस नारे से जुड़े पोस्टर और तख्तियां दिखाई देने लगीं। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई की और मुकदमे दर्ज किए। मुस्लिम समाज के लोग इसे अपनी धार्मिक भावनाओं से जोड़ते हुए कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे हैं। यही वजह है कि कानपुर का यह विवाद धीरे-धीरे अन्य राज्यों में भी असर दिखाने लगा है। रामगढ़ में हुए प्रदर्शन को इसी कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

रामगढ़ में पैदल मार्च

शनिवार को झारखंड के रामगढ़ जिले में “खिदमत-ए-इंसानियत फेडरेशन” के बैनर तले मुस्लिम समाज के लोग सड़क पर उतरे। अमुवा टांड़ ग्राउंड से घुटुआ थाना चौक तक पैदल मार्च किया गया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में “आई लव मोहम्मद” लिखी तख्तियां थीं। रास्ते भर यूपी सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। उनकी मांग थी कि उत्तर प्रदेश में जिन लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए हैं, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। इस प्रदर्शन में महिलाओं और युवाओं की भी उपस्थिति रही, जिससे मार्च का आकार और प्रभाव बढ़ गया।

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प्रशासनिक चुनौती और जाम

मार्च के दौरान रामगढ़-पतरातु मुख्य सड़क पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। अमुवा टांड़ से लेकर घुटुआ चौक तक लंबे समय तक ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रही। स्थानीय प्रशासन को जाम खुलवाने और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा। भीड़ को शांत करने के लिए अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। हालांकि पैदल मार्च शांतिपूर्ण रहा, लेकिन यातायात प्रभावित होने से आम लोगों को परेशानी हुई। पुलिस का कहना है कि उन्होंने स्थिति को नियंत्रण में रखा और किसी भी तरह की अप्रिय घटना नहीं होने दी।

मांगें और आगे की रणनीति

प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक यूपी सरकार उनके समाज के लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लेती। “खिदमत-ए-इंसानियत फेडरेशन” के पदाधिकारियों ने बताया कि वे आगे भी शांति पूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नहीं बल्कि समाज की भावनाओं से जुड़ा आंदोलन है। प्रदर्शन के दौरान प्रशासन से वार्ता की भी मांग उठी। वहीं स्थानीय पुलिस ने कहा कि उन्होंने मार्च की अनुमति शर्तों के साथ दी थी और आगे भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

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