Raebareli News : दरियापुर में NHAI विभाग द्वारा घर के सामने मानक के विपरीत नाला बनाए जाने को लेकर लोगों में रोष व्याप्त

Raebareli News : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के बड़ोखर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दरियापुर गांव में राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के विभाग द्वारा एक आवासीय संपत्ति के ठीक सामने मानकों के विपरीत नाला निर्माण की मार्किंग करने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश फैल गया है। घटना आज गुरुवार को दोपहर करीब 2:00 बजे की है, जब NHAI की टीम ने बिना किसी पूर्व सूचना के पीड़ित परिवार के सहन (आंगन) की जमीन पर नाले की डिजाइनिंग चिह्नित कर दी। इससे प्रभावित परिवार और आसपास के ग्रामीणों ने तत्काल विरोध दर्ज कराया, तथा पीड़ित पक्ष ने अपना बयान देते हुए निर्माण कार्य को तुरंत रोकने की मांग की है। मामला अब प्रशासनिक स्तर पर पहुंच चुका है, और ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी न हुईं तो बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।

घटना का पूरा विवरण

दरियापुर गांव, जो रायबरेली-लखनऊ राजमार्ग से सटा हुआ एक शांतिपूर्ण ग्रामीण इलाका है, यहां NHAI द्वारा चल रहे सड़क विस्तार परियोजना के तहत जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के नाम पर नाला निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। लेकिन इस प्रक्रिया में विभागीय लापरवाही ने स्थानीय निवासियों को परेशान कर दिया है। पीड़ित परिवार, जो वर्षों से इसी स्थान पर निवास कर रहा है, का कहना है कि उनका सहन क्षेत्र, जो घर का अभिन्न हिस्सा है, अब नाले की चपेट में आ गया है। NHAI की टीम ने बिना किसी सर्वे या वैकल्पिक व्यवस्था के सीधे जमीन पर मार्किंग कर दी, जो केंद्रीय निर्माण मानकों (जैसे IRC गाइडलाइंस और स्थानीय भवन नियमों) का स्पष्ट उल्लंघन है।

स्थानीय निवासी रामेश्वर प्रसाद (पीड़ित परिवार के मुखिया) ने बताया कि नाला निर्माण से न केवल उनके घर का प्रवेश द्वार अवरुद्ध हो जाएगा, बल्कि दैनिक जीवन में भारी असुविधा होगी। “हमारा सहन हमारी निजी संपत्ति है, जहां बच्चे खेलते हैं और परिवार के सदस्य आते-जाते हैं। NHAI का यह निर्णय पूरी तरह गैर-कानूनी और अमानवीय है। यदि नाला यहां बनेगा, तो हमारी महिलाओं और बुजुर्गों को कीचड़ भरे रास्ते से गुजरना पड़ेगा, जो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ाएगा,” उन्होंने कहा। पीड़ित ने आगे जोड़ा कि विभाग ने कोई मुआवजा या वैकल्पिक भूमि का प्रस्ताव भी नहीं दिया है, जिससे परिवार आर्थिक और भावनात्मक रूप से प्रभावित हो रहा है।

लोगों का विरोध और रोष

घटना की सूचना मिलते ही आसपास के दर्जनों ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने NHAI टीम को घेर लिया और कार्य को तत्काल रोकने की मांग की। ग्रामीणों का कहना है कि यह समस्या केवल एक परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे गांव की जल निकासी व्यवस्था को प्रभावित कर सकती है। “NHAI को विकास के नाम पर ग्रामीणों की जिंदगी से खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। यदि मानकों का पालन न किया गया, तो हम जिला प्रशासन से लेकर उच्च न्यायालय तक लड़ेंगे,” एक ग्रामीण नेता ने कहा। विरोध के दौरान कोई हिंसक घटना नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों ने NHAI कार्यालय के बाहर धरना देने की चेतावनी दी है।

स्थानीय पंचायत प्रतिनिधि ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा कि गांव की सभा में इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कलेक्टर से शिकायत दर्ज कराई जाएगी। ग्रामीणों का रोष सोशल मीडिया पर भी फैल गया है, जहां #SaveDariyapur और #NHAIInjustice जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे हैं।

NHAI और प्रशासन की प्रतिक्रिया

NHAI के स्थानीय इंजीनियर ने प्रारंभिक जांच के बाद बताया कि मार्किंग एक प्रारंभिक सर्वे का हिस्सा थी, और वास्तविक निर्माण से पहले वैकल्पिक स्थलों पर विचार किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने मानकों के उल्लंघन की बात को खारिज करते हुए कहा, “हमारे पास सभी आवश्यक अनुमतियां हैं, लेकिन स्थानीय असुविधा को ध्यान में रखते हुए उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।” दूसरी ओर, बड़ोखर थाना प्रभारी ने शांति बनाए रखने का आश्वासन दिया है और मामले की जांच के लिए एक टीम गठित करने की बात कही। जिला प्रशासन से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन स्रोतों के अनुसार, कल सुबह एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा सकती है।

आगे की संभावनाएं

यह घटना NHAI की परियोजनाओं में पारदर्शिता और स्थानीय भागीदारी की कमी को उजागर करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते हस्तक्षेप न किया गया, तो यह मामला पर्यावरणीय और कानूनी जटिलताओं में बदल सकता है। पीड़ित परिवार ने मांग की है कि न केवल मार्किंग हटाई जाए, बल्कि प्रभावित क्षेत्र के लिए उचित मुआवजा और पुनर्वास योजना तैयार की जाए। ग्रामीणों ने फैसला किया है कि यदि 48 घंटों के अंदर समाधान न हुआ, तो वे रायबरेली कलेक्ट्रेट का घेराव करेंगे।

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