Rahveer Good Samaritan Scheme : उत्तर प्रदेश शासन के निर्देश पर रायबरेली जिले में ‘राहवीर गुड सेमेटेरियन योजना’ (Rahveer Good Samaritan Scheme) को पूर्ण रूप से लागू कर दिया गया है। इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को ‘गोल्डन आवर’ (दुर्घटना के पहले एक घंटे) के अंदर निकटतम अस्पताल पहुंचाने वाले व्यक्ति को अब ₹5,000 के स्थान पर ₹25,000 की धनराशि से पुरस्कृत किया जाएगा। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) डॉ. यशवीर सिंह ने आज शुक्रवार दोपहर करीब 1:00 बजे इसकी आधिकारिक जानकारी देते हुए कहा कि यह निर्णय सड़क सुरक्षा को मजबूत बनाने और नागरिकों को त्वरित सहायता के लिए प्रोत्साहित करने का हिस्सा है।
यह घोषणा नवंबर 2025 के ‘यातायात माह’ अभियान के दौरान की गई है, जो पूरे जिले में 1 नवंबर से 30 नवंबर तक चलाया जा रहा है। एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं में देरी से इलाज के कारण होने वाली मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार की इस योजना को उत्तर प्रदेश में प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। योजना का नाम ‘राहवीर’ एक ऐसे व्यक्ति की स्मृति में रखा गया है, जिनकी सड़क हादसे में समय पर मदद न मिलने से मौत हो गई थी। अब आम नागरिक बिना किसी कानूनी झंझट या डर के घायलों की सहायता कर सकेंगे, और बदले में उन्हें सम्मान के साथ आर्थिक पुरस्कार मिलेगा।

योजना के मुख्य बिंदु और लाभ
- पुरस्कार राशि: पहले ₹5,000 देने वाली योजना में अब राशि को पांच गुना बढ़ाकर ₹25,000 कर दिया गया है। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में हस्तांतरित की जाएगी।
- गोल्डन आवर का महत्व: दुर्घटना के तुरंत बाद के पहले 60 मिनट को ‘गोल्डन आवर’ कहा जाता है। इस दौरान त्वरित चिकित्सा सहायता मिलने से घायल की जान बचने की संभावना 80% तक बढ़ जाती है। योजना इसी पर जोर देती है।
- पात्रता: कोई भी आम नागरिक जो दुर्घटना स्थल पर घायल व्यक्ति को अस्पताल या ट्रॉमा सेंटर पहुंचाता है, पात्र होगा। यदि एक से अधिक व्यक्ति सहायता करते हैं, तो राशि समान रूप से बांटी जाएगी। हालांकि, घायल का रिश्तेदार होने पर पुरस्कार नहीं मिलेगा, ताकि योजना का उद्देश्य शुद्ध रहे।
- अतिरिक्त सहायता: घायल व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती होने पर कैशलेस इलाज की सुविधा भी उपलब्ध होगी। केंद्र सरकार की ‘कैशलेस ट्रीटमेंट स्कीम’ के तहत 7 दिनों तक ₹1.5 लाख तक का खर्च शासन वहन करेगा।
- प्रक्रिया: अस्पताल पहुंचाने के बाद मेडिकल टीम पुलिस को सूचना देगी। पुलिस और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) सत्यापन करेंगे। सत्यापन के बाद जिला स्तरीय समिति पुरस्कार जारी करेगी। सहायक को एक प्रशंसा प्रमाण पत्र भी प्रदान किया जाएगा।
जागरूकता अभियान का विस्तार
एसपी डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि यातायात माह के तहत जिले भर में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ट्रैफिक प्रभारी इंद्रपाल सिंह सेंगर के नेतृत्व में सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, बाजारों और प्रमुख चौराहों पर बड़े-बड़े बैनर लगाए जा रहे हैं। इन बैनरों पर योजना की पूरी जानकारी, हेल्पलाइन नंबर (1073 या 112) और ‘सड़क सुरक्षा जीवन रक्षा’ का संदेश प्रमुखता से दिया गया है।
इसके अलावा
- नुक्कड़ नाटक और रैलियां: विभिन्न स्थानों पर नुक्कड़ नाटक, जागरूकता रैलियां और सेमिनार आयोजित हो रहे हैं। 1 नवंबर को ही जिलाधिकारी और एसपी द्वारा संयुक्त रूप से एक जागरूकता रैली का शुभारंभ किया गया था, जिसमें सैकड़ों युवा और व्यापारी शामिल हुए।
- स्कूल-कॉलेज कार्यक्रम: शैक्षणिक संस्थानों में विशेष सत्र चलाए जा रहे हैं, जहां छात्रों को यातायात नियमों और योजना के बारे में बताया जा रहा है।
- मीडिया अभियान: स्थानीय रेडियो, टीवी और सोशल मीडिया के माध्यम से प्रचार किया जा रहा है। एसपी ने अपील की कि नागरिक दुर्घटना देखते ही तुरंत सहायता करें और पुलिस को सूचित करें।
जिले में सड़क सुरक्षा की स्थिति
रायबरेली में पिछले वर्ष दर्ज सड़क दुर्घटनाओं में 150 से अधिक मौतें हुईं, जिनमें से अधिकांश देरी से इलाज के कारण थीं। एसपी ने कहा कि यह योजना लागू होने से न केवल मौतों में कमी आएगी, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना भी मजबूत होगी। उत्तर प्रदेश में 2023 में 22,532 सड़क हादसों में मौतें दर्ज की गईं, जो देशभर के 14% हैं। केंद्र सरकार की इस पहल से पूरे राज्य में सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है।
एसपी की अपील
डॉ. यशवीर सिंह ने नागरिकों से अपील की, “सड़क पर कोई दुर्घटना दिखे तो रुकें, मदद करें और जान बचाएं। आपका एक छोटा प्रयास किसी का जीवन बदल सकता है। योजना के तहत आपको सम्मान और पुरस्कार दोनों मिलेंगे।” उन्होंने जोर दिया कि पुलिस किसी सहायक से पूछताछ नहीं करेगी, जैसा कि मोटर व्हीकल एक्ट 1988 में प्रावधान है।










