रायबरेली: किसान की जमीन पर जबरन पोल लगाना पड़ा महंगा, कोर्ट के आदेश पर बिजली विभाग के XEN-JE पर केस दर्ज

रायबरेली में एक किसान की निजी भूमि पर जबरन बिजली का खंभा लगाने के आरोप में बिजली विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है। अदालत के सख्त हस्तक्षेप के बाद यह कार्रवाई की गई, जिससे ग्रामीण इलाकों में विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रायबरेली: उत्तर प्रदेश के रायबरेली में अपनी जमीन पर बिना इजाजत बिजली का पोल लगाए जाने से परेशान एक किसान को अदालत से राहत मिली है। न्यायालय के आदेश पर बछरावां थाने में बिजली वितरण निगम के अधिशासी अभियंता (XEN) और जूनियर इंजीनियर (JE) के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। यह मामला अधिकारियों की मनमानी और भूमि अतिक्रमण से जुड़ा है, जिसको लेकर स्थानीय किसानों में काफी आक्रोश है।

मामला कुंदनगंज गांव का है, जहां के निवासी राम सजीवन ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों ने उनकी कृषि भूमि पर जबरन एक विद्युत पोल लगा दिया। जब उन्होंने इसका विरोध किया और अधिकारियों से शिकायत की, तो उनकी सुनवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने न्याय के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया।

अदालत का सख्त रुख और पुलिस की कार्रवाई

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय अदालत ने पुलिस को तत्काल मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया। इसके बाद बछरावां थाने में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के गोरा बाजार वितरण खंड के एक्सईएन और हरचंदपुर के जेई के खिलाफ केस दर्ज किया गया। पुलिस ने बताया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 447 (आपराधिक अतिक्रमण) और 506 (जान से मारने की धमकी) समेत अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। थाना प्रभारी के अनुसार, दोनों आरोपी अधिकारियों को नोटिस भेजकर जवाब तलब किया जाएगा।

किसानों का गुस्सा और विभाग की मनमानी

इस घटना ने रायबरेली के ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली विभाग के खिलाफ पनप रहे गुस्से को और हवा दे दी है। कई किसानों का आरोप है कि विद्युतीकरण के नाम पर विभाग अक्सर उनकी निजी जमीनों पर बिना सहमति या मुआवजे के निर्माण कर देता है। पीड़ित किसान राम सजीवन ने अपनी व्यथा बताते हुए कहा:

“मेरी जमीन पर पोल लगाने से फसलें बर्बाद हो गईं। विभाग ने न तो कोई मुआवजा दिया और न ही पहले से कोई इजाजत ली। अदालत ने तो न्याय दे दिया, लेकिन मेरे नुकसान की भरपाई कौन करेगा?”

स्थानीय किसान संगठनों ने भी इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) ने चेतावनी दी है कि अगर अधिकारियों की ऐसी मनमानी नहीं रुकी तो वे ग्रामीण स्तर पर बड़ा आंदोलन करेंगे।

जांच और आगे का रास्ता

पुलिस ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए एक टीम बनाई है, जिसमें राजस्व विभाग के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। यह टीम राम सजीवन के भूमि दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और घटनास्थल का निरीक्षण करेगी। दूसरी ओर, बिजली विभाग के अधिकारियों ने इस मामले पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए गए तो दोनों अधिकारियों पर निलंबन जैसी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला अब पूरे प्रदेश में सरकारी परियोजनाओं के तहत भूमि अधिग्रहण और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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