GST Department : GST विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल: प्रतिबंधित प्लास्टिक मामले में 13 दिन की देरी, व्यापारी रो पड़े

GST Department : रायबरेली में जीएसटी (राज्यकर) विभाग की लापरवाहीपूर्ण कार्यशैली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। एक ओर जहां व्यापारी वर्ग कोविड-काल में टूटी कमर के बाद कर्ज लेकर किसी तरह अपना कारोबार चलाने को मजबूर है, वहीं जीएसटी विभाग पर उन्हें बेवजह परेशान करने के आरोप लग रहे हैं।

हालिया मामला प्रतिबंधित प्लास्टिक जब्ती से जुड़ा है, जिसमें जीएसटी विभाग ने ट्रक भरे सामान को 13 दिन तक अपने पास रोके रखा और फिर अचानक नगर पालिका को सौंप दिया। इस देरी से विभाग के अधिकारी संदेह के घेरे में आ गए हैं।

प्लास्टिक जब्ती और 13 दिन की देरी

​नगर पालिका ने प्रतिबंधित प्लास्टिक के इस्तेमाल और बिक्री को रोकने के लिए सख्ती शुरू की है। मंगलवार को पालिका ने करीब एक क्विंटल प्रतिबंधित प्लास्टिक के गिलास और प्लेट जब्त किए।

जब्ती का समय: यह पूरा सामान (जिसकी कीमत करीब ढाई लाख रुपये बताई जा रही है) जीएसटी विभाग ने बीते 29 अक्टूबर को एक चेकिंग के दौरान ट्रक से पकड़ा था।

हस्तांतरण में देरी: हैरानी की बात यह है कि जीएसटी विभाग ने इस प्रतिबंधित सामान को 13 दिन बाद, यानी सोमवार को नगर पालिका के सुपुर्द किया। जीएसटी के इस लंबे विलंब पर सवाल उठ रहे हैं कि प्रतिबंधित सामग्री को तुरंत पालिका को क्यों नहीं सौंपा गया। इतने दिनों तक सामान को रोके रखने की इस कार्यशैली ने जीएसटी अफसरों को सवालों के घेरे में ला दिया है।

व्यापारी का दर्द: “अफसरों ने किया अन्याय”

​जलकल परिसर में मौजूद जब्त सामान के मालिक, दुकानदार जितिन जायसवाल, कार्रवाई के बाद रो पड़े। उन्होंने जीएसटी अफसरों पर अन्याय करने का आरोप लगाया।

​”बीते 29 अक्टूबर को बाहर से ट्रक से सामान मंगाया था। जीएसटी अफसरों ने ट्रक समेत पूरे सामान को पकड़ा। जो सामान सही था, उसे भी वापस नहीं किया गया। कोरोना के समय से ऋण लेकर काम कर रहा हूँ, जिसकी किस्तें भी देनी हैं। अगर यही स्थिति रही तो व्यापार ठप करना पड़ेगा।”

जितिन जायसवाल, दुकानदार

​जायसवाल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जीएसटी के अफसर छापामारी के नाम पर दुकानदारों का शोषण कर रहे हैं, जिससे सरकार की ‘व्यापार करो’ की नीति पर भी असर पड़ रहा है।

नगर पालिका की कार्रवाई और अधिकारियों के बयान

​नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) स्वर्ण सिंह ने बताया कि जीएसटी विभाग ने उन्हें करीब 200 गत्ते सौंपे थे, जिनमें प्रतिबंधित प्लास्टिक के गिलास और प्लेट थे।

जुर्माना: दुकानदार जितिन जायसवाल पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

चेतावनी: ईओ ने सभी दुकानदारों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि दोबारा प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर और सख्त जुर्माना लगाया जाएगा।

नष्ट करने की तैयारी: कर निर्धारण अधिकारी ललितेश कुमार सक्सेना ने बताया कि बरामद किए गए सामान को जल्द ही नष्ट कराया जाएगा। ​वहीं, सहायक कर आयुक्त (प्रवर्तन) सलोनी भारद्वाज ने 13 दिन की देरी से सामान सौंपे जाने के सवाल पर कहा कि “मेरे विभाग से इसका कुछ लेना-देना नहीं है”, जो उनके विभाग की ज़िम्मेदारी से पल्ला झाड़ने जैसा प्रतीत होता है।

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