Raebareli : रायबरेली में जीरो टॉलरेंस की धज्जियां उड़ाई जा रही है लगातार भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं। यहां उप संभागीय परिवहन विभाग के बाद अब आंगनबाड़ी में नौकरी दिलाने के नाम पर डेढ़ लाख रुपए वसूल लिए गए जिसका वीडियो वायरल हुआ तो विभाग में हड़कंप मच गया।
बताते चलें कि शिवगढ़ थाना क्षेत्र में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद पर नियुक्ति के नाम पर एक सुपरवाइजर ने कथित तौर पर एक महिला उम्मीदवार से डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी, लेकिन नौकरी न मिलने के बाद भी पैसे लौटाए नहीं। इस मामले में जिला कार्यक्रम अधिकारी डीपीओ विनय कुमार का नाम भी फंसा है। पीड़ित महिला ने सुपरवाइजर के साथ व्हाट्सएप कॉल रिकॉर्ड कर वीडियो बनाया और उसे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वायरल वीडियो के बाद प्रशासन हरकत में आया है। मुख्य विकास अधिकारी सीडीओ अंजू लता ने मामले को संज्ञान में लेते हुए जांच की घोषणा की है और कहा है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

जानकारी के अनुसार, शिवगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली एक महिला ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद के लिए आवेदन किया था। भर्ती प्रक्रिया के दौरान संबंधित सुपरवाइजर ने उनसे संपर्क किया और नियुक्ति सुनिश्चित करने के एवज में डेढ़ लाख रुपये की मांग की। पीड़ित महिला ने पैसे दे दिए, लेकिन नियुक्ति पत्र न मिलने पर उन्होंने सुपरवाइजर से पैसे लौटाने की गुजारिश की। सुपरवाइजर ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। निराश होकर पीड़ित ने सुपरवाइजर के साथ हुई व्हाट्सएप कॉल को रिकॉर्ड किया, जिसमें रिश्वत की मांग और पैसे न लौटाने की बात साफ सुनाई दे रही है। इस वीडियो में सुपरवाइजर न केवल रिश्वत की बात स्वीकार करता नजर आता है, बल्कि डीपीओ विनय कुमार को भी इस सौदे में शामिल बताता है। वीडियो में कथित तौर पर कहा गया है कि डीपीओ साहब का भी हिस्सा है, इसलिए पैसे बिना वापस नहीं हो सकते। पीड़ित ने इस वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपलोड कर दिया, जो तेजी से वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होते ही स्थानीय स्तर पर आक्रोश फैल गया और कई अन्य महिलाओं ने भी इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराईं।
डीपीओ विनय कुमार का नाम क्यों फंसा?
डीपीओ विनय कुमार रायबरेली जिले में आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया के प्रमुख अधिकारी हैं।वायरल वीडियो में सुपरवाइजर के बयानों से यह संकेत मिलता है, कि भर्ती में ऊपरी स्तर पर भी सेटिंग की गई थी। जिले में हाल ही में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की भर्ती में पहले भी अनियमितताओं के आरोप लगे थे। सितंबर 2025 में एक जांच रिपोर्ट में हरचंदपुर और डलमऊ ब्लॉक में सात महिलाओं का चयन गलत पाया गया था, जहां फर्जी आय प्रमाण पत्र और दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। उस मामले में भी विनय कुमार का नाम आया था, जहां उन्होंने कहा था कि मामले की फाइल जिलाधिकारी के पास भेज दी गई है और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”अब इस नए मामले में उनका नाम फिर से चर्चा में है, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि क्या भर्ती प्रक्रिया में सिस्टमैटिक भ्रष्टाचार चल रहा है।










