Retired Diploma Engineers Welfare Association : पेंशनरों की गुहार; सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स ने सरकार से उठाई लंबित मांगें, राशिकरण कटौती से लेकर चिकित्सा लाभ तक की मांग

लखनऊ : सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स कल्याण संघ (Retired Diploma Engineers Welfare Association) उत्तर प्रदेश ने राज्य सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर पेंशनरों की लंबित समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया है। संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि केंद्र और प्रदेश सरकार के बार-बार संज्ञान में लाने के बावजूद इन मुद्दों का समाधान नहीं हो रहा है। ज्ञापन में 12 से अधिक मांगें उठाई गई हैं, जिनमें राशिकरण कटौती की अवधि कम करना, अतिरिक्त पेंशन बढ़ोतरी, चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर आयकर कटौती रोकना और पुरानी पेंशन बहाली जैसी प्रमुख मांगें शामिल हैं। संघ ने इन समस्याओं के समाधान के लिए “आप्त ध्यानाकर्षण कार्यक्रम” शुरू करने की बात कही है।

संघ के जनपद अध्यक्ष राघवेंद्र बहादुर सिंह और जनपद सचिव श्यामेन्द्र सिंह द्वारा हस्ताक्षरित इस ज्ञापन में कहा गया है कि संघ प्रदेश के 20 हजार से अधिक सेवानिवृत्त डिप्लोमा इंजीनियर्स का प्रतिनिधित्व करता है, जो राजकीय विभागों, निगमों, परिषदों और निकायों से रिटायर हुए हैं। ये पेंशनर सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज सेवा में सक्रिय हैं, जैसे निर्धन कन्या विवाह, वृद्धाश्रम, स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण जैसे कार्यक्रमों में योगदान दे रहे हैं। ज्ञापन में दिया गया है कि पेंशनरों ने अपने जीवन का सर्वश्रेष्ठ समय राष्ट्र निर्माण, अर्थव्यवस्था, शिक्षा, प्रशासन, स्वास्थ्य और लोक कल्याण में समर्पित किया है, जिससे देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। इसलिए सरकार को सुनिश्चित करना चाहिए कि पेंशनर अपनी हिस्सेदारी से वंचित न रहें।

ज्ञापन का आधार प्रयागराज में 11 नवंबर 2025 को हुई प्रांतीय कार्यकारिणी बैठक है, जहां इन मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। संघ ने पहले भी मंडल/शाखा स्तर से ज्ञापन भेजे हैं और सरकार के विभिन्न पत्रों का हवाला दिया है, जैसे वित्त विभाग के पत्र दिनांक 31 मई 2023, संघ के पत्र दिनांक 27 सितंबर 2025 और उप मुख्यमंत्री का पत्र। इसके बावजूद समस्याओं का निराकरण न होने पर संघ ने मुख्यमंत्री से इन मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।

प्रमुख मांगें और समस्याएं: विस्तार से समझें

ज्ञापन में पेंशनरों की 12 से अधिक समस्याओं को विस्तार से उठाया गया है। यहां इनकी विस्तृत जानकारी दी जा रही है:

आठवें वेतन आयोग में पेंशनरों के हित सुरक्षित करने की मांग : भारत सरकार ने आठवें वेतन आयोग के विचारार्थ विषय निर्धारित किए हैं, लेकिन पेंशन और पेंशनरी लाभों को इससे बाहर रखा गया है। संघ ने अनुरोध किया है कि आयोग के दायरे में पेंशनरों के हितों को शामिल किया जाए, ताकि वे वेतन संशोधन के लाभ से वंचित न रहें।

80 वर्ष की आयु पर अतिरिक्त पेंशन लाभ : वर्तमान में 80 वर्ष पूर्ण करने के बाद 20 प्रतिशत पेंशन बढ़ोतरी मिलती है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसलों के अनुसार यह लाभ 80 वर्ष शुरू होने पर ही दिया जाना चाहिए। संघ ने इस बदलाव की मांग की है, ताकि पेंशनरों को जल्द लाभ मिल सके।

65, 70 और 75 वर्ष पर अतिरिक्त पेंशन बढ़ोतरी : 60 वर्ष के बाद पेंशनर परिवारिक जिम्मेदारियां निभा लेते हैं, लेकिन 65 वर्ष के बाद गंभीर रोगों के कारण खर्च बढ़ जाते हैं। संघ ने मांग की है कि 65 वर्ष पर 6 प्रतिशत, 70 पर 10 प्रतिशत और 75 पर 15 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन बढ़ोतरी स्वीकृत की जाए, ताकि बढ़ती उम्र के साथ खर्चों को संभाला जा सके।

कोरोना काल की रोकी गई महंगाई राहत किश्तों का भुगतान : कोरोना महामारी के दौरान रोकी गई 18 महीनों की महंगाई भत्ता/राहत किश्तों का भुगतान किया जाए। यदि भुगतान संभव न हो, तो यह राशि मुख्यमंत्री/प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा की जाए, ताकि पेंशनर 80जी के तहत आयकर लाभ ले सकें।

वरिष्ठ नागरिकों को बस किराए में छूट : वरिष्ठ पेंशनरों को बस किराए में 50 प्रतिशत छूट प्रदान की जाए, ताकि यात्रा सुगम हो।

राशिकरण कटौती की अवधि कम करना : पेंशन के एवज में राशिकरण की वसूली 15 वर्षों में की जाती है, जबकि कई राज्यों में यह 12-13 वर्ष है। न्यायालयों ने भी 10 वर्ष 11 माह की अवधि पर फैसले दिए हैं। संघ ने बताया कि 1987 में पेंशन के 1 रुपये पर 125.58 रुपये मिलते थे, लेकिन अब केवल 98.32 रुपये मिलते हैं, फिर भी अवधि 15 वर्ष ही है। मांग है कि अवधि 10 वर्ष 11 माह की जाए और सरकार की गठित कमेटी की रिपोर्ट पर पुनर्विचार किया जाए, क्योंकि इसे आठवें वेतन आयोग को सौंपना उचित नहीं है।

चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर आयकर कटौती रोकना : चिकित्सा बिलों से आयकर कटौती पेंशनरों का वित्तीय और मानसिक उत्पीड़न है, क्योंकि पेंशन से पहले ही आयकर कट चुका होता है। आयकर विभाग केवल सरकारी या मान्यता प्राप्त अस्पतालों पर लाभ देता है, लेकिन आपात स्थिति में अन्य जगह इलाज होता है। मांग है कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर पूरी तरह आयकर कटौती रोकी जाए।

राशिकरण राशि की अतिरिक्त कटौती से मुक्ति : पूर्व में 1 रुपये पर 125.56 रुपये मिलते थे, अब 98.32 रुपये, लेकिन कटौती अवधि वही। जो पेंशनर अतिरिक्त कटौती की राशि वापस जमा करना चाहें, उनका अनुरोध स्वीकार कर कटौती समाप्त की जाए।

पारिवारिक पेंशनरों के लिए सरल प्रक्रिया : पेंशनर की मृत्यु के बाद परिवार को पेंशन प्राप्त करने में भाग-2, भाग-3 और उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जैसी अनावश्यक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। मांग है कि पेंशनर जीवनकाल में ही परिवार के दस्तावेज पूर्ण करा सकें, ताकि मृत्यु के बाद परिवार को भटकना न पड़े।

विधवा पुत्री को पारिवारिक पेंशन में शामिल करना : विधवा पुत्री को भी पारिवारिक पेंशनर की श्रेणी में शामिल किया जाए, जैसे विधवा पुत्री पहले से है।

ग्रेच्युटी सीमा का लाभ पूर्व प्रभाव से : 1 जनवरी 2024 से ग्रेच्युटी सीमा 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख की गई है। मांग है कि 31 दिसंबर 2023 को रिटायर हुए पेंशनरों को भी यह लाभ दिया जाए।

तदर्थ सेवाओं को पेंशन योग्य मानना : तदर्थ सेवाओं को पेंशन और ग्रेच्युटी के लिए अर्हकारी माना जाए। कई सदस्यों के न्यायालय से फैसले आ चुके हैं। साथ ही, 2021 के सेवा विधिमान्यकरण अधिनियम को आदेश की तिथि से प्रभावी बनाया जाए।

इसके अतिरिक्त, ज्ञापन में पुरानी पेंशन बहाली की मांग भी दोहराई गई है। संघ ने कहा कि पेंशनरों को लगता है कि उनकी समस्याएं मुख्यमंत्री के संज्ञान में नहीं लाई जा रही हैं, जिससे वे न्याय से वंचित हैं। संघ ने मुख्यमंत्री से संबंधित विभागों को निर्देश देकर इन मुद्दों का समाधान करने की अपील की है। यह ज्ञापन पेंशनरों की बढ़ती असंतोष को दर्शाता है और यदि समाधान नहीं हुआ तो आगे विरोध कार्यक्रम हो सकते हैं। सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन संघ उम्मीद जता रहा है कि शीघ्र कार्रवाई होगी।

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