Bahraich guard of honour controversy : उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से एक ऐसा वीडियो वायरल हो रहा है, जो राजनीतिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। मशहूर कथावाचक आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को पुलिस लाइंस के परेड ग्राउंड में पूरा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। वीडियो में साफ दिख रहा है कि सफेद सरकारी गाड़ी से उतरते ही लाल कालीन बिछाया गया, पुलिस अधिकारी सैल्यूट करते हैं, फिर ट्रेनिंग ले रहे पुलिसकर्मी परेड करते हैं और कथावाचक मंच पर बैठकर सलामी लेते नजर आते हैं। बहराइच के एसपी खुद परेड की अगुवाई करते दिख रहे हैं।
यह सम्मान आमतौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को मिलता है। लेकिन एक धार्मिक कथावाचक को ऐसा सम्मान मिलना कई सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी दल इसे संविधान का अपमान और बाबा साहेब अंबेडकर के सपनों पर हमला बता रहे हैं।

समाजवादी पार्टी ने लगाया बड़ा आरोप
समाजवादी पार्टी की मीडिया सेल ने 38 सेकंड का यह वीडियो अपने एक्स हैंडल पर शेयर किया और सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर निशाना साधा। पार्टी ने लिखा, “यूपी के बहराइच में एक कथा वाचक को पुलिस परेड सलामी दिलाई गई। उक्त कथावाचक किस पद पर हैं? क्या बताने का कष्ट करेंगे मुख्यमंत्री महोदय? या संविधान को ताक पर रखकर शासन चला रहे हैं? संविधान का ऐसा अपमान, बाबा साहेब का ऐसा अपमान पहले कभी नहीं हुआ। भाजपा सरकार रोज बाबा साहेब के संविधान का अपमान कर रही है। शर्म करें।”
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी तंज कसा कि जब पुलिस सलामी में व्यस्त रहेगी तो अपराधी मस्त रहेंगे। उनका इशारा साफ था कि प्रदेश में अपराध बढ़ रहा है और पुलिस ऐसे आयोजनों में समय बर्बाद कर रही है।
चंद्रशेखर आजाद की तीखी प्रतिक्रिया
नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर आजाद ने भी वीडियो शेयर कर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने लिखा, “भारत कोई मठ नहीं, बल्कि संवैधानिक गणराज्य है। राज्य किसी धर्म विशेष की जागीर नहीं। फिर भी एक कथावाचक पुंडरीक गोस्वामी को पुलिस परेड और सलामी दी जा रही है। यह संविधान पर खुला हमला है। सलामी राज्य की संप्रभु शक्ति का प्रतीक है, जो राष्ट्र और शहीदों के नाम पर दी जाती है। पुंडरीक गोस्वामी कौन सा संवैधानिक पद पर हैं? किस प्रोटोकॉल के तहत यह सम्मान मिला? क्या अब धार्मिक पहचान ही नया सरकारी प्रोटोकॉल है?”
चंद्रशेखर ने योगी सरकार पर आरोप लगाया कि वह धर्म के आगे नतमस्तक हो रही है।
पुलिस का पक्ष, मोटिवेशनल सेशन था
बहराइच पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कोई धार्मिक आयोजन नहीं था। पुलिस ट्रेनिंग के दौरान कई ट्रेनी तनाव और डिप्रेशन में इस्तीफा दे रहे थे। करीब 28 ट्रेनियों ने मानसिक स्वास्थ्य की समस्या बताकर छोड़ दिया था। ऐसे में आचार्य पुंडरीक गोस्वामी को मोटिवेशनल स्पीच, योग और ध्यान सेशन के लिए बुलाया गया था। उनका व्याख्यान ट्रेनियों का मनोबल बढ़ाने में मददगार साबित हुआ। पुलिस का कहना है कि परेड और सलामी सिर्फ औपचारिक स्वागत का हिस्सा थी।
पुंडरीक गोस्वामी वृंदावन के युवा और लोकप्रिय कथावाचक हैं, जो भागवत कथा और आध्यात्मिक प्रवचन के लिए जाने जाते हैं। पहले भी वे पुलिसकर्मियों के लिए ऐसे सेशन कर चुके हैं।
DGP ने एसपी से मांगा स्पष्टीकरण
वीडियो वायरल होने के बाद यूपी पुलिस के डीजीपी ने गंभीरता दिखाई। उन्होंने पुलिस परेड ग्राउंड के अनधिकृत इस्तेमाल और प्रोटोकॉल उल्लंघन पर बहराइच के एसपी से स्पष्टीकरण मांगा है। सूत्र बता रहे हैं कि जांच के बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है। अभी तक बहराइच पुलिस या किसी सीनियर अफसर का कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन डीजीपी का कदम दिखाता है कि मामला गंभीर है।
क्या कहता है प्रोटोकॉल?
गार्ड ऑफ ऑनर का प्रोटोकॉल साफ है – यह उच्च संवैधानिक पदों, विदेशी मेहमानों या विशेष अवसरों पर दिया जाता है। धार्मिक व्यक्ति को ऐसा सम्मान पहले कभी नहीं मिला। विपक्ष इसे धर्म और राज्य के मिश्रण का उदाहरण बता रहा है, जबकि पुलिस इसे ट्रेनियों की भलाई से जोड़ रही है।
निष्कर्ष
यह मामला सिर्फ एक वीडियो तक सीमित नहीं है। यह संविधान की धर्मनिरपेक्षता पर सवाल उठा रहा है। क्या पुलिस जैसे संस्थान को धार्मिक आयोजनों में इस्तेमाल करना ठीक है? क्या मोटिवेशन के नाम पर प्रोटोकॉल तोड़ा जा सकता है? विपक्ष इसे योगी सरकार की सोच का प्रमाण बता रहा है, जहां धर्म को प्रशासन पर हावी होने दिया जा रहा है।
दूसरी तरफ, कुछ लोग कह रहे हैं कि आध्यात्मिक सेशन से पुलिसकर्मियों को फायदा हुआ, तो इसमें गलत क्या है? लेकिन सलामी और परेड जैसे प्रतीक क्यों?










