Raebareli : कलेक्ट्रेट परिसर में काशी के मणिकर्णिका घाट में महारानी लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा तोड़े जाने के विरोध में बुधवार को समाजसेवियों ने जिलाधिकारी के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजा।
बताते चलें कि वाराणसी काशी के मणिकर्णिका घाट पर देवी अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा व मंदिरों को तोड़े जाने को लेकर ज्ञापन देते हुए राम सजीवन पाल एवं पुष्कर पाल ने बताया कि मातेश्वरी देवी अहिल्याबाई होल्कर ने सम्पूर्ण भारतवर्ष में 12 हजार से अधिक मंदिरों का निर्माण व जीर्णोद्धार कराया, जिससे सनातन धर्म की नींव मजबूत हुई। इन्हीं मंदिरों में से काशी स्थित मणिकर्णिका घाट पर प्रशासन द्वारा कथित रूप से तोड़-फोड़ की गई तथा वहां स्थापित होल्कर की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किया गया, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंची है।

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा इसे फर्जी एआई जनरेटेड वीडियो बताया गया, लेकिन प्रशासन की ओर से घाट की वास्तविक स्थिति का कोई स्पष्ट वीडियो सार्वजनिक नहीं किया गया। वहीं, पाल समाज के कुछ युवा जब शांतिपूर्ण तरीके से घाट की वास्तविक स्थिति जानने पहुंचे तो प्रशासन द्वारा उनके साथ बदसलूकी व लाठीचार्ज किए जाने का आरोप लगाया गया, जिससे समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
उन्होंने राष्ट्रपति से तीन प्रमुख मांग करते हुए कहा कि प्रतिमा को ससम्मान पुनः स्थापित किया जाए। काशी में शांतिपूर्ण विरोध कर रहे युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए तथा निर्दोष युवाओं पर दर्ज मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं। इसके अलावा भविष्य में अहिल्याबाई होल्कर से जुड़ी किसी भी धरोहर को क्षति न पहुंचे, ज्ञापन में चेतावनी दी गई कि यदि इन मांगों पर संज्ञान नहीं लिया गया तो जनआस्था को गहरी ठेस पहुंचेगी, जिससे जनाक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी सरकार व प्रशासन की होगी। इस मौके पर दर्जनों लोग उपस्थित रहे।










