Indian States Bifurcation : भारत में किन राज्यों का हुआ बंटवारा? जानिए किससे टूटकर बने नए राज्य

Indian States Bifurcation : आजादी के बाद भारत के नक्शे में कितने बदलाव? इन राज्यों से बने नए स्टेट

Indian States Bifurcation : भारत में कई राज्यों का बंटवारा हो चुका है, जिससे नए राज्य बने। आजादी के बाद भारत का नक्शा कई बार बदला है – कभी भाषा के आधार पर, कभी विकास और प्रशासनिक सुविधा के लिए, तो कभी जातीय या क्षेत्रीय मांगों से। शुरू में 565 रियासतें और कुछ प्रांत थे, लेकिन अब 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश हैं। आइए जानते हैं कौन-कौन से राज्य टूटकर बने और कब-कैसे।

1956: भाषाई आधार पर बड़े पुनर्गठन की शुरुआत

1956 का राज्यों पुनर्गठन अधिनियम सबसे बड़ा बदलाव था। इससे राज्यों को मुख्य रूप से भाषा के आधार पर व्यवस्थित किया गया।

  • आंध्र प्रदेश (1953-2014) : मद्रास राज्य (अब तमिलनाडु) से तेलुगु भाषी इलाकों को अलग करके 1953 में आंध्र राज्य बना। 1956 में हैदराबाद राज्य के तेलुगु हिस्से मिलाकर बड़ा आंध्र प्रदेश बना।
  • महाराष्ट्र और गुजरात (1 मई 1960) : बॉम्बे राज्य को भाषाई आधार पर बांटा गया। मराठी भाषी इलाकों से महाराष्ट्र और गुजराती भाषी से गुजरात बना। महागुजरात आंदोलन के बाद यह फैसला हुआ।

1966: पंजाब का बंटवारा

  • हरियाणा (1 नवंबर 1966): पंजाब राज्य से अलग होकर बना। पंजाबी भाषी (सिख बहुल) और हिंदी भाषी (हरियाणवी) इलाकों की मांग पर पंजाब रीऑर्गेनाइजेशन एक्ट से हरियाणा अलग हुआ। इन दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी चंडीगढ़ को बनाया गया। 1970-1987: पूर्वोत्तर में नए राज्य

पूर्वोत्तर में अलगाववादी मांगों और विकास की जरूरत से कई राज्य बने:

  • हिमाचल प्रदेश (25 जनवरी 1971): पंजाब से अलग होकर पूर्ण राज्य बना (पहले केंद्र शासित था)।
  • मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय (1972): असम से अलग होकर राज्य बने। मेघालय असम के गारो और खासी हिल्स से बना।
  • मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश (20 फरवरी 1987): दोनों असम और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों से अलग होकर राज्य बने। मिजोरम पहले केंद्र शासित था। 2000: तीन बड़े राज्यों का बंटवारा

2000 में विकास और क्षेत्रीय असंतुलन की वजह से तीन नए राज्य बने:

  • छत्तीसगढ़ (1 नवंबर 2000): मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से (छत्तीसगढ़ी भाषी और आदिवासी बहुल) से अलग हुआ। मध्य प्रदेश से 16 जिले लेकर नया राज्य बना।
  • उत्तराखंड (9 नवंबर 2000) : उत्तर प्रदेश के पहाड़ी इलाकों (कुमाऊं और गढ़वाल) से अलग होकर बना। पहले उत्तरांचल नाम था, बाद में उत्तराखंड। विकास और अलग पहचान की मांग पर।
  • झारखंड (15 नवंबर 2000) : बिहार के दक्षिणी हिस्से (आदिवासी बहुल, खनिज संपदा वाले) से अलग हुआ। बिहार से 18 जिले लेकर झारखंड बना। 2014: आंध्र प्रदेश का फिर बंटवारा
  • तेलंगाना (2 जून 2014) : आंध्र प्रदेश से अलग होकर 29वां राज्य बना। तेलंगाना आंदोलन लंबे समय से चल रहा था। हैदराबाद को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी 10 साल के लिए रखा गया। अब तेलंगाना अलग है और आंध्र प्रदेश की राजधानी अमरावती। 2019: जम्मू-कश्मीर का विशेष मामला
  • जम्मू-कश्मीर और लद्दाख (31 अक्टूबर 2019) : जम्मू-कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटा गया – जम्मू और कश्मीर (विधानसभा वाला) और लद्दाख (बिना विधानसभा)। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद यह बदलाव हुआ। अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
  • गोवा (1987): पुर्तगाली शासन से मुक्त होकर केंद्र शासित बना, फिर राज्य।
  • सिक्किम (1975): अलग देश से भारत में शामिल होकर राज्य बना।
  • कई छोटे बदलाव जैसे दादरा-नागर हवेली और दमन-दिऊ का 2020 में मर्जर।

क्यों होते हैं ऐसे बंटवारे?

भारत में राज्य बनाने का आधार भाषा, संस्कृति, आर्थिक विकास, प्रशासनिक सुविधा और क्षेत्रीय मांगें रही हैं। संविधान के अनुच्छेद 3 के तहत संसद नए राज्य बना सकती है या पुराने बदल सकती है। इन बदलावों से भारत ज्यादा मजबूत और संतुलित हुआ है, हालांकि कभी-कभी विवाद भी हुए।

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