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देशभर में घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी गई है। रविवार से नए रेट लागू हो गए हैं, जिसके बाद 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर के लिए उपभोक्ताओं को पहले के मुकाबले अधिक कीमत चुकानी होगी। सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है और कई शहरों में इसकी कीमत 942 रुपये तक पहुंच गई है।

कीमत बढ़ने के बाद सरकार की ओर से भी इस फैसले को लेकर सफाई दी गई है। सरकार का कहना है कि घरेलू उपभोक्ताओं को अब भी रियायती दरों पर एलपीजी उपलब्ध कराई जा रही है और प्रत्येक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का घाटा उठाया जा रहा है। सरकार ने यह भी दावा किया है कि भारत में रसोई गैस की कीमत दुनिया के कई देशों की तुलना में कम है।
घरेलू गैस सिलेंडर हुआ महंगा
रविवार से घरेलू एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें लागू कर दी गई हैं। 14.2 किलोग्राम वाले सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। इस बदलाव के बाद उपभोक्ताओं को अब पहले से अधिक राशि खर्च करनी होगी।
एलपीजी की कीमतों में यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब महंगाई को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है। गैस सिलेंडर हर घर की जरूरत है, इसलिए इसके दाम बढ़ने का असर सीधे घरेलू बजट पर पड़ता है।
सरकार ने दी बढ़ोतरी की वजह
गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने के बाद सरकार ने कहा कि एलपीजी की वास्तविक लागत और उपभोक्ताओं से ली जा रही कीमत के बीच बड़ा अंतर है। सरकार का कहना है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए अब भी भारी वित्तीय बोझ उठाया जा रहा है।
सरकारी पक्ष के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की कीमतों और आयात लागत में होने वाले बदलाव का असर घरेलू कीमतों पर भी पड़ता है। इसी वजह से समय-समय पर कीमतों में संशोधन करना पड़ता है।
‘हर सिलेंडर पर 700 रुपये का घाटा’
सरकार का सबसे बड़ा तर्क यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर पर अभी भी भारी सब्सिडी दी जा रही है। सरकार के अनुसार एक सिलेंडर पर करीब 700 रुपये का नुकसान उठाया जा रहा है।
सरकार का कहना है कि यदि पूरी लागत उपभोक्ताओं से वसूली जाए तो गैस सिलेंडर की कीमत मौजूदा दर से काफी अधिक हो सकती है। ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए सरकार लगातार आर्थिक बोझ उठा रही है।
सरकार का दावा, कई देशों की तुलना में भारत में अब भी कम हैं LPG की कीमतें
सरकार ने अपनी सफाई में यह भी कहा है कि भारत में एलपीजी की कीमतें दुनिया के कई देशों की तुलना में कम हैं। सरकार का दावा है कि कई देशों में लोगों को रसोई गैस के लिए भारतीय उपभोक्ताओं से ज्यादा भुगतान करना पड़ता है।
सरकार के अनुसार एलपीजी को आम लोगों की पहुंच में बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि के बावजूद उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डाला जा रहा।
आम लोगों की बढ़ेगी चिंता
घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने से आम लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। खासकर उन परिवारों के लिए इसका असर अधिक महसूस होगा, जो सीमित आय में हर महीने अपने घरेलू खर्चों का संतुलन बनाए रखते हैं।
रसोई गैस की कीमत बढ़ने से घरेलू खर्च में वृद्धि होना तय माना जा रहा है। यही वजह है कि नए रेट लागू होने के बाद लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
उज्ज्वला योजना पर क्या असर?
सरकार ने साफ किया है कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को मिलने वाली सहायता जारी रहेगी। इस योजना के जरिए करोड़ों परिवारों को स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराया गया है।
सरकार का कहना है कि योजना से जुड़े पात्र लाभार्थियों को राहत देने के लिए आवश्यक व्यवस्था जारी रखी जाएगी, ताकि उन पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़ा है मामला
एलपीजी की कीमतें केवल घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करतीं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
जब वैश्विक बाजार में गैस और ऊर्जा उत्पादों की कीमतें बढ़ती हैं, तो उसका असर भारत सहित कई देशों में देखने को मिलता है। सरकार का कहना है कि मौजूदा मूल्य वृद्धि भी इसी व्यापक आर्थिक परिस्थिति से जुड़ी हुई है।
विपक्ष ने उठाए सवाल
गैस सिलेंडर की कीमत बढ़ने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्ष का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ डाला जा रहा है।
वहीं सरकार का कहना है कि कीमतों को लेकर लिए गए फैसले आर्थिक परिस्थितियों और वास्तविक लागत को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। सरकार ने दोहराया है कि उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए वह पहले से ही बड़ा वित्तीय बोझ उठा रही है।
अब सबकी नजर आगे के रेट पर
फिलहाल घरेलू एलपीजी सिलेंडर की नई कीमतें लागू हो चुकी हैं और उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई दर पर सिलेंडर खरीदना होगा। सरकार ने इस बढ़ोतरी के पीछे घाटे और अंतरराष्ट्रीय बाजार की परिस्थितियों को प्रमुख कारण बताया है।
वहीं आम लोगों की नजर अब आने वाले समय पर टिकी हुई है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में बदलाव होता है तो घरेलू गैस सिलेंडर के रेट में भी आगे बदलाव देखने को मिल सकता है।










