NCERT Secularism Row को लेकर देश की राजनीति में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों से ‘सेक्युलर’ और ‘सेक्युलरिज्म’ शब्द हटाने को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देश में धार्मिक कट्टरता का माहौल पैदा किया जा रहा है और शिक्षा व्यवस्था के माध्यम से बच्चों की सोच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि देश से धर्मनिरपेक्षता की अवधारणा को कमजोर किया जाएगा, तो यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।
‘सेक्युलर’ शब्द हटाने पर उठे सवाल

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत पर आधारित है और इसे शिक्षा से अलग करने की किसी भी कोशिश पर गंभीर सवाल उठेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के फैसले देश के वास्तविक मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास हो सकते हैं। वडेट्टीवार ने कहा कि भारत की ऐतिहासिक और सामाजिक संरचना विविधता और सहिष्णुता पर आधारित रही है। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था में बदलाव करते समय व्यापक सामाजिक और संवैधानिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखना आवश्यक है।
राजनीतिक बहस हुई तेज
एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों में बदलाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं। विपक्षी दलों का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में किए जा रहे बदलावों पर व्यापक चर्चा और पारदर्शिता होनी चाहिए। वहीं, इस मुद्दे पर देशभर में विभिन्न सामाजिक और शैक्षणिक संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा से जुड़े विषयों पर किसी भी प्रकार का निर्णय समाज के विभिन्न वर्गों पर दीर्घकालिक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए इस तरह के मुद्दों पर संतुलित और व्यापक विमर्श आवश्यक है।
संविधान और धर्मनिरपेक्षता पर बहस
भारत का संविधान देश को एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप में परिभाषित करता है। ऐसे में ‘सेक्युलर’ शब्द को लेकर उठी बहस ने संविधान, शिक्षा और राजनीति के संबंधों पर नई चर्चा को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति और शिक्षा नीति दोनों में महत्वपूर्ण विषय बना रह सकता है।
शिक्षा विशेषज्ञों की राय
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि पाठ्यपुस्तकों में किसी भी बदलाव का उद्देश्य विद्यार्थियों को संतुलित और तथ्यपरक जानकारी प्रदान करना होना चाहिए। उनका कहना है कि शिक्षा केवल ज्ञान का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों और लोकतांत्रिक सोच को विकसित करने का भी महत्वपूर्ण आधार है।
निष्कर्ष
एनसीईआरटी की पुस्तकों से ‘सेक्युलर’ शब्द हटाने के मुद्दे ने देश में नई राजनीतिक और वैचारिक बहस को जन्म दिया है। एक ओर विपक्ष इस फैसले पर सवाल उठा रहा है, तो दूसरी ओर यह मुद्दा शिक्षा, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के व्यापक विमर्श का विषय बन गया है। आने वाले समय में इस विषय पर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाओं के और तेज होने की संभावना है।










