AIIMS रायबरेली ने सर्जिकल कौशल को बेहतर बनाने के लिए लाइव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कार्यशाला आयोजित की

AIIMS Raebareli: FOGSI और IAGE के सहयोग से आयोजित EAGLE वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने लाइव सर्जरी के जरिए पोस्टग्रेजुएट डॉक्टरों और स्त्री रोग विशेषज्ञों को आधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीकों का दिया प्रशिक्षण।

Jul 26, 2026 - 11:58
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AIIMS रायबरेली ने सर्जिकल कौशल को बेहतर बनाने के लिए लाइव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कार्यशाला आयोजित की

AIIMS Raebareli: एम्स रायबरेली के प्रसूति और स्त्री रोग विभाग ने 'फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया' (FOGSI) और 'इंडियन एसोसिएशन ऑफ गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपिस्ट्स' (IAGE) के सहयोग से एक लाइव लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया। एवरी एस्पायरिंग गायनेकोलॉजिस्ट लर्न एंडोस्कोपी (EAGLE) नाम की इस कार्यशाला का उद्देश्य पोस्टग्रेजुएट छात्रों और प्रैक्टिस करने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञों को कम से कम चीर-फाड़ वाली स्त्री-रोग संबंधी सर्जरी में प्रैक्टिकल अनुभव के साथ-साथ उन्नत ट्रेनिंग देना था। 

उद्घाटन सत्र में आधुनिक सर्जरी की उपयोगिता पर दिया गया जोर

कार्यशाला का उद्घाटन कार्यकारी निदेशक प्रो. (डॉ.) अमिता जैन ने किया। उन्होंने आधुनिक स्त्री रोग चिकित्सा में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के बढ़ते महत्व पर ज़ोर दिया। प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए उन्होंने बताया कि कम चीर-फाड़ वाली सर्जरी, कई रोग समस्याओं के इलाज का स्टैंडर्ड तरीका बन गई है, क्योंकि इसके कई फायदे हैं - जैसे छोटे चीरे, ऑपरेशन के बाद कम दर्द, तेज़ी से रिकवरी और अस्पताल में कम समय तक रहना। उन्होंने रेजिडेंट डॉक्टरों और प्रतिनिधियों को इस मौके का पूरा फायदा उठाने और विशेषज्ञों द्वारा दिखाए गए प्रैक्टिकल टिप्स और सर्जिकल तकनीकों को सीखने के लिए प्रोत्साहित किया। 

लाइव ऑपरेशन के दौरान विशेषज्ञ ने साझा किया अनुभव

लाइव ऑपरेशन सेशन का संचालन लखनऊ (Lucknow) के जाने-माने लैप्रोस्कोपिक (Laparoscopic) सर्जन डॉ. सोनू सिंह (Dr. Sonu Singh) ने किया। उन्हें जटिल स्त्री रोग एंडोस्कोपिक ऑपरेशन (Endoscopic Operation) करने में महारत हासिल है, जिसमें एंडोमेट्रियोसिस, ओवेरियन एंडोमेट्रियोमा और बड़े फाइब्रॉइड वाले गर्भाशय के लिए मायोमेक्टॉमी का लैप्रोस्कोपिक इलाज शामिल है। प्रतिभागियों को रियल टाइम में एडवांस्ड सर्जिकल तकनीकें (Advanced Surgical Techniques) देखने, ऑपरेशन करने वाले सर्जन से बातचीत करने और निर्णय लेने की प्रक्रिया, इंस्ट्रूमेंटेशन (Instrumentation) और ऑपरेशन के दौरान होने वाली जटिलताओं को रोकने और उनसे निपटने के तरीकों पर चर्चा करने का मौका मिला।

युवा डॉक्टरों के कौशल विकास पर विशेष फोकस

इस कार्यशाला का आयोजन प्रसूति और स्त्री रोग विभाग की प्रोफेसर और विभागाध्यक्षा डॉ. पारुल सिन्हा की देख-रेख में किया गया। उन्होंने बताया कि EAGLE कार्यशाला का मकसद गायनेकोलॉजिकल एंडोस्कोपी में व्यवस्थित ट्रेनिंग को बढ़ावा देना और युवा स्त्री रोग विशेषज्ञों के सर्जिकल कौशल को मज़बूत करना है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि इस तरह की अकादमिक पहल किताबी ज्ञान और प्रैक्टिकल अनुभव के बीच की दूरी को कम करती हैं, जिससे आखिरकार मरीज़ों की देखभाल की क्वालिटी बेहतर होती है। 

संस्थान के वरिष्ठ अधिकारियों ने की पहल की सराहना

उद्घाटन समारोह में अपर चिकित्सा अधीक्षक डॉ. नीरज श्रीवास्तव, उप-निदेशक (प्रशासन) कर्नल अखिलेश सिंह और वित्तीय सलाहकार कर्नल यू एन राय भी शामिल हुए। उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के एकेडमिक प्रोग्राम को आयोजित करने के लिए डिपार्टमेंट की कोशिशों की तारीफ़ की और मेडिकल एजुकेशन व एडवांस्ड सर्जिकल ट्रेनिंग में बेहतरीन काम को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया।

प्रतिभागियों ने बताया सीखने का उपयोगी अनुभव

इस कार्यशाला में लगभग 30 पोस्टग्रेजुएट रेजिडेंट्स और प्रैक्टिस करने वाले स्त्री रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इंटरैक्टिव सेशन, लाइव सर्जिकल डेमोंस्ट्रेशन और एक्सपर्ट्स के साथ चर्चाओं को डेलीगेट्स ने बहुत पसंद किया और इस प्रोग्राम को सीखने का एक बेहतरीन और मूल्यवान अनुभव बताया।

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