Azam Khan Meerut Visit : समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और उत्तर प्रदेश की पूर्व योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे आज़म ख़ाँ रविवार देर शाम मेरठ के किठौर क्षेत्र में एक शादी समारोह में शामिल होने पहुँचे। लंबे समय बाद किसी खुशी के मौके पर नजर आए आज़म ख़ाँ ने मीडिया से मुखातिब होते हुए अपना दर्द बयाँ किया। उन्होंने कहा कि वह सालों से ऐसी खुशियों से महरूम हैं और पुलिस की सतर्क निगाहों से बचते-बचाते यहाँ पहुँचे हैं। पुलिस उनके पीछे डुगडुगी और नगाड़े बजाती फिरती है। जेल के काले दिनों को याद करते हुए आज़म ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए, साथ ही बिहार चुनाव में प्रचार न करने, सुरक्षा लौटाने और सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से मुलाकात जैसे मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय जाहिर की। आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि सुरक्षा का खर्चा उठाना उनके बस की बात नहीं।
शादी समारोह में शामिल होने आए, लेकिन दर्द छलका

आज़म ख़ाँ ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मैं खुशियों में शरीक होने आया हूँ, क्योंकि सालों से मैं ऐसी खुशियों से महरूम हूँ। पुलिस से बचते-बचाते, छिपते-भागते यहाँ पहुँचा हूँ। पुलिस तो मेरे पीछे डुगडुगी और नगाड़े बजाती फिरती है।” उनकी यह बातें जेल से रिहाई के बाद की उनकी जद्दोजहद को उजागर करती हैं। लंबी कानूनी लड़ाई और मुकदमों के बोझ तले दबे आज़म की आँखों में दर्द साफ झलक रहा था।
जेल के दिनों की याद, सुप्रीम कोर्ट की फटकार और नई धाराएँ
जेल के अनुभवों को याद करते हुए आज़म ख़ाँ ने खुलासा किया कि पिछली बार जब उनकी जमानत हो रही थी, ठीक उसी वक्त पुलिस ने उनपर नया मुकदमा ठोंक दिया ताकि वह जेल से बाहर न आ सकें। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई और इसे अदालत की अवमानना बताया। सुप्रीम कोर्ट ने विशेष कानून के तहत उन्हें तत्काल जमानत दी थी।
इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ। आज़म ने कहा, “मेरे मुकदमे में तीन नई धाराएँ जोड़ दी गईं ताकि मैं जेल से बाहर न आ सकूँ। लेकिन सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद मैं फिलहाल जेल से बाहर हूँ।” उन्होंने यह भी इंगित किया कि ये मुकदमे राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हैं।
बिहार चुनाव में प्रचार न करने का कारण: ‘जंगलराज’ और सुरक्षा का डर
बिहार विधानसभा चुनाव में सपा के प्रचार से दूरी बनाने के सवाल पर आज़म ख़ाँ ने स्पष्ट कहा कि वहाँ ‘जंगलराज’ है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों का हवाला देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक कह चुके हैं कि बिहार में जंगलराज है। ऐसे हालात में मेरा वहाँ जाना उचित नहीं था। मेरे साथ कोई हादसा हो सकता था।” आज़म ने यह भी जताया कि सुरक्षा की कमी और राजनीतिक माहौल उन्हें बिहार जाने से रोकता है।
सुरक्षा लौटाने पर बोले: लिखित जानकारी नहीं, कैसे भरोसा करें?
सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा लौटाने के मुद्दे पर आज़म ने गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “मुझे गृह मंत्रालय या किसी सरकारी नुमाइंदे से सुरक्षा के बारे में कोई लिखित जानकारी नहीं दी गई। फिर मैं कैसे मान लूँ कि वर्दी पहने और हथियारों से लैस लोग मेरी सुरक्षा के लिए हैं? क्यों न मान लूँ कि ये लोग मुझे मारने के लिए हैं?”
आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए आज़म ने बताया, “मेरी आर्थिक हालत इतनी खराब है कि मैं अपने मकान और प्लॉट बेचने के लिए इश्तेहार निकाल चुका हूँ, लेकिन कोई खरीददार नहीं मिल रहा। ऐसे में अगर सुरक्षा लेता हूँ तो उसका खर्चा कैसे सहन करूँगा?”
अखिलेश यादव से मुलाकात पर चुप्पी, लेकिन सपा के प्रति वफादारी
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव से हालिया मुलाकात पर पूछे जाने पर आज़म ने ज्यादा कुछ नहीं कहा, लेकिन उनकी नाराजगी पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से जुड़ी बताई जाती है। उन्होंने सपा की नीतियों और अपनी वफादारी पर जोर दिया, लेकिन व्यक्तिगत मुद्दों पर खामोशी रखी।
आज़म ख़ाँ का बयान
“सालों से खुशियों से महरूम हूँ… पुलिस से छिपता-भागता आया… आर्थिक स्थिति खराब, सुरक्षा का खर्चा नहीं सह सकता… बिहार में जंगलराज, वहाँ जाना ठीक नहीं… सरकार मुकदमे बढ़ाती है ताकि जेल से बाहर न आऊँ।”
आज़म ख़ाँ की यह उपस्थिति और बयान राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बने हुए हैं। जेल से रिहाई के बाद उनकी सक्रियता सपा के लिए नई ऊर्जा दे सकती है, लेकिन कानूनी पेंच और आर्थिक संकट उनकी राह में रोड़े बने हुए हैं।










