Jharkhand BJP New State President: झारखंड में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की राज्य इकाई में जल्द ही नया अध्यक्ष मिलने वाला है। पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है और सूत्रों की मानें तो पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास का नाम सबसे आगे चल रहा है। यह बदलाव ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी झारखंड में अपनी स्थिति को और मजबूत करना चाहती है। हाल के विधानसभा चुनावों में मिली सीटों के बावजूद पार्टी को लगता है कि संगठन में नई ऊर्जा और नई रणनीति की जरूरत है।
बीजेपी के मौजूदा राज्य अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी हैं, जो आदिवासी समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं। उन्होंने पार्टी को ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में काफी मजबूत किया है। लेकिन केंद्रीय स्तर पर फैसला लिया गया है कि अब नए चेहरे को मौका दिया जाए। पार्टी के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि रघुबर दास को नया राज्य अध्यक्ष बनाने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। दास पहले भी झारखंड के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और उनकी संगठनात्मक समझ काफी गहरी मानी जाती है।

रघुबर दास का राजनीतिक सफर और वापसी
रघुबर दास झारखंड के पहले गैर-आदिवासी मुख्यमंत्री बने थे। 2014 में जब बीजेपी ने राज्य में सरकार बनाई, तब वे मुख्यमंत्री बने और काफी विकास कार्यों के लिए चर्चित रहे। लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में पार्टी हार गई और दास को ओडिशा का राज्यपाल बना दिया गया। राज्यपाल पद से इस्तीफा देने के बाद वे सक्रिय राजनीति में वापस लौटे हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं में उनकी वापसी को लेकर काफी उत्साह है क्योंकि दास को मेहनती और कैडर-बेस्ड नेता माना जाता है।
पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि रघुबर दास की लीडरशिप में बीजेपी झारखंड में फिर से मजबूत वापसी कर सकती है। वे ओबीसी समुदाय से आते हैं, जो राज्य में बड़ा वोट बैंक है। साथ ही उनकी मुख्यमंत्री के अनुभव की वजह से वे प्रशासनिक और विकास के मुद्दों पर अच्छी पकड़ रखते हैं। पार्टी को लगता है कि दास के नेतृत्व में विपक्ष की भूमिका और मजबूत होगी और हेमंत सोरेन सरकार पर हमला तेज होगा।
बाबूलाल मरांडी की भूमिका क्या होगी?
अगर रघुबर दास नए अध्यक्ष बनते हैं तो बाबूलाल मरांडी की क्या भूमिका होगी, यह सवाल भी उठ रहा है। मरांडी आदिवासी चेहरा हैं और झारखंड में आदिवासी वोटरों पर उनकी अच्छी पकड़ है। पार्टी नहीं चाहती कि आदिवासी समुदाय से दूरी बने। इसलिए संभावना है कि मरांडी को विधानसभा में विपक्ष के नेता की जिम्मेदारी दी जाए या कोई और महत्वपूर्ण पद सौंपा जाए। इससे पार्टी में आदिवासी और गैर-आदिवासी नेतृत्व का संतुलन बना रहेगा।
पिछले कुछ महीनों में बीजेपी ने झारखंड में कई छोटे-बड़े बदलाव किए हैं। कई जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। रांची, धनबाद, बोकारो जैसे बड़े जिलों में नए चेहरे लाए गए हैं ताकि ग्रासरूट स्तर पर काम तेज हो। इन बदलावों को देखकर साफ है कि पार्टी 2029 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटी हुई है। नए अध्यक्ष की नियुक्ति इसी योजना का हिस्सा है।
चुनाव प्रक्रिया और केंद्रीय नेतृत्व की भूमिका
बीजेपी के राष्ट्रीय मुख्यालय ने इस चुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री जुअल ओराम को निर्वाचन अधिकारी बनाया है। ओराम खुद झारखंड से हैं और आदिवासी समुदाय से आते हैं। उनकी नियुक्ति से पार्टी में विश्वास बढ़ा है कि प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। राज्यसभा सांसद आदित्य प्रसाद साहू को पहले ही कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जा चुका है, जो इस बदलाव का संकेत था।
पार्टी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और अन्य बड़े नेता इस फैसले में सीधे शामिल हैं। वे चाहते हैं कि झारखंड में बीजेपी नई पीढ़ी के साथ पुराने अनुभवी नेताओं का मिश्रण बनाए। रघुबर दास को अध्यक्ष बनाना इसी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी को उम्मीद है कि दास के आने से कार्यकर्ताओं में नई जोश आएगा और संगठन और मजबूत होगा।
झारखंड की राजनीति में क्या असर पड़ेगा?
झारखंड में अभी जेएमएम की सरकार है और हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री हैं। बीजेपी लगातार सरकार पर भ्रष्टाचार, आदिवासी अधिकारों और विकास के मुद्दों पर हमला कर रही है। अगर रघुबर दास नए अध्यक्ष बनते हैं तो यह हमला और तेज हो सकता है। दास का अनुभव उन्हें सरकार की कमजोरियों को अच्छे से उजागर करने में मदद करेगा। साथ ही वे ओबीसी और शहरी वोटरों को भी बेहतर तरीके से जोड़ सकते हैं।
हालांकि, पार्टी के अंदर कुछ नेता इस बदलाव से खुश नहीं हैं। मरांडी के समर्थक मानते हैं कि आदिवासी चेहरा हटाने से पार्टी को नुकसान हो सकता है। लेकिन केंद्रीय नेतृत्व का मानना है कि संतुलन बनाकर ही पार्टी आगे बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह बदलाव झारखंड की राजनीति में बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।










