Chhath Puja 2025 : सूर्य देव जी की पूजा, प्रकृति, संरक्षण और ऋतु परिवर्तन से जुड़ा है। जिसमें सूर्य देव की उपासना और छठी माता की पूजा शामिल है छठपूजा चार दिवसीय महापर्व है।
चार दिन तक चलने वाले इस महापर्व की शुरुआत नहाय-खाय से होती है, जिसके साथ ही व्रतियों द्वारा शुद्धता और सात्विकता का पालन शुरू हो जाता है। दूसरे दिन खरना के मौके पर व्रती पूरे दिन निर्जला उपवास रखकर शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद ग्रहण करते हैं। तीसरे दिन यानी संध्या अर्घ्य के अवसर पर श्रद्धालु डूबते सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते हैं। नदियों, तालाबों और घाटों पर गूंजते छठी मईया के गीतों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठता है।


चौथे दिन उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह पर्व संपन्न होता है। व्रती परिवार की सुख-समृद्धि और समाज के कल्याण की कामना करते हैं। भारत के साथ-साथ विदेश के कई हिस्सों में भी छठ पर्व मनाए जाते हैं वहीं स्वांग कोलियरी महावीर स्थान के युवाओं ने भी घाटो पर कड़े इंतजाम किए गोमिया के बोकारो नदी, बोकारो थर्मल स्थित कोनार नदी के लोहा पुल स्थित छठ घाट पर श्रद्धालुओं अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देने पहुंचीं।










