Holi Milan Samaroh : केंदुआ के करकेंद बाजार स्थित डैफोडिल्स एकेडमी एवं डैफोडिल्स बचपन परिसर में इस वर्ष होली मिलन समारोह कुछ खास अंदाज में मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्राचार्य श्री तपस बनर्जी ने संस्थापक स्वर्गीय श्री चण्डी चरण बनर्जी (चण्डी सर) के चित्र पर पुष्प अर्पित कर की। वातावरण में सम्मान और श्रद्धा का भाव साफ झलक रहा था। रंगों के इस उत्सव को संस्कारों से जोड़ते हुए आयोजन का शुभारंभ हुआ।
अभिभावकों की मौजूदगी ने बढ़ाई रौनक

समारोह में विद्यार्थियों के साथ उनके अभिभावक भी बड़ी संख्या में शामिल हुए। विद्यालय प्रांगण में प्रवेश करते ही सभी का गुलाल लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। शिक्षक-शिक्षिकाओं ने पारंपरिक अंदाज में अतिथियों का अभिनंदन किया। बच्चों के चेहरे पर उत्साह और अभिभावकों की आंखों में गर्व साफ दिखाई दे रहा था। पूरे परिसर में अपनापन और उल्लास का वातावरण बना रहा।
गीत-संगीत पर थिरके नन्हें कदम
होली गीतों की मधुर धुन जैसे ही गूंजनी शुरू हुई, बच्चों के कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगे। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे विद्यार्थियों ने समूह नृत्य प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया। समारोह में बच्चों की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रही। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण इस प्रकार रहे:
- पारंपरिक होली गीतों पर समूह नृत्य
- रंगोली और सजावट से सजा विद्यालय परिसर
- शिक्षक-शिक्षिकाओं द्वारा सांस्कृतिक सहभागिता
- सामूहिक रंगोत्सव
बच्चों की मस्ती और खिलखिलाहट से पूरा परिसर गूंज उठा।
अपने संबोधन में प्राचार्य श्री तपस बनर्जी ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का प्रतीक है। उन्होंने सभी को रासायनिक रंगों से बचते हुए प्राकृतिक और पर्यावरण के अनुकूल होली मनाने की प्रेरणा दी। उनका संदेश स्पष्ट था—उत्सव की खुशी के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना की।
समारोह को सफल बनाने में शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सुव्यवस्थित और यादगार बनाया। विद्यालय प्रांगण में अंत तक उत्सव का माहौल कायम रहा और हर कोई रंगों की मिठास अपने साथ लेकर लौटा।
यह होली मिलन समारोह केवल एक सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि विद्यालय परिवार की एकता, परंपरा और सामाजिक संदेश का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आया।










