Desecration Of Dead Body In Prayagraj : प्रयागराज मण्डल के सबसे बड़े अत्याधुनिक स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में मानवीय संवेदना को झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। सोमवार को वायरल हुए एक वीडियो में मोर्चरी हाउस के अंदर शव पहुंचाने वाले कर्मी ने एक महिला की लाश को करीब 10 मीटर तक जमीन पर घसीटकर बेअदबी की। इस दौरान सराय इनायत थाने का पुलिसकर्मी पास खड़ा होकर महज तमाशबीन बना रहा। वीडियो सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों ने वीडियो की जांच कर कार्रवाई का आश्वासन दिया है, लेकिन घटना ने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
घटना की शुरुआत सराय इनायत थाना क्षेत्र के बनारस-प्रयागराज रेलवे ट्रैक से हुई, जहां सोमवार दोपहर करीब एक बजे पुलिस को 40 वर्षीय महिला शन्नो पत्नी जहाजी की लाश मिली। लाश के पास मिले दस्तावेजों से पुलिस ने उसकी पहचान की। पुलिस के अनुसार, शव के बारे में परिवार को सूचित किया गया, लेकिन परिवार के सदस्य समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंच सके। इसके बाद थाना पुलिस ने स्थानीय लोगों की मौजूदगी में लाश का पंचायतनामा भरवाया और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल के मोर्चरी हाउस भेज दिया।

मोर्चरी हाउस तक शव को एक पुलिसकर्मी ऑटो रिक्शा से लेकर पहुंचा। ऑटो चालक ने यहां गाड़ी खड़ी कर चला गया। शव को मोर्चरी हाउस के अंदर ले जाने के लिए पुलिसकर्मी ने एक व्यक्ति को महज 50 रुपये देकर यह काम सौंपा। पुलिसकर्मी ने खुद शव को हाथ लगाने से परहेज किया। इसके बाद मोर्चरी हाउस के आसपास घूम रहे उस व्यक्ति ने अकेले ही शव को ऑटो से नीचे उतारा और उसे जमीन पर रखकर बड़ी बेअदबी से घसीटते हुए अंदर ले गया। वीडियो फुटेज में साफ दिख रहा है कि शव को करीब 10 मीटर तक जमीन पर घसीटा गया, जबकि शव के साथ आया पुलिसकर्मी कुछ दूरी पर खड़ा होकर यह सब देखता रहा और कोई हस्तक्षेप नहीं किया।
यह पूरा वाकया सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गया, जिसका वीडियो सोमवार को ही सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो के वायरल होने के बाद दैनिक भास्कर ने स्वरूपरानी अस्पताल के जिम्मेदार डॉक्टर से इस बारे में सवाल किए। मोर्चरी प्रभारी डॉक्टर ने वीडियो के बारे में किसी भी तरह की जानकारी होने से साफ इंकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि वीडियो सत्य है या फिर मृतका का परिवार कोई शिकायत दर्ज कराता है, तो जांच कराई जाएगी और उच्च स्वास्थ्य अधिकारियों को रिपोर्ट भेजकर कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
यह घटना न केवल अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि पुलिस की संवेदनहीनता को भी दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि शवों के साथ सम्मानजनक व्यवहार करना कानूनी और नैतिक दोनों दृष्टि से जरूरी है, लेकिन ऐसी घटनाएं स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था की खामियों को उजागर करती हैं। फिलहाल, मामले की जांच शुरू होने की उम्मीद है, लेकिन पीड़ित परिवार की ओर से अभी कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं हुई है।










