Baha Parv 2026 : बाहा पर्व में दिखा हेमंत सोरेन का अलग अंदाज, नेमरा में ढोल बजाया और मादर की थाप पर जमकर थिरके मुख्यमंत्री

Baha Parv : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रामगढ़ के नेमरा में बाहा पर्व के दौरान ढोल बजाया और मादर की थाप पर थिरकते नजर आए। पारंपरिक आदिवासी रीति-रिवाजों के साथ हुआ उनका स्वागत।

Baha Parv : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन गुरुवार को रामगढ़ जिले के अपने पैतृक गांव नेमरा पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे उत्साह और पारंपरिक अंदाज में बाहा पर्व मनाया। इस मौके पर मुख्यमंत्री का अलग ही रूप देखने को मिला। आम तौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों में गंभीर दिखने वाले हेमंत सोरेन इस बार उत्सव के रंग में रंगे नजर आए। गांव के लोगों के बीच उन्होंने न सिर्फ पर्व में हिस्सा लिया बल्कि आदिवासी परंपराओं के साथ पूरे उल्लास के साथ शामिल हुए।

कुल देवता के सामने माथा टेक लिया आशीर्वाद

नेमरा पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सबसे पहले अपने कुल देवता के सामने माथा टेककर आशीर्वाद लिया। इस दौरान उनके साथ उनकी पत्नी कल्पना सोरेन और मां रूपी सोरेन भी मौजूद थीं। परिवार के साथ पूजा-अर्चना करने के बाद उन्होंने गांव के बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। धार्मिक और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई, जिससे पूरे माहौल में आस्था और उत्साह का संगम देखने को मिला।

आदिवासी परंपरा के साथ हुआ मुख्यमंत्री का स्वागत

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गांव के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री का स्वागत आदिवासी परंपरा के अनुसार किया। पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य के साथ उन्हें उनके पैतृक आवास से जाहेर स्थान तक ले जाया गया। ढोल, नगाड़े और मादर की आवाज से पूरा इलाका गूंज उठा। ग्रामीणों और युवाओं की टोली नाचते-गाते हुए मुख्यमंत्री के साथ चल रही थी, जिससे माहौल पूरी तरह उत्सवमय हो गया।

ढोल बजाते और नृत्य करते नजर आए मुख्यमंत्री

बाहा पर्व के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अलग ही अंदाज देखने को मिला। उन्होंने खुद ढोल उठाकर बजाया और मादर की थाप पर ग्रामीणों के साथ नृत्य भी किया। उनका यह अंदाज वहां मौजूद लोगों के लिए खास आकर्षण का केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री को इस तरह परंपरागत नृत्य में शामिल होते देख ग्रामीणों का उत्साह और भी बढ़ गया।

बाहा पर्व का सांस्कृतिक महत्व

आदिवासी समाज में बाहा पर्व का विशेष महत्व माना जाता है। यह प्रकृति, जंगल और जीवन के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है। इस दिन लोग अपने देवी-देवताओं की पूजा करते हैं और गांव में पारंपरिक नृत्य-गीत के साथ खुशियां मनाते हैं।

बाहा पर्व की खास बातें:

  • यह आदिवासी समाज का प्रमुख पारंपरिक त्योहार है
  • प्रकृति और देवताओं के प्रति कृतज्ञता प्रकट की जाती है
  • गांवों में सामूहिक पूजा और नृत्य-गीत का आयोजन होता है
  • समाज की एकता और संस्कृति को मजबूत करता है

ग्रामीणों के बीच सहज दिखे मुख्यमंत्री

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पूरी तरह ग्रामीणों के बीच घुलते-मिलते नजर आए। उन्होंने लोगों से बातचीत की और पर्व की खुशियां साझा कीं। स्थानीय लोगों के लिए यह पल खास था, क्योंकि उन्होंने अपने मुख्यमंत्री को बिल्कुल अपने बीच, अपने ही अंदाज में देखा।

नेमरा में बाहा पर्व का यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करने वाला रहा, बल्कि मुख्यमंत्री के इस अलग अंदाज ने पूरे कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।

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