Telecom Plan : देश में मोबाइल रिचार्ज की बढ़ती कीमतों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। राघव चड्ढा ने राज्यसभा में सवाल उठाया कि जब बड़ी संख्या में लोग अब भी कीपैड (फीचर) फोन इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उन्हें जबरन इंटरनेट डेटा वाले महंगे प्लान क्यों लेने पड़ते हैं? उन्होंने मांग की कि बिना इंटरनेट वाला सस्ता “वॉयस-ओनली” प्लान अलग से उपलब्ध कराया जाए।
क्या है मुख्य मांग?

- कीपैड मोबाइल उपयोगकर्ता सिर्फ कॉल और SMS के लिए रिचार्ज करना चाहते हैं।
- डेटा का उपयोग न करने वालों पर जबरन डेटा प्लान का बोझ क्यों?
- 28 दिन की वैधता को फिर से 30–31 दिन किया जाए, क्योंकि साल में 12 महीने होते हैं।
- इनकमिंग कॉल पूरी तरह फ्री हो।
आम उपभोक्ताओं की परेशानी
- ग्रामीण, मजदूर, बुजुर्ग और निम्न आय वर्ग के करोड़ों लोग आज भी फीचर फोन का उपयोग करते हैं।
- सिर्फ कॉलिंग की जरूरत होने के बावजूद 150–250 रुपये या उससे अधिक का रिचार्ज कराना पड़ता है।
- डेटा का उपयोग नहीं होने पर भी उसका भुगतान करना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने लिखा—
“बुजुर्ग माता-पिता के लिए सस्ता बिना-डेटा प्लान होना चाहिए।”
“हर किसी को इंटरनेट की जरूरत नहीं।”
अगर वॉयस-ओनली प्लान आए तो संभावित फायदे
- करोड़ों उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत
- डिजिटल विभाजन (Digital Divide) कम करने में मदद
- जरूरत के हिसाब से सेवा चुनने का अधिकार
- निम्न आय वर्ग और वरिष्ठ नागरिकों को सीधा लाभ
टेलीकॉम कंपनियों का संभावित पक्ष
टेलीकॉम कंपनियां डेटा आधारित प्लान को प्राथमिकता देती हैं क्योंकि:
- डेटा सेवाएं उनकी आय का बड़ा स्रोत हैं।
- बंडल प्लान से बिलिंग और मार्केटिंग आसान होती है।
- डिजिटल उपयोग बढ़ाने पर सरकारी नीतियों का जोर है।
हालांकि उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि विकल्प देना कंपनियों की जिम्मेदारी है।
सवाल जनता से
क्या टेलीकॉम कंपनियों को बिना इंटरनेट वाला सस्ता कॉलिंग प्लान और पूरी तरह फ्री इनकमिंग की सुविधा देनी चाहिए?
क्या 28 दिन की जगह 30–31 दिन की वैधता बहाल होनी चाहिए?
यह मुद्दा सीधे आम आदमी की जेब से जुड़ा है। अब देखना होगा कि सरकार और टेलीकॉम कंपनियां इस मांग पर क्या निर्णय लेती हैं।
अगर आप सहमत हैं तो अपनी राय जरूर साझा करें।










