Raebareli : होली के त्योहार पर जहां एक ओर जिले में रंग और गुलाल की धूम रही, वहीं दूसरी ओर शराब की बिक्री ने भी इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक इस बार होली के मौके पर देसी, अंग्रेजी और बीयर मिलाकर करीब 13 करोड़ 34 लाख रुपये की शराब बिक गई। यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग 9 करोड़ रुपये ज्यादा बताया जा रहा है।
इतनी बड़ी बिक्री को लेकर आबकारी विभाग जश्न के मूड में दिखाई दे रहा है, लेकिन इसी के साथ विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल भी खड़े हो रहे हैं। जिले में कई शराब के ठेके ऐसे हैं जो नियमों और मानकों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं, फिर भी विभाग की नजर इन पर नहीं पड़ रही है या फिर जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है।

लाइसेंस एक गांव का, ठेका दूसरे गांव में
जिले में कई जगहों पर शराब की दुकानें जिस गांव के लिए लाइसेंस जारी हुआ है, वहां न चलकर दूसरे गांव में संचालित हो रही हैं। यह पूरी तरह नियमों के खिलाफ है, लेकिन इसके बावजूद खुलेआम शराब की बिक्री जारी है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई दुकानदारों ने सुविधा और अधिक कमाई के लिए ठेकों को आबादी वाले या मुख्य मार्गों पर शिफ्ट कर दिया, जिससे बिक्री तो बढ़ गई लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ गईं।
कटिंग की शराब का भी खेल
सिर्फ इतना ही नहीं, कई शराब दुकानों पर कटिंग की शराब भी बेची जा रही है। यानी बोतल खोलकर गिलास या छोटे पैमाने में शराब बेचने का धंधा भी धड़ल्ले से चल रहा है, जबकि सरकारी नियमों में इसकी अनुमति नहीं है।
इस तरह की बिक्री से राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ अव्यवस्था भी बढ़ रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई करते नजर नहीं आ रहे।
आखिर किसके संरक्षण में चल रहा यह खेल?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आबकारी अधिकारी दिनेश कुमार और उनकी टीम आखिर किस दबाव में है कि जिले में नियमों के विपरीत चल रही शराब दुकानों पर कार्रवाई नहीं हो रही।
जबकि विभाग का काम नियमों का पालन करवाना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना है, लेकिन मौजूदा हालात यह बताते हैं कि कई जगहों पर ठेकेदार खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
जश्न बिक्री का या अनियमितताओं का?
होली के मौके पर करोड़ों की शराब बिक्री का आंकड़ा जरूर विभाग के लिए उपलब्धि जैसा दिखाया जा रहा है, लेकिन अगर अवैध स्थानों पर ठेके चलेंगे और कटिंग की शराब बिकेगी, तो यह जश्न सवालों के घेरे में ही रहेगा।
अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और आबकारी विभाग इन शिकायतों को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करता है या फिर करोड़ों की बिक्री के आंकड़ों के पीछे छिपी अनियमितताओं को यूं ही नजरअंदाज किया जाता रहेगा।










