Raebareli : वन स्टॉप सेंटर प्रभारी गायब, केस वर्कर के कंधों पर पीड़िताओं का बोझ

Raebareli : लगातार 3 दिन से वन स्टाफ सेंटर पर नहीं आई प्रभारी आस्था ज्योति सोनकर

Raebareli : उत्तर प्रदेश के रायबरेली में संचालित वन स्टॉप सेंटर (OSC) इन दिनों गंभीर अव्यवस्था का शिकार बताया जा रहा है। महिलाओं को आपात स्थिति में सुरक्षित आश्रय देने के लिए बनाए गए इस केंद्र में प्रभारी अधिकारी की लगातार गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रभारी आस्था ज्योति सोनकर पिछले तीन दिनों से बिना किसी स्पष्ट सूचना के केंद्र पर उपस्थित नहीं हुई हैं।

केस वर्कर पर पीड़िताओं की जिम्मेदारी

सेंटर में इस समय आठ महिलाएं आश्रय लिए हुए हैं, जिनमें घरेलू हिंसा और अन्य गंभीर मामलों की पीड़िताएं शामिल हैं। प्रभारी की अनुपस्थिति में केवल एक केस वर्कर पर सभी की देखभाल का जिम्मा आ गया है।
इस स्थिति में प्रभावित हो रही प्रमुख व्यवस्थाएं—

  • नियमित काउंसलिंग सत्र
  • समय पर भोजन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति
  • सुरक्षा निगरानी
  • मेडिकल सहायता का समन्वय

केंद्र में 24 घंटे की निगरानी और प्रबंधन की व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन वर्तमान हालात में यह व्यवस्था कमजोर पड़ती नजर आ रही है।

उपस्थिति और निगरानी प्रणाली पर भी उठे सवाल

बताया जा रहा है कि केंद्र में लगे सीसीटीवी कैमरों का बैकअप सीमित अवधि का है, जिससे निगरानी व्यवस्था पर भी प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। चर्चा है कि प्रभारी की अनुपस्थिति के बावजूद उपस्थिति दर्ज किए जाने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। हालांकि इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कर्मचारियों के बीच असंतोष साफ दिखाई दे रहा है।

पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही

वन स्टॉप सेंटर जैसी संवेदनशील इकाई में पहले भी एक पीड़िता के अचानक लापता होने की घटना सामने आ चुकी है। उस समय भी प्रबंधन की कार्यशैली पर सवाल उठे थे। अब दोबारा अव्यवस्था की खबरों ने चिंताओं को और गहरा कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

प्रशासनिक जवाबदेही की जरूरत

जिला प्रोबेशन अधिकारी की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। महिला कल्याण से जुड़ी इस महत्वपूर्ण योजना का उद्देश्य संकट में फंसी महिलाओं को एक छत के नीचे कानूनी, मनोवैज्ञानिक और चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराना है।

ऐसे में यह अपेक्षा की जा रही है कि जिला प्रशासन तत्काल स्थिति का संज्ञान लेकर—

  • प्रभारी की अनुपस्थिति की जांच कराए
  • सेंटर में स्टाफ की पर्याप्त तैनाती सुनिश्चित करे
  • सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था को मजबूत बनाए

पीड़िताओं की उम्मीदों पर टिका है भरोसा

वन स्टॉप सेंटर महिलाओं के लिए अंतिम सहारा माना जाता है। यहां की लापरवाही सीधे तौर पर उनकी सुरक्षा और मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। जरूरत इस बात की है कि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाते हुए व्यवस्था को दुरुस्त करे, ताकि संकट में आई महिलाएं खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें।

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