Ranchi : रांची के तुपुदाना (हटिया) में कलश यात्रा के साथ रविवार से सात दिवसीय श्री 1008 मद् भागवत कथा ज्ञान 108 कुंडीय विश्व शांति महायज्ञ का शुभारंभ हो गया। इससे पहले भव्य कलश यात्रा निकाली गई। जहां सभी महिलाएं पीला वस्त्र धारण कर कलश यात्रा में शामिल हुईं। ज़ब महिलाएं सड़कों पर निकली तो पूरे इलाके में भक्तिमय वातावरण का माहौल बन गया। यह उत्साह और भी दोगुना हो उठा जब वाराणसी सनातन सेवा आश्रम से आई कथावाचक पूज्य आरती पाठक जी रथ पर सवार होकर नगर भ्रमण को निकली। इस नगर भ्रमण में उनके साथ यज्ञ आचार्य शशि उपाध्याय, आयोजन समिति के सारे सदस्यगण सहित सभी पुरोहितगण व जनता उनके साथ चल रही थी। नगर भ्रमण के दौरान एक ही नारा एक ही नाम जय श्री राम जय श्री राम। यह नारा लगातार बुलंद होता रहा। लगभग चार किलोमीटर तक यह कलश पद यात्रा श्री श्री 1008 बाबा चंद्रशेखर शिव मंदिर पहुंचा। जहां आचार्य शशि उपाध्याय सहित अन्य पुरोहितों द्वारा मन्त्रोच्चार का पाठ कर विधिवत पूजन किया गया। मंदिर प्रांगण में स्थित तालाब पर सभी लोग वहाँ जुटे जहां से जल भरकर पुनः कार्यक्रम स्थल की ओर प्रस्थान किया।

वहीं संध्या 4 बजे से भागवत कथा के शुरू होने से पहले कथावाचक आरती पाठक, स्वामी दिव्यानंद जी महाराज व उनके साथ पधारे विद्वान पंडितों का भव्य स्वागत किया गया। जहां दिव्यानंद जी महाराज ने अपने ज्ञान रूपी संदेश को लोगों तक पहुंचाया। तत्पश्चात भागवत कथा महापुराण की विधिवत शुरुआत कथावाचक आरती पाठक जी द्वारा किया गया। जहां पूज्य आरती पाठक ने भक्तों को भागवत कथा का अमृतपान कराया। जहां कथा को सुनने हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ कार्यक्रम स्थल पर जुटी।महिलाओं, पुरुषों व युवाओं ने पूरे तन्मयता और एकाग्रचीत होकर भागवत कथा का श्रवण किया।

कथावाचक आरती पाठक जी ने सर्वप्रथम भागवत के अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि मनुष्य की इच्छाएं अनंत है। भगवान ने हम सब को मनुष्य का तन दिया है, प्रयास करें कि जितना हो सके इस तन को सत्कर्म में लगाएं। अपने मन को भगवान में लगाइये जितना हो सके भगवान का नाम लें। उन्होंने कहा कि यदि जीवन में कमाना है तो यहां ही कमा कर जाओ। पारसमणि व कल्पवृक्ष में भी वो सामर्थ्य नहीं है कि वह भगवान से हमें मिला दें। बस गुरु श्रेष्ठ ही एक बड़ा माध्यम है। आरती जी ने कहा कि संसार काल के गाल में समा रहा है। इस संसार में कुछ भी निश्चित नहीं है। इस कली काल में भगवान के कथा श्रवण से ही सबका उद्धार होगा। वहीं कथावाचक आरती पाठक के साथ पहुंची भजन मंडली ने भक्ति गीतों का रस घोला और भक्तों को खूब झूमाया।
आचार्य शशि उपाध्याय के कुशल नेतृत्व में श्री 1008 मद भागवत कथा ज्ञान 108 कुंडिय विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन के प्रथम दिन से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो चुका है। कार्यक्रम को लेकर लोगों में रूचि बढ़ती जा रही है। सात दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में प्रतिदिन अपराह्न 3 से शाम 6 बजे तक भागवत महात्मय मंगलाचरण होगा। कथा की समाप्ति के बाद प्रसाद के रूप में खिचड़ी और खीर का वितरण किया जायेगा। वहीं इस दौरान हवन-पूजन के कार्यक्रम आयोजित होंगे।

इस भव्य कार्यक्रम के आयोजन में यज्ञ आचार्य शशि उपाध्याय सहित आयोजन समिति के संजय सिंह अंकित सिंह, बब्लु शुक्ला, जितेंद्र सिंह, संतोष सिंह,राजन प्रसाद, राजूलाल शाहदेव, बिजय कुमार, अनिल महतो, मोहित लाल, सतीश पांडा सहित अन्य सदस्यों का अहम योगदान है।










