Rani Avantibai Lodhi : सरेनी क्षेत्र के रामखेड़ा गांव में वीरांगना रानी अवंतीबाई लोधी (Rani Avantibai Lodhi) का 169वां बलिदान दिवस बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। कार्यक्रम स्थल पर सुबह से ही लोगों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। गांव और आसपास के क्षेत्रों से आए लोगों ने वीरता की प्रतीक इस महान नायिका को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
महापुरुषों के चित्र पर माल्यार्पण से हुई शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथियों द्वारा भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर सहित रानी अवंतीबाई के चित्रों पर माल्यार्पण कर की गई। इस दौरान उपस्थित लोगों ने एक स्वर में उन्हें नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। पूरा माहौल देशभक्ति और सम्मान की भावना से ओत-प्रोत नजर आया।

वक्ताओं ने सुनाई वीरता की प्रेरक गाथा
कार्यक्रम में वक्ताओं ने रानी अवंतीबाई के जीवन और संघर्षों को विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि 16 अगस्त 1831 को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले में जन्मी रानी अवंतीबाई ने 1857 की क्रांति में अद्भुत साहस का परिचय दिया। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ एक संगठित सेना तैयार कर खुद उसका नेतृत्व किया और अंतिम सांस तक लड़ते हुए बलिदान दिया।
1857 की क्रांति में निभाई अहम भूमिका
वक्ताओं ने बताया कि जब अंग्रेजों ने रामगढ़ रियासत पर कब्जा करने की कोशिश की, तब रानी अवंतीबाई ने इसका पुरजोर विरोध किया। उन्होंने करीब चार हजार सैनिकों की सेना के साथ अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। हालांकि संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः 20 मार्च 1858 को मातृभूमि के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
सामाजिक एकता और जागरूकता का संदेश
इस मौके पर उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने समाज में एकता और जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि रानी अवंतीबाई का जीवन हमें अन्याय के खिलाफ लड़ने और अपने अधिकारों के लिए खड़े होने की प्रेरणा देता है। युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने की अपील भी की गई।
इस मौके पर रामकिशोर पासी विधानसभा अध्यक्ष सरेनी, राकेश कुमार पासी, भाईचारा संयोजक धर्म राज गौतम, महासचिव विजय लोधी, सेक्टर अध्यक्ष रोशन लाल गौतम, रामचंद्र गौतम, राजू गौतम, समेत तमाम लोग मौजूद रहे।










