Raebareli : नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर भगाने के मामले में हल्का दरोगा पर सुलह कराने का गंभीर आरोप, सीओ ने दिया जांच के आदेश

Raebareli : उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के ऊंचाहार थाना क्षेत्र में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर भगाने के आरोप में दर्ज शिकायत पर पुलिस के हल्का दरोगा पर ही सुलह समझौता कराने का दबाव बनाने का आरोप लगा है। पीड़ित परिवार ने रविवार को कोतवाली पहुंचकर इस घटना की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद सीओ ने मामले की गहन जांच कराने और दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कही है। यह घटना न केवल स्थानीय स्तर पर पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है, बल्कि नाबालिगों के संरक्षण को लेकर भी चिंता बढ़ा रही है।

घटना का विवरण: पड़ोसी युवक ने की किशोरी को भगाने की कोशिश

कोतवाली क्षेत्र के एक छोटे से गांव में रहने वाले एक साधारण किसान परिवार की जिंदगी अचानक उथल-पुथल में बदल गई। पीड़ित युवक ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी, जो अभी पढ़ाई के दौर से गुजर रही है, बीती 7 नवंबर को घर से लापता हो गई। पूछताछ में पता चला कि पड़ोसी गांव का एक युवक, जिसकी उम्र 20-22 वर्ष बताई जा रही है, लंबे समय से उनकी बेटी के संपर्क में था। आरोपी युवक ने कथित तौर पर लड़की को प्रेम का झांसा देकर, भविष्य की चमकदार तस्वीरें दिखाकर और परिवार से छिपकर बहला-फुसलाया। परिणामस्वरूप, लड़की उसी शाम आरोपी के साथ भाग गई।

पीड़ित पिता ने तुरंत ऊंचाहार थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोपी युवक पर नाबालिग को अपहरण करने, POCSO एक्ट के तहत अपराध करने और अन्य संबंधित धाराओं (IPC 363, 366 आदि) के आरोप लगाए गए। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि लड़की की उम्र 18 वर्ष से कम होने के कारण यह मामला अत्यंत संवेदनशील है और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता थी। परिवार ने बताया कि वे गरीब हैं और बेटी की सुरक्षा ही उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। भागने के बाद से परिवार वाले लगातार पुलिस से संपर्क में थे, लेकिन उनकी उम्मीदें टूट गईं जब मामले में अप्रत्याशित मोड़ आया।

हल्का दरोगा पर लगा सुलह का दबाव बनाने का आरोप

शिकायत दर्ज होने के बाद पीड़ित परिवार को उम्मीद थी कि पुलिस तुरंत आरोपी को गिरफ्तार करेगी और लड़की को सुरक्षित वापस लाएगी। लेकिन आरोप है कि हल्का दरोगा ने मामले को गंभीरता से लेने के बजाय पीड़ित पक्ष पर ही दबाव बनाना शुरू कर दिया। सूत्रों के अनुसार, दरोगा ने परिवार को थाने बुलाया और उन्हें समझाने की कोशिश की कि “यह प्रेम प्रसंग का मामला लगता है, सुलह हो जाए तो बेहतर है।” कथित तौर पर, उन्होंने पीड़ित पिता को धमकी भरे लहजे में कहा कि यदि शिकायत आगे बढ़ाई गई तो परिवार को ही परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

पीड़ित ने रविवार को कोतवाली पहुंचकर उच्च अधिकारियों को पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि दरोगा ने आरोपी पक्ष से भी संपर्क किया और सुलह के लिए पैसे का लालच भी दिया। “हमारी बेटी का भविष्य दांव पर है, लेकिन पुलिस वाले ही हमें समझौता करने को मजबूर कर रहे हैं। यह न्याय व्यवस्था पर कलंक है,” पीड़ित पिता ने भावुक होकर कहा। परिवार का दावा है कि लड़की अभी भी आरोपी के साथ है और उसकी सुरक्षा को खतरा है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर आक्रोश पैदा कर दिया है, जहां ग्रामीणों ने पुलिस के रवैये पर सवाल उठाए हैं।

सीओ का बयान: जांच के बाद सख्त कार्रवाई का आश्वासन

मामले की गंभीरता को देखते हुए ऊंचाहार क्षेत्र के सीओ गिरजाशंकर त्रिपाठी ने तुरंत संज्ञान लिया। रविवार को कोतवाली में पीड़ित से मुलाकात के बाद सीओ ने कहा, “यह आरोप बेहद गंभीर हैं। हम मामले की निष्पक्ष और त्वरित जांच कराएंगे। यदि हल्का दरोगा दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आपराधिक मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा। नाबालिग लड़की की तलाश और सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है।”

सीओ ने जांच टीम गठित करने की बात कही है, जिसमें स्थानीय इंटेलिजेंस और महिला पुलिसकर्मियों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि POCSO एक्ट के तहत ऐसे मामलों में कोई ढील नहीं बरती जाएगी। जांच में आरोपी युवक की लोकेशन ट्रैक करने, लड़की के परिवार से गहन पूछताछ और संभावित सुलह के दबाव के सबूत जुटाने पर जोर दिया जाएगा।

सामाजिक संदर्भ: नाबालिग अपहरण के बढ़ते मामले चिंता का विषय

यह घटना उत्तर प्रदेश में नाबालिग लड़कियों के अपहरण और बहला-फुसलाने के बढ़ते मामलों की याद दिलाती है। NCRB के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में हर साल हजारों ऐसी घटनाएं दर्ज होती हैं, जिनमें अधिकांश प्रेम के नाम पर धोखा होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और पुलिस की सुस्ती ऐसी घटनाओं को बढ़ावा दे रही है। ऊंचाहार जैसे क्षेत्रों में जहां शिक्षा का स्तर कम है, वहां लड़कियों को निशाना बनाना आसान हो जाता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि पुलिस प्रशासन नाबालिग सुरक्षा के लिए विशेष अभियान चलाए और ऐसे मामलों में तत्काल FIR दर्ज करने का नियम सख्ती से लागू करे। पीड़ित परिवार को न्याय मिले, इसके लिए ग्रामीण स्तर पर सहायता समितियां गठित करने की भी सिफारिश की गई है।

आगे की कार्रवाई: परिवार की उम्मीदें बंधीं

पीड़ित परिवार ने बताया कि वे अब पूरी तरह सीओ की जांच पर भरोसा कर रहे हैं। “हमारी बेटी को जल्द वापस लाकर आरोपी को सजा दिलाना चाहते हैं,” उन्होंने कहा। पुलिस ने आरोपी युवक की तलाश तेज कर दी है और लड़की के मोबाइल लोकेशन पर नजर रखी जा रही है। यदि जांच में हल्का दरोगा के खिलाफ ठोस सबूत मिले, तो यह मामला विभागीय स्तर पर भी बड़ा हड़कंप मचा सकता है।

यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि पूरी व्यवस्था पर सवालिया निशान लगाती है। उम्मीद है कि सीओ की जांच से न्याय मिलेगा और ऐसी घटनाओं पर अंकुश लगेगा। विकास की इस खबर पर नजर बनी हुई है।

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