Board Of Peace Trump Sharif Modi : वाशिंगटन में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की पहली बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच संभावित युद्ध रोकने का पूरा श्रेय खुद को दिया। बैठक के दौरान ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को इशारा कर खड़े होने को कहा, जिसके बाद शरीफ तुरंत कुर्सी से उठ खड़े हुए। ट्रंप ने पीएम नरेंद्र मोदी को अपना “बहुत अच्छा दोस्त” और “ग्रेट मैन” बताते हुए भारत की तारीफ की, जिससे माहौल में थोड़ा असहज पल पैदा हो गया। यह घटना 19 फरवरी 2026 को वाशिंगटन में हुई बोर्ड ऑफ पीस की उद्घाटन बैठक के दौरान हुई, जहां गाजा पुनर्निर्माण और वैश्विक शांति पर चर्चा का मुख्य फोकस था।
बोर्ड ऑफ पीस क्या है? ट्रंप की नई पहल

ट्रंप प्रशासन ने जनवरी 2026 में दावोस में ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की घोषणा की थी। यह एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जिसका मुख्य उद्देश्य गाजा में युद्ध के बाद पुनर्निर्माण, स्थिरीकरण बल तैनात करना और वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करना है। बैठक में लगभग 40-50 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए, जिसमें पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ भी पहुंचे। अमेरिका ने बोर्ड के लिए 10 अरब डॉलर का वादा किया, जबकि 9 सदस्य देशों ने गाजा राहत के लिए 7 अरब डॉलर देने का ऐलान किया। कुछ देशों ने स्थिरीकरण बल में सैनिक भेजने पर सहमति जताई।
ट्रंप ने बैठक को “मेरे जीवन की सबसे महत्वपूर्ण चीजों में से एक” बताया और कहा कि पूर्ववर्ती प्रशासन सालों से जो नहीं कर पाए, वह उन्होंने एक साल में कर दिखाया। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने ट्रंप को “शांति के पुरुष” और “दक्षिण एशिया के उद्धारक” कहा, यहां तक कि पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित करने की बात दोहराई।
ट्रंप का दावा,एक फोन कॉल से युद्ध रुका
ट्रंप ने भाषण में कहा, “पाकिस्तान और भारत, वह बड़ा मुद्दा था। मैंने पीएम मोदी से बात की। वह उत्साहित हैं, अभी हमें देख रहे हैं।” फिर उन्होंने शहबाज शरीफ की तरफ इशारा कर कहा, “खड़े हो जाओ!” शरीफ तुरंत खड़े हो गए। ट्रंप ने आगे कहा, “मैंने दोनों से फोन पर बात की। मैं मोदी को बहुत अच्छे से जानता हूं। मैंने कहा, अगर तुम युद्ध नहीं रोकते तो मैं दोनों के साथ ट्रेड डील नहीं करूंगा। 200% टैरिफ लगा दूंगा।” उन्होंने दावा किया कि इससे 25 मिलियन जिंदगियां बचाई गईं।
ट्रंप ने पीएम मोदी को “ग्रेट मैन”, “ग्रेट गाय” और “मेरा बहुत अच्छा दोस्त” बताया। उन्होंने कहा, “मोदी ने शानदार काम किया है। भारत एक महान देश है।” पाकिस्तान के फील्ड मार्शल और चीफ ऑफ डिफेंस असिम मुनीर को भी “टफ मैन” और “ग्रेट फाइटर” कहा। ट्रंप ने कहा कि आखिरकार दोनों पक्षों को जो चाहिए था, मिल गया और अच्छा डील हुआ।
शहबाज शरीफ की प्रतिक्रिया,प्रोटोकॉल या असहजता?
वीडियो क्लिप में देखा जा सकता है कि ट्रंप के इशारे पर शहबाज शरीफ बिना देर किए खड़े हो गए। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इसे “जलील” या असहज पल बताया गया, क्योंकि ट्रंप ने मोदी की तारीफ करते हुए पाकिस्तान को बैकग्राउंड में रखा। हालांकि, शरीफ ने कोई मौखिक प्रतिक्रिया नहीं दी। बैठक के बाद शरीफ ने ट्रंप से मुलाकात की, जहां ट्रंप ने कहा, “मुझे यह आदमी पसंद है।” शरीफ ने ट्रंप की तारीफ की और दक्षिण एशिया में शांति के लिए उनका शुक्रिया अदा किया।
भारत का रुखल, कोई थर्ड पार्टी मध्यस्थता नहीं
भारत ने ट्रंप के दावों को बार-बार खारिज किया है। भारत का स्पष्ट रुख है कि भारत-पाकिस्तान मुद्दे द्विपक्षीय हैं और किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं रही। 2024 के कथित संघर्ष या सीजफायर में अमेरिकी हस्तक्षेप की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है। भारत ने हमेशा कहा कि दोनों देश खुद बातचीत से मुद्दे सुलझाते हैं। ट्रंप के बार-बार क्रेडिट लेने से भारत में इसे “सेल्फ-प्रमोशन” माना जा रहा है।
वैश्विक प्रभाव और डिप्लोमेसी का खेल
यह घटना अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति और ट्रंप की “अमेरिका फर्स्ट” नीति को दर्शाती है। ट्रंप मोदी के साथ मजबूत व्यक्तिगत संबंध दिखाते हैं, जबकि पाकिस्तान को भी बोर्ड ऑफ पीस में शामिल कर बैलेंस बनाए रखने की कोशिश की। लेकिन भाषण में मोदी की ज्यादा तारीफ से पाकिस्तान को “साइडलाइन” महसूस हुआ।
पाकिस्तान अमेरिका से संबंध मजबूत करना चाहता है, खासकर आर्थिक मदद और सुरक्षा के लिए। शरीफ की ट्रंप की तारीफ और नोबेल नामांकन का जिक्र इसी को दर्शाता है। वहीं, भारत-अमेरिका संबंध ट्रंप के कार्यकाल में मजबूत रहे हैं, जिसमें क्वाड, टेक्नोलॉजी और डिफेंस डील शामिल हैं।
निष्कर्ष
बोर्ड ऑफ पीस की यह पहली बैठक गाजा फोकस्ड थी, लेकिन ट्रंप ने इसे अपनी डिप्लोमेटिक जीतों का मंच बनाया। भारत-पाकिस्तान का जिक्र आते ही माहौल में उतार-चढ़ाव आया। ट्रंप का मोदी को “क्लोज फ्रेंड” कहना भारत के लिए सकारात्मक है, लेकिन पाकिस्तान के लिए थोड़ा असहज। क्या यह वाकई शांति की दिशा में कदम है या सिर्फ ट्रंप का शोमैनशिप? समय बताएगा।










