Transport Department : उत्तर प्रदेश के रायबरेली और फतेहपुर जिलों में परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा ओवरलोड ट्रकों से की जा रही लाखों रुपये की अवैध वसूली का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने इस संगठित गिरोह का पर्दाफाश करते हुए रायबरेली के लालगंज कोतवाली क्षेत्र में एक प्रमुख दलाल मोहित सिंह को गिरफ्तार कर लिया। इस कार्रवाई में कुल 11 अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ लालगंज कोतवाली में विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। एसटीएफ की इस सख्ती से पूरे परिवहन महकमे में हड़कंप मच गया है, और अब सवाल उठ रहा है कि आगे की पूछताछ में और किन-किन बड़े नाम सामने आएंगे?
घटना का पूरा विवरण: मुखबिर की सूचना से शुरू हुई कार्रवाई

एसटीएफ को लंबे समय से परिवहन विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की शिकायतें मिल रही थीं। सूत्रों के अनुसार, रायबरेली-फतेहपुर मार्ग पर चलने वाले ओवरलोड ट्रकों (मुख्य रूप से मौरंग और गिट्टी लदे) को बिना किसी जांच के पास कराने के बदले अधिकारियों और दलालों द्वारा मासिक वसूली की जा रही थी। इससे न केवल सड़कों की क्षति हो रही थी, बल्कि राज्य सरकार को भारी राजस्व हानि भी उठानी पड़ रही थी।
11 नवंबर को एसटीएफ को मुखबिर से गुप्त सूचना मिली कि लालगंज-डलमऊ तिराहे के पास एक काली रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी में एक व्यक्ति ओवरलोड वाहनों को परिवहन विभाग की मिलीभगत से पास कराने का काम कर रहा है। सूचना पर एसटीएफ टीम के सदस्य आलोक कुमार पांडे, स्वरूप कुमार पांडे, जितेंद्र कुमार वर्मा, अमित कुमार सिंह, आदित्य कुमार पाल और सुभाष कुमार ने लालगंज कोतवाली पुलिस की मदद से छापेमारी की। इस दौरान आरोपी मोहित सिंह पुत्र लाल बहादुर सिंह (निवासी: अम्बारा पश्चिम, थाना लालगंज, रायबरेली) को स्कॉर्पियो से गिरफ्तार कर लिया गया।
बरामद सामान और पूछताछ से खुले राज
गिरफ्तारी के दौरान मोहित के कब्जे से विभिन्न बैंकों के रुपे कार्ड, डेबिट कार्ड, एटीएम कार्ड, वीजा कार्ड आदि बरामद हुए, जिनका उपयोग वह अवैध लेन-देन में करता था। सबसे सनसनीखेज खुलासा तब हुआ जब मोहित की जेब से वाहनों की एक सूची (पर्ची) बरामद हुई। पूछताछ में मोहित ने कबूल किया कि वह रायबरेली-फतेहपुर रूट पर चलने वाले करीब 114 ओवरलोड ट्रकों से प्रति ट्रक 5,000 रुपये की वसूली करता था। इसमें से 500 रुपये वह अपना कमीशन रखता था, जबकि बाकी राशि परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को मासिक आधार पर वितरित करता था।
मोहित ने बताया कि यह सिलसिला कई महीनों से चल रहा था, और प्रति ट्रक के हिसाब से अलग-अलग अधिकारियों को फिक्स रेट पर भुगतान किया जाता था। उदाहरण के तौर पर:
- फतेहपुर के एआरटीओ पुष्पांजलि गौतम के ड्राइवर सिकंदर को प्रति ट्रक 2,500 रुपये मासिक।
- फतेहपुर के पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी के ड्राइवर अशोक तिवारी को प्रति ट्रक 2,500 रुपये मासिक।
- रायबरेली के एआरटीओ (प्रवर्तन) अंबुज के दीवान नौशाद को प्रति ट्रक 3,500 रुपये मासिक।
- रायबरेली की पीटीओ रेहाना बानो के ड्राइवर सुशील को प्रति ट्रक 1,500 रुपये मासिक।
- अन्य कर्मचारी मिथुन को भी इसी तरह का हिस्सा मिलता था।
इस तरह, हर महीने लाखों रुपये की अवैध कमाई हो रही थी, जो सीधे सरकार को चूना लगा रही थी।
11 नामों पर दर्ज FIR: महाभ्रष्ट अधिकारियों की लिस्ट
एसटीएफ इंस्पेक्टर अमित कुमार तिवारी ने लालगंज कोतवाली में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया। एफआईआर में कुल 11 लोगों के नाम शामिल हैं,
जिनमें रायबरेली और फतेहपुर के वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख हैं। नाम इस प्रकार हैं:
- एआरटीओ (प्रवर्तन) अंबुज (रायबरेली)
- पीटीओ रेहाना बानो (रायबरेली)
- दीवान नौशाद (रायबरेली)
- ड्राइवर सुशील (रायबरेली)
- एआरटीओ पुष्पांजलि गौतम (फतेहपुर) – जो करीब 10 वर्ष पहले रायबरेली में ही एआरटीओ रह चुकी हैं और अब फतेहपुर में तैनात हैं।
- पीटीओ अखिलेश चतुर्वेदी (फतेहपुर)
- ड्राइवर सिकंदर (फतेहपुर)
- ड्राइवर अशोक तिवारी (फतेहपुर)
- कर्मचारी मिथुन (फतेहपुर)
- अन्य संबंधित कर्मचारी (विवरण जांच में)।
फतेहपुर के पांच अधिकारियों-कर्मचारियों पर अलग से एफआईआर दर्ज हुई है। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, भारतीय न्याय संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) आदि के तहत कार्रवाई की गई है।
दो गिरफ्तारियां, आगे की पूछताछ में बड़े नामों का इंतजार
एसटीएफ ने मोहित सिंह के अलावा मामले में एक अन्य व्यक्ति को भी गिरफ्तार किया है। दोनों से गहन पूछताछ जारी है। सूत्रों का कहना है कि यह गिरोह प्रदेश स्तर पर फैला हुआ है, और आगे की जांच में अन्य जिलों के अधिकारियों के नाम भी सामने आ सकते हैं। विशेष रूप से, पुष्पांजलि गौतम पर पुराने समय से भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, और अब यह नया मामला उनके खिलाफ मजबूत सबूत साबित हो सकता है।
विभाग में खलबली: यूपी सरकार की छवि पर सवाल
यह कार्रवाई नवंबर के ‘यातायात माह’ के दौरान हुई है, जब डीएम और एसपी के समक्ष परिवहन अधिकारी सड़क सुरक्षा और नियमों की बड़ी-बड़ी बातें कर रहे थे। पीटीओ रेहाना बानो और एआरटीओ अंबुज जैसी जिम्मेदार अधिकारी इस भ्रष्टाचार में लिप्त पाए गए हैं, जिससे यूपी सरकार की ‘शून्य सहनशीलता’ वाली नीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। विपक्षी दलों ने इसे ‘लूटपाट की दुकान’ बताते हुए सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
साथ ही, स्थानीय स्तर पर जीएसटी विभाग में भी भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, लेकिन एसटीएफ की नजर अभी परिवहन पर है। क्षेत्राधिकारी लालगंज अमित सिंह ने बताया, “एफआईआर दर्ज हो चुकी है, और जांच पूरी होने पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।”
फोटो में दिखा भ्रष्टाचार का चेहरा
घटना से जुड़ी सोशल मीडिया पोस्ट्स में लगी तस्वीरों में आरोपी और संबंधित अधिकारी नजर आ रहे हैं, जो इस भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करती हैं। एसटीएफ की यह कार्रवाई न केवल स्थानीय स्तर पर सफाई लाएगी, बल्कि पूरे प्रदेश के परिवहन विभाग में सतर्कता बढ़ा देगी। अब सवाल यह है कि आगे की पूछताछ में किन-किन ‘महाभ्रष्ट’ नामों का पर्दाफाश होगा?










