Raebareli News : उत्तर प्रदेश की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने रायबरेली में परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार पर तगड़ा प्रहार किया है। परिवहन विभाग की दलाली करने वाले प्रमुख दलाल मोहित को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की गई है, जिसमें रायबरेली के दो वरिष्ठ अधिकारी, उनके सहयोगी और फतेहपुर जिले के पांच कर्मचारी शामिल हैं। एसटीएफ की इस कार्रवाई से रायबरेली-फतेहपुर मार्ग पर ट्रकों से की जा रही संगठित वसूली का राज खुल गया है।
परिवहन विभाग में दलाली का जाल: मोहित का रोल

एसटीएफ को गुप्त सूचना मिली थी कि रायबरेली-फतेहपुर हाईवे पर चलने वाले लगभग 114 ट्रकों से नियमित रूप से अवैध वसूली की जा रही है। इस गिरोह का केंद्रीय चरित्र मोहित उर्फ मोहित यादव है, जो परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर दलाली का धंधा चला रहा था। आरोप है कि मोहित प्रत्येक ट्रक से 5,000 रुपये की वसूली करता था, जिसमें से 500 रुपये खुद के हिस्से के रूप में रखता था। बाकी राशि अधिकारियों तक पहुंचाई जाती थी। इस तरह, महीने में लाखों रुपये का काला कारोबार फल-फूल रहा था।
मोहित परिवहन विभाग के प्रवर्तन विंग के अधिकारियों के लिए ‘फिक्सर’ का काम करता था। वह ट्रक चालकों को चेकिंग से बचाने के बदले पैसे ऐंठता था और विभागीय कार्रवाई को प्रभावित करने में माहिर था। एसटीएफ इंस्पेक्टर अमित तिवारी के नेतृत्व वाली टीम ने मोहित को रायबरेली के लालगंज क्षेत्र से दबोच लिया। पूछताछ में मोहित ने कई चौंकाने वाले राज उगले हैं, जिसमें अधिकारियों के साथ उसके साठगांठ का पूरा नेटवर्क शामिल है।
अधिकारियों पर गंभीर आरोप: एफआईआर में नामजद
एसटीएफ ने इस मामले में रायबरेली के एआरटीओ (प्रवर्तन) अंबुज और पीटीओ रेहाना बानो के खिलाफ लालगंज कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई है। दोनों अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और वसूली में संलिप्तता का आरोप है। इसके अलावा, इन दोनों के दीवान (कार्यालयी सहायक) और ड्राइवरों पर भी मुकदमा दर्ज किया गया है। फतेहपुर जिले से जुड़े इस नेटवर्क में पांच अन्य अधिकारी और कर्मचारी भी फंसे हैं, जिनके नाम एफआईआर में शामिल हैं।
कुल 11 नामजद आरोपियों में से मोहित के अलावा एक अन्य व्यक्ति को भी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। शेष के खिलाफ जांच तेज है, और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एफआईआर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी), 468 (जालसाजी के लिए धोखाधड़ी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज की गई है।
वसूली का तरीका: ट्रक चालकों की परेशानी
रायबरेली-फतेहपुर मार्ग पर ट्रक चालक लंबे समय से वसूली की शिकायतें करते रहे हैं। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि मोहित और उसके सहयोगी चेकिंग पॉइंट्स पर ट्रकों को रोकते थे। ट्रक चालकों को धमकाकर या लालच देकर 5,000 रुपये प्रति ट्रक वसूले जाते थे। यह वसूली ओवरलोडिंग, परमिट चेकिंग या अन्य तकनीकी खामियों के बहाने की जाती थी। चालक अगर पैसे न देते, तो उनके वाहन जब्त कर लिए जाते या भारी जुर्माना लगाया जाता। इस नेटवर्क से जुड़े ट्रक मालिकों ने गुप्त रूप से एसटीएफ को सूचना दी थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई हुई।
एक ट्रक चालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “हर 10-15 किलोमीटर पर चेकिंग के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। मोहित का नाम सभी की जुबान पर था। अब एसटीएफ की कार्रवाई से राहत मिली है।” एसटीएफ ने अब इस मार्ग पर सघन निगरानी बढ़ा दी है, ताकि अन्य संभावित वसूली गैंग का पर्दाफाश हो सके।
एसटीएफ की भूमिका और आगे की कार्रवाई
एसटीएफ इंस्पेक्टर अमित तिवारी ने बताया कि यह कार्रवाई परिवहन विभाग में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। “हमारी टीम ने कई दिनों की निगरानी के बाद दबिश दी। मोहित से पूछताछ में और सबूत मिल रहे हैं। सभी आरोपी जेल भेजे जाएंगे, और विभागीय जांच भी शुरू हो गई है।” परिवहन विभाग के उच्च अधिकारियों ने भी इस मामले का संज्ञान लिया है, और प्रभावित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं।
यह घटना उत्तर प्रदेश में परिवहन विभाग की ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। हाल ही में राज्य सरकार ने विभाग में वसूली रोकने के लिए सख्त निर्देश जारी किए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा। एसटीएफ की इस सफलता से उम्मीद है कि ट्रक चालकों को राहत मिलेगी और मार्ग पर स्वच्छ प्रणाली कायम होगी।










