आदिवासी कुड़मी समाज का मुरी स्टेशन पर रेल रोको आंदोलन

आदिवासी कुड़मी (कुर्मी) समाज का "रेल टेका-डहर छेका" (रेल रोको-सड़क घेरो) आंदोलन आज (20 सितंबर 2025) से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अनिश्चितकालीन रूप से शुरू हो गया है। यह आंदोलन मुख्य रूप से कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने, कुरमाली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कर

Sep 20, 2025 - 09:38
Updated: 10 months ago
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आदिवासी कुड़मी (कुर्मी) समाज का "रेल टेका-डहर छेका" (रेल रोको-सड़क घेरो) आंदोलन आज (20 सितंबर 2025) से झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में अनिश्चितकालीन रूप से शुरू हो गया है। यह आंदोलन मुख्य रूप से कुड़मी समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने, कुरमाली भाषा को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने, सरना धर्म कोड लागू करने और जल-जंगल-जमीन पर अधिकारों की मांग को लेकर चलाया जा रहा है। समाज का दावा है कि 1931 की जनगणना में उन्हें ST दर्जा मिला था, जो 1950 में हटा दिया गया। यह मांग लंबे समय से चली आ रही है, और 1931 की जनगणना में कुड़मी को ST का दर्जा दिए जाने का ऐतिहासिक हवाला दिया जाता है, जो बाद में 1950 में हटा दिया गया था। जिसको ले कर आदिवासी कुर्मी समाज के द्वारा अपनी मांगों को लेकर काफी संख्या में मुरी स्टेशनों रेल रोकने के लिए पहुंचे, प्रशाशन के द्वारा सिल्ली के कई जगहों पर बैरिकेटिंग लगाकर लोगों को रोकने की कोशिश की गई पर लोग खेतों में होकर अलग अलग रास्ते से स्टेशन पहुंचे । आंदोलन झारखंड के अलावा पश्चिम बंगाल और ओडिशा के सीमावर्ती इलाकों में भी फैला हुआ है, जहां करीब 100 रेलवे स्टेशनों पर प्रभाव पड़ सकता है।

मुरी स्टेशन पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी

बड़ी संख्या (हजारों) में कुड़मी समाज के लोग मुरी रेलवे स्टेशन पहुंचे। प्रशासन ने सिल्ली और आसपास के इलाकों में बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारी खेतों और वैकल्पिक रास्तों से गुजरकर स्टेशन पर पहुंच गए। वे रेलवे ट्रैक पर बैठकर ट्रेनों को रोकने लगे, जिससे कई ट्रेनें प्रभावित हुईं (जैसे रांची-हटिया रूट पर)।

सिल्ली के पूर्व विधायक सुदेश महतो (आजसू पार्टी प्रमुख) ने आंदोलन को पूर्ण समर्थन दिया और खुद मौके पर पहुंचे। JLKM (झारखंड लोकतांत्रिक क्रांति मोर्चा?) के देवेंद्र नाथ महतो, बेबी महतो और अन्य स्थानीय नेता भी शामिल हुए। सुदेश महतो ने सोशल मीडिया पर कविता लिखकर समाज के सम्मान की मांग उठाई, जो वायरल हो गई।

500 RPF जवान तैनात किए गए

रांची रेल मंडल ने मुरी पर 500 RPF जवान तैनात किए। ड्रोन, CCTV और राज्य पुलिस की मदद से निगरानी की जा रही है। सिल्ली, मुरी, टाटीसिल्वे और खलारी स्टेशनों के 300 मीटर दायरे में धारा 163 (निषेधाज्ञा) लागू कर दी गई, जिसके तहत 5 या अधिक लोगों का जमावड़ा प्रतिबंधित है। हालांकि, यात्रियों और आवश्यक सेवाओं पर कोई असर नहीं।

आंदोलन का व्यापक प्रभाव

झारखंड में मुरी के अलावा राय, टाटीसिल्वे, मेसरा, चंद्रपुरा, पारसनाथ, गोमो, नीमडीह, हंसडीहा आदि 40 स्टेशनों पर आंदोलन हो रहा है। अब तक 35+ ट्रेनें रद्द या डायवर्ट हुई हैं।

आजसू पार्टी ने सक्रिय भूमिका निभाई; उनके विधायक तिवारी महतो चरही स्टेशन पर ट्रैक पर बैठे। JLKM सुप्रीमो जयराम महतो ने भी समर्थन दिया। हालांकि, आदिवासी संगठनों ने कुड़मी की ST मांग का विरोध किया है, जिससे तनाव बढ़ा है। पड़ोसी राज्यों में जैसे पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी सरकार ने भारी पुलिस तैनाती की, जिससे वहां का आंदोलन रद्द हो गया। ओडिशा में भी अलर्ट है।

हाईकोर्ट ने प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए। कुड़मी समाज ने कहा है कि जब तक मांगें पूरी न हों, आंदोलन चलेगा। यात्रियों से अपील की गई है कि ST दर्जे की मांग को ऐतिहासिक न्याय मानें और समर्थन दें।

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