हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित कार्यकारी आदेश ने H-1B वीजा प्रोग्राम को पूरी तरह बदल दिया है। इस नए नियम के तहत, H-1B वीजा के लिए कंपनियों को प्रति वीजा धारक वार्षिक $100,000 (लगभग 88 लाख रुपये) की फीस देनी होगी। यह फीस मौजूदा $2,000-5,000 की सीमा से कहीं ज्यादा है और मुख्य रूप से टेक इंडस्ट्री पर असर डालेगी, जहां भारतीय प्रोफेशनल्स का बड़ा हिस्सा (2024 में 71% वीजा भारतीयों को मिले) काम करता है।
फैसले का तत्काल असर: हवाई यात्रा में हाहाकार

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फ्लाइट किरायों में उछाल
घोषणा के बाद, भारत से अमेरिका जाने वाली डायरेक्ट फ्लाइट्स के किराए में अचानक 2-3 गुना की बढ़ोतरी हो गई। उदाहरण के लिए, नई दिल्ली से न्यूयॉर्क की एकतरफा टिकट का किराया $4,500 (करीब 3.8 लाख रुपये) तक पहुंच गया, जो सामान्य से दोगुना है। एयरलाइंस ने इस ‘पैनिक बुकिंग’ का फायदा उठाया, क्योंकि हजारों H-1B वीजा धारक जल्दबाजी में वापसी कर रहे थे।
एयरपोर्ट पर अफरा-तफरी
अमेरिकी एयरपोर्ट्स पर कोलाहल मच गया। सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक एमिरेट्स फ्लाइट 3 घंटे लेट हो गई, जब दर्जनों भारतीय यात्री (H-1B धारक) विमान से उतर आए। इसी तरह, दुबई से मुंबई जाने वाली फ्लाइट में 10-15 यात्री उतर गए। कई लोग दुर्गा पूजा या छुट्टियों के लिए भारत आए थे, लेकिन अब फंस गए।
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