UK First Deceased Donor Womb Transplant: ब्रिटेन से आई एक खबर ने चिकित्सा विज्ञान की सीमाओं को नया अर्थ दे दिया है। एक ऐसी महिला, जो खुद गर्भ धारण करने में असमर्थ थीं, आज एक स्वस्थ बेटे की मां हैं—वह भी एक मृत महिला की डोनेट की गई बच्चेदानी के सहारे। यह घटना सिर्फ एक परिवार की खुशियों की कहानी नहीं, बल्कि आधुनिक चिकित्सा के साहसिक प्रयोग का जीवंत उदाहरण है।
क्यों पड़ी ट्रांसप्लांट की जरूरत

ग्रेस बेल नाम की महिला जन्मजात कमजोरी के कारण अपनी बच्चेदानी में गर्भ को सुरक्षित नहीं रख पा रही थीं। कई परीक्षणों और परामर्श के बाद डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि सामान्य तरीके से मां बनना उनके लिए संभव नहीं होगा। ऐसे में विशेषज्ञों ने बच्चेदानी ट्रांसप्लांट का विकल्प सुझाया—एक जटिल लेकिन संभावनाओं से भरी प्रक्रिया।
- जन्मजात गर्भाशय कमजोरी
- बार-बार गर्भ ठहरने में असफलता
- अन्य उपचारों का असर न होना
इन परिस्थितियों में ट्रांसप्लांट ही अंतिम उम्मीद बनकर सामने आया।
अंगदान से जीवनदान तक
अंगदान की चर्चा अक्सर दिल, किडनी या लिवर तक सीमित रहती है, लेकिन इस मामले ने दान की परिभाषा को और व्यापक बना दिया। एक मृत महिला के परिवार ने उनकी बच्चेदानी दान करने का निर्णय लिया। सर्जरी के बाद सफलतापूर्वक ग्रेस के शरीर में इसे प्रत्यारोपित किया गया।
ऑपरेशन कई घंटों तक चला और डॉक्टरों की टीम ने सूक्ष्म रक्तवाहिनियों को जोड़कर अंग को सक्रिय किया। कुछ महीनों की निगरानी और उपचार के बाद जब गर्भधारण संभव हुआ, तो उम्मीद की किरण और मजबूत हो गई।
ह्यूगो की पहली किलकारी
सभी आशंकाओं को पीछे छोड़ते हुए ग्रेस ने एक स्वस्थ बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम ह्यूगो रखा गया। अब 10 हफ्ते का ह्यूगो पूरी तरह स्वस्थ है। परिवार के लिए यह क्षण भावनाओं से भरा रहा। ग्रेस और उनके पति स्टीव पॉवेल ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे अनमोल उपहार है।
ग्रेस की आंखों में आंसू थे, लेकिन इस बार वे खुशी के थे। उन्होंने कहा कि बच्चे का चेहरा देखकर उन्हें यकीन ही नहीं हुआ कि यह सच है।
डॉक्टरों के लिए ‘क्रांतिकारी पल’
इस पूरी प्रक्रिया से जुड़े विशेषज्ञों ने इसे चिकित्सा इतिहास का महत्वपूर्ण मोड़ बताया। उनका कहना है कि यह तकनीक उन महिलाओं के लिए नई राह खोल सकती है, जो गर्भाशय से जुड़ी समस्याओं के कारण मातृत्व से वंचित रह जाती हैं।
हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्पष्ट किया कि:
- प्रक्रिया बेहद जटिल और महंगी है
- लंबे समय तक मेडिकल मॉनिटरिंग जरूरी होती है
- इम्यूनोसप्रेसिव दवाओं का सावधानी से उपयोग करना पड़ता है
फिर भी सफलता ने चिकित्सा समुदाय को उत्साहित किया है।
मातृत्व का नया अर्थ
यह घटना सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं की मिसाल भी है। एक परिवार का साहसिक अंगदान और दूसरी महिला की अटूट उम्मीद ने मिलकर असंभव को संभव बना दिया। आधुनिक चिकित्सा और मानवता की साझी ताकत ने दिखा दिया कि जीवन की राहें वहीं खत्म नहीं होतीं, जहां उम्मीदें टूटती हैं।










