झारखंड के तीसरे चरण के चुनाव में होने वाले चार सीटों पर इंडिया जन बंधन के उम्मीदवार भारी बहुमत से जीत हासिल करेंगे : सोनाल शांति

रांची : झारखंड के तीसरे चरण के चुनाव में होने वाले चार सीटों के चुनाव में इंडिया जन बंधन के उम्मीदवार भारी बहुमत से जीत हासिल करेंगे। उक्त दावा करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि चुनावी समर ढलान की ओर है। झारखंड में चुनाव के दो चरणों में जनता ने जिस तरह का समर्थन इंडिया जनबंधन क

May 25, 2024 - 02:03
Updated: 2 years ago
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रांची : झारखंड के तीसरे चरण के चुनाव में होने वाले चार सीटों के चुनाव में इंडिया जन बंधन के उम्मीदवार भारी बहुमत से जीत हासिल करेंगे। उक्त दावा करते हुए प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता सोनाल शांति ने कहा कि चुनावी समर ढलान की ओर है। झारखंड में चुनाव के दो चरणों में जनता ने जिस तरह का समर्थन इंडिया जनबंधन के उम्मीदवारों को दिया था। उससे कहीं ज्यादा उत्साहित होकर इस चरण में इंडिया जनबंधन के उम्मीदवारों के पक्ष में मतदान करेंगे। शांति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह द्वारा लगातार असंयमित और अमर्यादित भाषा का प्रयोग उनकी हताशा को दर्शा रहा है। उनकी लगातार कोशिशों के बावजूद भी देश में चुनावी धारा सांप्रदायिक मोड़ नहीं ले सकी, जिससे उनका सत्ता पाने का सपना चूर हो गया है। प्रधानमंत्री मोदी की सांप्रदायिक और संकीर्ण सोच और बदलती विचारधारा को देखते हुए जनता हर चरण के चुनाव में भाजपा और मोदी की गारंटी से दूर होती चली गई। जनता यह मान चुकी है, कि चुनावी समर में झूठ के सहारे सत्ता पाकर मोदी अपने थैलीशाह मित्रों की ही मदद करेंगे और इस देश में आर्थिक विषमता की खाई बढ़ती चली जाएगी। इसलिए जनता अपने मूल मुद्दों रोजगार, महंगाई, महिला समस्या, किसान की समस्या, जल जंगल जमीन पर अधिकार के मामले के मुद्दे पर मतदान हमारे पक्ष में कर रही है। जनता से दूरी और जनता को सांप्रदायिक रास्ते पर धकेलने के प्रयास ने झारखंड सहित पूरे देश में भाजपा को हाशिये पर धकेल दिया है। भाजपा ने जिस तरह से झारखंड के अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशियों को बदला है। उससे पता चलता है कि उनके सांसदों ने जनता के लिए कोई काम नहीं किया।

उन्होंने कहा कि झारखंडी मानुष देख रहा है कि विकासशील सोच रखने वाली झारखंडी सरकार को किस तरह छल प्रपंच रच कर गिराने की साजिश रची गई। देश की जनता ने मतदान करने के पहले मोदी सरकार को महिलाओं पर हुए अत्याचार, औद्योगिक घरानो को पहुंचाये गये लाभ, इलेक्ट्रोल बांड के जरिए चंदा लेकर धंधा देने की नीतियों, किसान आंदोलन में मृत 600 किसानों के न्याय की कसौटी पर पूरी तरह परखा है और इसके बाद ही प्रधानमंत्री मोदी को आराम देने का फैसला किया है।

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