हिंदी पत्रकारिता का सफर एवं भूमिका : हरे राम पंडित

भारत में हिन्दी पत्रिका की शुरुआत 1826 में "उदंत मार्तण्ड" नामक समाचारपत्र के प्रकाशन से हुई थी। यह समाचार पत्र 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कलकत्ता से शुरू किया गया था इसका साप्ताहिक प्रकाशन होता था। उदंत मार्तण्ड ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी और हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण

Jul 25, 2025 - 14:26
Updated: 12 months ago
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भारत में हिन्दी पत्रिका की शुरुआत 1826 में "उदंत मार्तण्ड" नामक समाचारपत्र के प्रकाशन से हुई थी। यह समाचार पत्र 30 मई 1826 को पंडित जुगल किशोर शुक्ल द्वारा कलकत्ता से शुरू किया गया था इसका साप्ताहिक प्रकाशन होता था। उदंत मार्तण्ड ने हिंदी पत्रकारिता की नींव रखी और हिंदी भाषा के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वैसे 1819 में भारतीय भाषा में पहला समाचार पत्र बंगाली भाषा में "संवाद कौमुदी " के नाम से प्रकाशित हुआ था जिसके प्रकाशक राजा राम मोहन राय थे पत्रिका और पत्रकार की भूमिका समाज में अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रभावी रही है। वे सूचना का प्रसार करते हैं, सार्वजनिक बहस को बढ़ावा देते हैं, सरकार और अन्य संस्थानों पर जवाबदेही तय करते हैं और लोकतंत्र को मजबूत करते हैं पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को न्यायसंगत, यथार्थ, निष्पक्ष, सौम्य और शालीन तरीके से समाचार, विचार, टीकाएं और जानकारी प्रदान करना है। विगत दो सौ बरसों की बात करें तो भारत में हिन्दी पत्रिका का प्रथम प्रकाशन से अभी तक का कुल समय दो सौ बरसों का है। इसमें प्रथम 125 बर्ष देश की स्वतंत्रता आंदोलन का रहा बाकी 75 बर्ष देश की आजादी के बाद का है देश की स्वतंत्रता संग्राम के काल खंड में पत्रिका एवं पत्रकारों का अद्भुत योगदान रहा देश को स्वतंत्रता दिलाने में 125 बरसों का पत्रकारिता का कालखंड चुनौतियों भरा था। हिन्दी समाचारपत्र अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ भारतीय जनमानस को एकजुट करने का हथियार हुआ करता था। स्वतंत्रता आंदोलन के समय के कुछ समाचार-पत्रों का जिक्र करना जरूरी है। अमृत बाजार पत्रिका ने ब्रिटिश शासन की नीतियों की कड़ी आलोचना की और स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। द हिन्दू एवं बाल गंगाधर तिलक द्वारा संपादित समाचार पत्र केसरी ने अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को संगठित करने में योगदान दिया। युगांतर एवं वन्देमातरम समाचारपत्रों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ लोगों को जागरूक करने एवं स्वतंत्रता संग्राम में अविस्मरणीय भूमिका निभाई। इन समाचार पत्रों ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जागरूकता फैलाई, बल्कि लोगों को एकजुट करने, राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने एवं स्वतंत्रता संग्राम को सफल बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। देश के स्वतंत्र होने के बाद पत्रिका एवं पत्रकारों को देश में लोकतंत्र को मजबूत करने, देश का विकास करने की भूमिका में आना पड़ा। जब जब देश अपनी सीमा एवं अस्मिता की रक्षा के लिए पड़ोसी देशों के साथ युद्ध में गया तो हिंदी समाचार पत्र एवं पत्रकारों ने सेना एवं देशवासियों के मनोबल को ऊंचा रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1976 में देश की क्रूर सरकार ने अपनी कुर्सी बचाने के कारण देश में आपातकाल थोपा, सभी विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया, समाचार पत्रों के स्वतंत्र प्रकाशन पर रोक लगा दिया गया तब भी पत्रकार एवं पत्रिकाओं ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए छोटे छोटे संस्करण, पैंफलेट छाप कर आपातकाल का विरोध किया। सत्ता परिवर्तन तक हुआ भारत में पत्रकारिता को लंबे समय से बदलाव का एक सशक्त माध्यम और राष्ट्र की कहानी को आकार देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका के रूप में देखा जाता रहा है। स्वतंत्रता संग्राम में अपनी अपनी अविस्मरणीय भूमिका से लेकर समकालीन भारत के सामाजिक -राजनैतिक परिदृश्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पत्रकारिता भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ है,जो संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों को कायम रखती है। पत्रकार नागरिकों को सरकारी नीतियों, राजनैतिक घटनाक्रमों, सामाजिक मुद्दों से अवगत कराने, जनता को सूचित एवं शिक्षित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। निष्पक्ष रिपोर्टिंग और खोजी पत्रकारिता के माध्यम से वे एक स्वतंत्र एवं निर्भीक प्रहरी के रूप में कार्य करते हैं, पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं और सत्ता में बैठे लोगों को उनके कार्यों के लिए जवाबदेह ठहराते हैं। पत्रकार सांस्कृतिक विविधता और एकता को बढ़ावा देने, आर्थिक प्रगति और व्यावसायिक पारदर्शिता का समर्थन करने के साथ साथ सामाजिक न्याय एवं मानवाधिकारों की वकालत भी करते हैंपत्रकारिता समय के साथ साथ काफी विकसित हुई है। आजकल ज्यादातर पत्रकारिता डिजिटल माध्यमों से की जाती है। इनमें टेलीविजन, रेडियो, कंप्यूटर, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया जैसे माध्यम शामिल हैं। वर्तमान समय में हर चीज के बारे में जागरूक होना बहुत जरूरी हो गया है। पत्रकारिता पहले अखबारों तक सीमित हुआ करती थी, लेकिन अब इसमें बहुत कुछ शामिल है। सी एन एन, जैसी विदेशी न्यूज़ चैनलों के साथ साथ राष्ट्रीय चैनलों, स्थानीय चैनलों, यू ट्यूब जैसे अनेकों डिजिटल माध्यमों का भरमार हो गया है। चौबीसों घंटे किसी चैनल से न्यूज, तो कहीं विभिन्न विषयों पर चर्चा सुना व देखा जा सकता है। रेडियो स्टेशन, सोशल मीडिया पर समाचारों की उपलब्धता किसी भी स्थान पर सुनिश्चित कराता है इंटरनेट। अभी जब देश आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है तब भी पत्रकार एवं पत्रिका यथार्थ, निष्पक्ष, सौम्य एवं शालीन तरीके से समाचार, विचार टीकाएं और जानकारी प्रदान कर रहे हैं।

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