उमेश कुमार पाठक 'रेणु' रचित गजल संग्रह ' बोलता दर्पण ' का हुआ लोकार्पण

सतबरवा : रविवार को उमेश कुमार पाठक 'रेणु' द्वारा रचित गजल संग्रह ' बोलता दर्पण' का लोकार्पण पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी और श्री रेणु की माता श्रीमती सकलावती पाठक के द्वारा किया गया। पुस्तक का लोकार्पण लेखक के सतबरवा प्रखंड स्थित पैतृक गांव लोहड़ी में समारोह आयोजित कर किया गया। जिसमें पलामू जिले और रा

Jan 19, 2025 - 14:30
Updated: 2 years ago
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सतबरवा : रविवार को उमेश कुमार पाठक 'रेणु' द्वारा रचित गजल संग्रह ' बोलता दर्पण' का लोकार्पण पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी और श्री रेणु की माता श्रीमती सकलावती पाठक के द्वारा किया गया। पुस्तक का लोकार्पण लेखक के सतबरवा प्रखंड स्थित पैतृक गांव लोहड़ी में समारोह आयोजित कर किया गया। जिसमें पलामू जिले और राज्य भर के अनेक साहित्यिक विभूतियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी, विशिष्ट अतिथियों सूर्यकांत चौधरी, रविन्द्र चौधरी, विजयनद सरस्वती, प्रेम भसीन, श्रीधर प्रसाद द्विवेदी, हरिवंश प्रभात, विजय प्रसाद शुक्ल, रविशंकर पांडेय, अमित तिवारी, ममता झा, रविंद्रनाथ झा, रमेश कुमार सिंह, विजय शंकर मिश्र, जया लक्ष्मी आदि ने संयुक्त रूप से किया। इससे पहले समारोह में आए अतिथियों का स्वागत माल्यार्पण कर किया गया। आपको बता दें कि श्री 'रेणु' की यह चौथी प्रकाशित रचना है। इससे पहले इनकी कविता-संग्रह रचनाएं प्रतिध्वनि (2019), बूंद (2022) और लोहड़ी कुंडलिया(2022) में प्रकाशित हो चुकी हैं। इनकी पिछली तीनों ही रचनाओं को साहित्यकारों और सुधी पाठकों द्वारा काफी सराहना मिली थी। श्री रेणु ने बताया कि यह रचना गजल संग्रह है जिसे उन्होंने अपनी माता जी और प्रथम गुरु सकलावति पाठक को समर्पित किया है। वहीं पर मंत्री केएन त्रिपाठी ने कहा कि श्री रेणु की सभी रचनाएं सार गर्भित हैं और इन्हें समझने के लिए वृहत साहित्यिक समझ का होना अति आवश्यक है। इनका साहित्यिक कौशल अतुलनीय और अद्भुत है। यह गर्व का क्षण है। इन्होंने साहित्य के क्षेत्र में लंबी लकीर खींची है और हम सब को गर्व का अनुभव कराया है। समारोह में वंदना श्रीवास्तव, अनुज कुमार पाठक, सिद्धेश्वर प्रसाद सिंह, रमेश विद्यानाथ पांडेय, राम प्रवेश पंडित, अशोक कुमार मिश्र, अंजनी कुमार दुबे सहित सुरेश पाठक, मृत्युंजय पाठक, दिनेश पाठक, अमरेंद्र पाठक, त्रिपुरारी पाठक, आशीष सिन्हा, अजय उरांव, सुनील विश्वकर्मा, प्रेम प्रकाश दुबे, रमेश पाठक तथा दर्जनों साहित्य प्रेमी मौजूद रहे।

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