हवाई यात्रा खतरनाक! 50% कमर्शियल फ्लाइट्स में बार-बार तकनीकी खराबी, संसदीय समिति की चौंकाने वाली रिपोर्ट

सावधान यात्रियो! आधे विमानों में दोहराई जाने वाली खामियां, संसद की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

हवाई यात्रा: हवाई यात्रा बहुत आम हो गई है। लोग सस्ते टिकट लेकर घूमने निकल पड़ते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी उड़ान कितनी सुरक्षित है? संसदीय समिति की एक नई रिपोर्ट में यह डरावना खुलासा हुआ है कि देश की लगभग 50 प्रतिशत कमर्शियल फ्लाइट्स में बार-बार तकनीकी खराबियां आ रही हैं। यह रिपोर्ट यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़ी करती है। अगर आप प्लेन से यात्रा करने वाले हैं तो यह खबर आपके लिए जरूरी है।

क्या कहती है संसदीय समिति की रिपोर्ट?

संसदीय स्थायी समिति (ट्रांसपोर्ट, टूरिज्म और कल्चर) ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट संसद में पेश की। इसमें डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के ऑडिट के आधार पर बड़े आंकड़े दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 से फरवरी 2026 तक 754 कमर्शियल विमानों की जांच की गई। इनमें से 377 विमानों (यानी करीब 50 प्रतिशत) में बार-बार तकनीकी दिक्कतें पाई गईं।

ये खराबियां एक बार की नहीं, बल्कि दोहराई जाने वाली (recurring defects) हैं। मतलब छोटी-मोटी गड़बड़ियां बार-बार हो रही हैं जो विमान की सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। समिति ने इसे सिर्फ छोटी समस्या नहीं माना, बल्कि पूरे एविएशन सिस्टम की व्यवस्थागत कमजोरी बताया।

कौन-सी एयरलाइंस पर सबसे ज्यादा खराबी?

रिपोर्ट में अलग-अलग एयरलाइंस का डेटा भी दिया गया है:

  • इंडिगो: सबसे ज्यादा ऑडिट इंडिगो की फ्लाइट्स का हुआ। 405 विमानों की जांच में 148 में तकनीकी खराबियां मिलीं। इंडिगो की फ्लाइट्स इस लिस्ट में सबसे ऊपर हैं।
  • एअर इंडिया: 166 उड़ानों की जांच में 137 विमानों में बार-बार खराबी पाई गई। यानी करीब 82 प्रतिशत में समस्या।
  • एअर इंडिया एक्सप्रेस: 101 उड़ानों में से 54 में तकनीकी दिक्कतें।

एअर इंडिया ग्रुप के कुल विमानों में भी काफी बड़ी संख्या में दोहराई जाने वाली खामियां बताई गई हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि ये समस्याएं छोटी हो सकती हैं, लेकिन उन्हें बार-बार होने से सुरक्षा पर असर पड़ता है।

अहमदाबाद हादसे के बाद हुई जांच

यह रिपोर्ट 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए एअर इंडिया हादसे के बाद और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। उस घटना के बाद DGCA ने जुलाई 2025 में विशेष ऑडिट किया। ऑडिट में करीब 100 सुरक्षा संबंधी लापरवाहियां सामने आईं। समिति ने इस हादसे को सिर्फ एक दुर्घटना नहीं माना, बल्कि बड़े सिस्टम की खामियों का संकेत बताया।

रिपोर्ट में बोइंग 787 और बोइंग 777 जैसे बड़े विमानों के पायलटों की ट्रेनिंग में कमियों का भी जिक्र है। साथ ही, कम से कम चार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में केबिन क्रू की संख्या पर्याप्त नहीं थी।

और भी गंभीर समस्याएं

तकनीकी खराबी के अलावा रिपोर्ट में कई और चिंताजनक बातें बताई गई हैं:

  • फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन का उल्लंघन: पायलट और क्रू को ज्यादा समय तक काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे थकान बढ़ती है और गलती का खतरा होता है।
  • कॉकपिट में अनधिकृत एंट्री: यह सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा जोखिम है।
  • एक्सपायर्ड इमरजेंसी इक्विपमेंट: कुछ विमानों में इमरजेंसी उपकरण की समय सीमा खत्म हो चुकी थी, फिर भी उनका इस्तेमाल हो रहा था।
  • 2025 के अंत तक एयरलाइंस को 19 नोटिस भेजे गए थे इन उल्लंघनों के लिए। एअर इंडिया को अकेले 9 “कारण बताओ” नोटिस मिले।

DGCA में स्टाफ की भारी कमी

रिपोर्ट का सबसे बड़ा सबक यह है कि DGCA खुद कमजोर है। DGCA में 48.3 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। कुल 1,630 पदों में से सिर्फ 843 भरे हुए हैं। समिति ने कहा कि स्टाफ की कमी से रेगुलेटर (नियामक) पूरे एविएशन सेक्टर की सही निगरानी नहीं कर पा रहा है।

भारत में पायलट-टू-एयरक्राफ्ट रेशियो भी वैश्विक मानकों से कम है। दुनिया में औसतन 18-20 पायलट प्रति विमान होते हैं, जबकि भारत में यह करीब 14 है। एयरलाइंस क्रू की बचत कर रही हैं, जिससे छोटी समस्या भी बड़ी हो जाती है।

समिति ने क्या सुझाव दिए?

संसदीय समिति ने सरकार और सिविल एविएशन मंत्रालय से कई सख्त सिफारिशें की हैं:

  • तुरंत एक हाई-लेवल कमिटी बनाकर सिस्टम की जड़ में छिपी कमियों की जांच कराई जाए।
  • DGCA को ज्यादा स्वायत्तता (आर्थिक और प्रशासनिक) दी जाए ताकि वह स्वतंत्र रूप से काम कर सके।
  • सुरक्षा नियमों का बहुत सख्ती से पालन कराया जाए।
  • पायलट ट्रेनिंग, क्रू मैनेजमेंट और विमान रखरखाव में सुधार किया जाए।
  • स्टाफ भर्ती तेज की जाए और निगरानी तंत्र मजबूत किया जाए।

समिति ने चेतावनी दी कि अगर इन समस्याओं को नजरअंदाज किया गया तो बड़े हादसों का खतरा बढ़ सकता है।

यात्रियों के लिए क्या मतलब है?

यह रिपोर्ट पढ़कर आम आदमी सोचता है – क्या मैं सुरक्षित उड़ान भर रहा हूं? सच तो यह है कि भारतीय एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है। हर साल ज्यादा लोग हवाई यात्रा कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा की तैयारी उतनी तेज नहीं हो पाई।

सलाह:

  • टिकट बुक करते समय एयरलाइन की हालिया समीक्षा और देरी-रद्दीकरण के रिकॉर्ड चेक करें।
  • अगर कोई तकनीकी समस्या बताई जाए तो उड़ान से पहले पूछताछ जरूर करें।
  • इमरजेंसी स्थिति में क्रू के निर्देशों का पालन करें।
  • सरकार और DGCA से उम्मीद है कि वे इन सिफारिशों को जल्द लागू करेंगे।

एयरलाइंस का कहना है कि ज्यादातर खराबियां छोटी हैं और उन्हें स्वेच्छा से रिपोर्ट किया जाता है, लेकिन संसदीय समिति इसे हल्के में लेने को तैयार नहीं है। सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

निष्कर्ष

हवाई यात्रा सुविधाजनक है, लेकिन सुरक्षा सबसे ऊपर है। संसदीय समिति की यह रिपोर्ट एक बड़ा अलार्म है। सरकार, DGCA, एयरलाइंस और यात्रियों – सबको मिलकर इस समस्या को सुलझाना होगा। जब तक सिस्टम मजबूत नहीं होता, हर यात्री को सतर्क रहना चाहिए।

Other Latest News

Leave a Comment