6 Blasts Planned on Babri Anniversary in Delhi-NCR : दिल्ली (Delhi) के लाल किले (Red Fort) के पास हुए धमाके की जांच में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा हुआ है। जांच एजेंसियों ने ऐसे आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जिसमें शामिल थे डॉक्टर—हाँ, वही लोग जो जान बचाने की कसम खाते हैं, वे अब मौत का खेल खेलने निकले थे। यह मॉड्यूल फरीदाबाद (Faridabad) से एक्टिव था और 6 दिसंबर 2025 को दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में 6 धमाके करने की तैयारी में था। सूत्रों के मुताबिक, इस ग्रुप ने बकायदा “बाबरी मस्जिद (Babri Masjid)” विध्वंस की बरसी पर “इंतकाम” लेने की योजना बनाई थी। तो चलिए जानते हैं कि क्या थी इन आतंकियों की असली साजिश, कैसे डॉक्टर बने बमबाज और किस तरह टल गई देश की सबसे बड़ी तबाही।
लाल किला धमाके से खुली बड़ी साजिश की परतें

दिल्ली (Delhi) के ऐतिहासिक लाल किला (Red Fort) के पास हुए कार ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया। जांच के बाद पता चला कि यह कोई एकलौता हमला नहीं था, बल्कि 6 धमाकों की बड़ी साजिश का हिस्सा था। फरीदाबाद (Faridabad) के डॉक्टर टेरर मॉड्यूल के सदस्य लगातार विस्फोटक जुटा रहे थे और उन्होंने 6 दिसंबर 2025 की तारीख फाइनल की थी। जांच एजेंसियों ने बताया कि यह ग्रुप बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) विध्वंस की बरसी पर बदला लेने के मकसद से हमला करना चाहता था। ये संदिग्ध डॉक्टर दिल्ली, नोएडा (Noida) और गुरुग्राम (Gurugram) में धमाके की योजना बना चुके थे। लेकिन इनकी साजिश पर पानी फिर गया जब रेड किला धमाके के बाद पूरी प्लानिंग सामने आ गई।
डॉक्टरों का मॉड्यूल या मौत का नेटवर्क?
जांच में सामने आया कि यह पूरा मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) से जुड़ा हुआ था। फरीदाबाद (Faridabad) में सक्रिय इस नेटवर्क के सदस्य डॉक्टर थे—जो आम तौर पर लोगों की जान बचाने के पेशे में थे, लेकिन इस बार मौत फैलाने की साजिश में शामिल थे। इनमें डॉ. उमर मोहम्मद उर्फ उमर-उन-नबी (Dr. Umar Mohammad alias Umar-un-Nabi) का नाम सामने आया, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी (Al-Falah University) में कार्यरत था। उसने कार ब्लास्ट में इस्तेमाल की गई कार खुद चलाई थी। इसी ग्रुप के दो और सदस्य डॉ. मुज़म्मिल शेख (Dr. Muzammil Sheikh) और शाहीन सईद (Shaheen Sayeed) को गिरफ्तार किया गया है। जांचकर्ताओं के अनुसार, यह मॉड्यूल बेहद पेशेवर और तकनीकी जानकारी रखने वाले लोगों का था।
6 दिसंबर को क्यों चुना गया ‘इंतकाम’ का दिन?
पूछताछ में गिरफ्तार आतंकियों ने खुलासा किया कि उन्होंने 6 दिसंबर 2025 का दिन जानबूझकर चुना था। यह वही तारीख है जब साल 1992 में अयोध्या (Ayodhya) में बाबरी मस्जिद (Babri Masjid) को गिराया गया था। सूत्रों के मुताबिक, यह आतंकी संगठन सालों से इस दिन किसी बड़े हमले की धमकी देता रहा है। जैश-ए-मोहम्मद (Jaish-e-Mohammad) के सरगना मसूद अज़हर (Masood Azhar) ने भी अपने कॉलम में अयोध्या पर “बदला लेने” की बात कही थी। जांचकर्ताओं ने बताया कि अगस्त 2025 में यह हमला होना था, लेकिन विस्फोटक की व्यवस्था में दिक्कत के कारण इसे टालकर दिसंबर की तारीख तय की गई। यह मॉड्यूल करीब 3000 किलो विस्फोटक जुटा चुका था और इसका इस्तेमाल दिल्ली-NCR में सिलसिलेवार धमाकों में होना था।
कैसे नाकाम हुई देश की सबसे बड़ी आतंकी साजिश
जांच एजेंसियों की सतर्कता ने देश को एक बड़े हादसे से बचा लिया। फरीदाबाद (Faridabad) और दिल्ली (Delhi) में छापेमारी के दौरान लगभग 2,900 किलो विस्फोटक सामग्री बरामद की गई। पकड़े गए संदिग्धों की जानकारी से खुलासा हुआ कि कुल आठ बॉम्बर्स (8 Bombers) को हमले को अंजाम देना था। लेकिन जैसे ही कुछ सदस्यों की गिरफ्तारी हुई, मुख्य आरोपी उमर घबरा गया और उसने हताशा में लाल किला (Red Fort) के पास कार ब्लास्ट कर दिया। इस विस्फोट में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है। जांच एजेंसियों का कहना है कि अगर यह साजिश समय रहते न पकड़ी जाती, तो दिल्ली-NCR (Delhi-NCR) में 6 दिसंबर देश का सबसे काला दिन बन जाता।










