CPI(ML) Holds Massive Protest Demonstration : ऊंचाहार में दलित युवक की भीड़ द्वारा की गई हत्या के खिलाफ भाकपा (माले) का विशाल प्रतिवाद प्रदर्शन

CPI(ML) Holds Massive Protest Demonstration : रायबरेली ( Raebareli ) जिले के ऊंचाहार थाना क्षेत्र में 2 अक्टूबर को हुई एक दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या के खिलाफ बुधवार को भाकपा (माले) के नेतृत्व में एक विशाल प्रतिवाद प्रदर्शन आयोजित किया गया। धार्मिक उन्माद और जातीय हिंसा के खिलाफ यह प्रदर्शन सैकड़ों की संख्या में लोगों की भागीदारी के साथ संपन्न हुआ, जिसमें वक्ताओं ने घटना को प्रशासनिक अक्षमता और पुलिसिया लापरवाही का परिणाम बताते हुए कड़ी निंदा की। प्रदर्शनकारियों ने नारों और बैनरों के माध्यम से न्याय की मांग की तथा जिले में सिलसिलेवार हो रही दलित हत्याओं, महिलाओं के उत्पीड़न और बलात्कार की घटनाओं पर प्रशासन की ढिलाई पर सवाल उठाए।

प्रदर्शन का नेतृत्व भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य और इंकलाबी नौजवान सभा के राज्य सचिव सुनील मौर्या ने किया। उन्होंने मंच से बोलते हुए कहा,यह घटना न केवल एक निर्दोष दलित युवक की हत्या है, बल्कि भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में स्थापित हो चुकी ‘भीड़ हत्या संस्कृति’ का एक कड़वा प्रमाण है। 2 अक्टूबर को ऊंचाहार थाना क्षेत्र के ईश्वरदासपुर गांव के निकट रेलवे ट्रैक पर मिले हरिओम वाल्मीकि (38 वर्षीय) के शव ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। हरिओम, जो फतेहपुर जिले के निवासी थे, अपनी पत्नी पिंकी से मिलने के लिए ससुराल जा रहे थे। पिंकी एनटीपीसी स्थित पंजाब नेशनल बैंक में सफाईकर्मी हैं। मानसिक रूप से कमजोर हरिओम को ग्रामीणों ने ड्रोन चोरी के शक में पकड़ लिया और बेरहमी से पीटा।

वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि कैसे भीड़ ने लाठियों, बेल्टों और डंडों से उनकी पिटाई की, उनके निजी अंगों पर प्रहार किए और पानी डालकर होश में लाकर फिर से यातनाएं दीं। मरते-मरते उन्होंने राहुल गांधी का नाम लिया, तो भीड़ ने कहा, ‘यहां सब बाबा वाले आदमी हैं।’ यह वाक्य ही दर्शाता है कि कैसे सत्ता का संरक्षण हिंसा को बढ़ावा दे रहा है।” प्रदर्शन करने वाले सुनील ने आगे कहा,इस जघन्य अपराध में गदागंज और ऊंचाहार थाना पुलिस की भूमिका संदिग्ध है।

घटना के दौरान पुलिस को सूचना मिलने के बावजूद वे मौके पर नहीं पहुंचे। कॉल रिकॉर्ड्स से साबित होता है कि पीड़ित की मदद के लिए किए गए फोन कॉल्स पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऊंचाहार थाने के कोतवाल संजय कुमार को ट्रांसफर कर दिया गया, जबकि तीन अन्य पुलिसकर्मियों एसआई सहित को निलंबित किया गया। लेकिन यह केवल दिखावा है। इनके निलंबन और स्थानांतरण के जरिए उनके अपराध को कमतर आंकने की कोशिश की जा रही है। राजनीतिक प्रभाव में कुछ आरोपी बचाए जा रहे हैं, जो अत्यंत दुखद है। पुलिस के सकल दल भी इस हत्या के भागीदार हैं।”

प्रदर्शन में सुनील मौर्या ने स्पष्ट मांगें रखीं। उन्होंने कहा,दोनों थाना क्षेत्रों के पुलिस कर्मियों को इस भीड़ हत्या के आपराधिक मुकदमे में सह-आभियुक्त बनाया जाए। वीडियो बनाने वालों, उकसाने वालों और कई चरणों में हुई पिटाई तथा हत्या में शामिल सभी अपराधियों की तत्काल पहचान कर गिरफ्तारी की जाए। जिले में हो रही सिलसिलेवार दलित हत्याओं, महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या और उत्पीड़न को रोकने में प्रशासनिक ढिलाई की गहन समीक्षा हो। ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए सक्षम कदम उठाए जाएं, जैसे विशेष जांच दल का गठन और सख्त कानूनी कार्रवाई।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो भाकपा (माले) और इंकलाबी नौजवान सभा आंदोलन को तेज करेंगे।

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