Parents Haunted By Daughter Crime In Meerut: मेरठ (Meerut) के ब्रह्मपुरी (Brahmpuri) इलाके से एक दिल दहला देने वाली कहानी सामने आई है। मुस्कान त्यागी हत्याकांड (Muskan Tyagi Murder Case) ने न सिर्फ एक परिवार की बेटी को जेल की सलाखों के पीछे पहुंचाया, बल्कि उसके माता-पिता और भाई-बहन की जिंदगी भी बर्बाद कर दी। समाज के अप्रत्यक्ष बहिष्कार और टूटे रिश्तों ने परिवार को हद तक तोड़ दिया है। हालात इतने बिगड़ गए हैं कि अब मुस्कान के पिता प्रमोद त्यागी ने मेरठ छोड़ने का फैसला कर लिया है। उनके घर पर लगा ‘मकान बिकाऊ है’ का पोस्टर इस परिवार की मजबूरी और दर्द दोनों बयान कर रहा है। आइए जानते हैं पूरी खबर क्या है…
मुस्कान की करतूत और तबाह हुआ परिवार/Parents Haunted By Daughter Crime In Meerut
मेरठ (Meerut) के ब्रह्मपुरी (Brahmpuri) क्षेत्र की मुस्कान त्यागी पर अपने पति सौरभ राजपूत (Saurabh Rajput) की हत्या का आरोप है। पुलिस जांच के अनुसार, मुस्कान ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर इस हत्या की साजिश रची थी। गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया और अब कोर्ट में सुनवाई चल रही है। लेकिन इस घटना ने सिर्फ मुस्कान की नहीं, पूरे त्यागी परिवार की दुनिया उलट दी। पिता प्रमोद त्यागी, जो पेशे से ज्वेलर हैं, अब अपनी दुकान पर ताला डाल चुके हैं। कभी ग्राहकों से भरी रहने वाली दुकान अब वीरान है। प्रमोद कहते हैं—“अब कोई हमारी दुकान पर नहीं आता। लोगों को लगता है हम भी गुनहगार हैं।” कारोबार ठप पड़ने और समाज की तिरस्कार भरी निगाहों ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है। हाल ही में डिप्रेशन के चलते प्रमोद को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

भाई-बहन की जिंदगी भी हुई तबाह
मुस्कान (Muskan) के भाई-बहन भी समाज के इस बहिष्कार से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। छोटे भाई की प्राइवेट कंपनी में नौकरी चली गई—मैनेजमेंट ने कहा कि ‘सोसाइटी का प्रेशर’ है, इसलिए उन्हें हटाना पड़ रहा है। वहीं, बड़ी बहन का ट्यूशन सेंटर, जो घर पर ही चलता था, अब पूरी तरह खाली है। पहले जहां रोजाना दर्जनों बच्चे आते थे, अब कोई अभिभावक अपने बच्चे को वहां भेजना नहीं चाहता। परिवार की मां ने भावुक होकर कहा, “हमसे गलती नहीं हुई, फिर भी सब हमें अपराधी समझते हैं। हमारी बेटी की सजा हम भुगत रहे हैं।” समाज से रिश्ते टूट चुके हैं—न कोई मिलने आता है, न किसी समारोह में बुलावा आता है। यहां तक कि पड़ोसी भी अब दूरी बनाए रखते हैं। हर तरफ चुप्पी और शर्मिंदगी ने इस परिवार की जिंदगी को एक बोझ बना दिया है।
मकान बेचकर मेरठ छोड़ने की तैयारी
सोशल बॉयकॉट और आर्थिक तंगी से टूटे प्रमोद त्यागी परिवार (Pramod Tyagi Family) ने अब मेरठ छोड़ने का मन बना लिया है। उन्होंने अपने दोमंजिला घर पर एक बड़ा पोस्टर चस्पा किया है—“मकान बिकाऊ है, संपर्क: 9xxxxxxxxx।” प्रमोद कहते हैं, “अब यहां रहना असंभव हो गया है। बेटी जेल में है, लेकिन हम भी सजा झेल रहे हैं। लोग ताने देते हैं, उंगलियां उठाते हैं। बस अब किसी छोटे शहर में जाकर नई जिंदगी शुरू करना चाहते हैं।” उनके पड़ोसी संजय शर्मा ने बताया, “प्रमोद जी बहुत अच्छे इंसान हैं, लेकिन समाज ने उनके परिवार को अलग-थलग कर दिया है। मकान बेचना उनकी मजबूरी है।” परिवार अब इस उम्मीद में है कि जल्दी कोई खरीदार मिले, ताकि वे इस दर्दनाक माहौल से निकलकर कहीं सुकून पा सकें।
समाज और प्रशासन की भूमिका पर सवाल
इस पूरे मामले ने समाज और प्रशासन दोनों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। पुलिस का कहना है कि मुस्कान हत्याकांड की जांच जारी है और जल्द चार्जशीट दाखिल की जाएगी। मगर परिवार की सामाजिक और मानसिक स्थिति पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह “सामाजिक न्याय की कमी” का उदाहरण है- जहां अपराधी का परिवार भी बिना गलती के सजा भुगतता है। उन्होंने मांग की है कि ऐसे परिवारों को मानसिक सहयोग और पुनर्वास की सहायता दी जानी चाहिए। यह घटना सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की झलक है जहां किसी की गलती का बोझ पूरा परिवार उठाता है। फिलहाल, प्रमोद त्यागी का परिवार मेरठ छोड़ने की तैयारी में है- एक नई शुरुआत की उम्मीद के साथ, पर बीते कल की यादें अब भी पीछा नहीं छोड़ रहीं।










