Scam in Raebareli Panchayat : सरायदामू पंचायत में घोटालों की पोल खुली, प्रधान पर संगीन आरोप

सरायदामू में करोड़ों का खेल? इंटरलॉकिंग से शौचालय तक खुली गड़बड़ियों की परतें

Scam in Raebareli Panchayat : रायबरेली (RaeBareli) के विकासखंड राही (Rahi) की सरायदामू (Sarayadamu) ग्राम पंचायत एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह बेहद गंभीर है। पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार और फर्जी भुगतान को लेकर जो खुलासे सामने आए हैं, उन्होंने पूरे इलाके में हलचल मचा दी है। ग्रामीणों की शिकायत के बाद शुरू जांच में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं—चाहे वह बिना स्वीकृति बनी सड़कें हों, गायब ट्री गार्ड हों या फिर धरातल पर मौजूद ही न होने वाले करोड़ों के मॉडल शौचालय। पंचायत से जुड़ी वस्तुओं का गायब होना और बिलों की डुप्लीकेसी ने मामले को और पेचीदा बना दिया है। आरोपों के घेरे में ग्राम प्रधान पार्वती (Parvati) और उनके प्रतिनिधि भूप नारायण (Bhoop Narayan) हैं। तो चलिए जानते हैं पूरा मामला क्या है….

घटना की पृष्ठभूमि

सरायदामू (Sarayadamu) ग्राम पंचायत, विकासखंड राही (Rahi), रायबरेली (RaeBareli) में लंबे समय से अनियमितताओं की चर्चा चल रही थी। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम प्रधान पार्वती (Parvati) और उनके प्रतिनिधि भूप नारायण (Bhoop Narayan) पर विकास कार्यों में भारी घोटाले के आरोप पहले भी लगाए गए थे, लेकिन इस बार मामला कहीं ज्यादा गंभीर है। ग्रामीणों द्वारा लगातार की जा रही शिकायतों के बाद जिलाधिकारी ने जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी को औपचारिक जांच का जिम्मा सौंपा है। पंचायत क्षेत्र में बिना प्रस्ताव और बिना किसी तकनीकी स्वीकृति के काम कराए जाने की खबरें पहले ही संदेह पैदा कर रही थीं। वहीं, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि प्रधान के कार्यकाल में सचिवों के साथ तालमेल न होने और मनमानी करने के कारण विकास कार्य वर्षों से प्रभावित हैं। यह पृष्ठभूमि घटना को और बड़ी बनाती है।

मुख्य खुलासा और घोटाले का आरोप

जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने ग्रामीणों के शक को और मजबूत कर दिया। पंचायत में इंटरलॉकिंग सड़कों का निर्माण बिना प्रस्ताव, बिना टेंडर और बिना तकनीकी मंजूरी के कराया गया। सबसे हैरानी की बात यह रही कि सड़कों पर गिट्टी तक नहीं डाली गई और सिर्फ मिट्टी भरकर पूरा भुगतान निकाल लिया गया। ट्री गार्ड के नाम पर 84 की आपूर्ति दिखाकर पूरा भुगतान ले लिया गया, जबकि जमीन पर सिर्फ 16 ही मिले। पंचायत भवन में एक ही इंटरलॉकिंग का बिल दो बार पास किया गया। इसके अलावा 2022–23 में बनी बाउंड्रीवॉल की प्लास्टर क्वालिटी इतनी खराब मिली कि जांच अधिकारी के एक मुक्के से ही दीवार भरभराकर गिर गई। पंचायत की कुर्सियों के भी प्रधान के घर में पाए जाने की शिकायतें दर्ज हुईं। इन खुलासों ने गांव में सनसनी फैला दी है।

जांच, बयान और ग्रामीण लोग

जांच अधिकारियों ने पंचायत से जुड़े कई दस्तावेज जब्त किए हैं, जिनमें वित्तीय अनियमितताओं के संकेत साफ दिखाई देते हैं। आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए कुर्सी–मेज खरीद के नाम पर 68,000 रुपये का भुगतान निकाल लिया गया, लेकिन मौके पर कोई सामान नहीं मिला। वहीं 96 लाख रुपये के मॉडल शौचालय का भुगतान पूरा निकाल लिया गया, जबकि गांव में ऐसा कोई शौचालय मौजूद ही नहीं है। अम्बेडकर पार्क (Ambedkar Park) में मिट्टी भराई के नाम पर भी 95,333 रुपये के घोटाले का आरोप है। वर्तमान सचिव संजय प्रताप सिंह (Sanjay Pratap Singh) ने सभी संदिग्ध भुगतान रोक दिए हैं, जिसके बाद प्रधान समर्थकों द्वारा उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रामक खबरें फैलाने का आरोप भी सामने आया है। ग्रामीणों का कहना है कि प्रधान का किसी सचिव के साथ कभी तालमेल नहीं रहा और यही भ्रष्टाचार का मुख्य कारण है।

आगे की कार्यवाही हुई तेज

मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च प्रशासन ने जांच की गति तेज कर दी है। जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी की प्रारंभिक रिपोर्ट में कई अनियमितताओं की पुष्टि होने की संभावना जताई जा रही है। सचिव संजय प्रताप सिंह (Sanjay Pratap Singh) द्वारा भुगतान रोक दिए जाने के बाद पंचायत के अन्य कार्य भी प्रभावित हुए हैं। ग्रामीण चाहते हैं कि इस मामले में कठोर कार्रवाई हो ताकि भविष्य में कोई जिम्मेदार अधिकारी या प्रधान जनता के धन का दुरुपयोग न कर सके। आने वाले दिनों में जांच टीम विस्तृत रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंपेगी, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई, वित्तीय रिकवरी और आरोपियों पर दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल पूरा गांव इस बात का इंतजार कर रहा है कि प्रशासन इस बड़े घोटाले पर क्या निर्णय लेता है।

Other Latest News

Leave a Comment