Raebareli : सेमरा गांव के जगतपुर रजबहा में सिंचाई विभाग की सिल्ट सफाई पर भ्रष्टाचार का आरोप, ग्रामीणों और प्रधानों में रोष

रायबरेली : उत्तर प्रदेश के रायबरेली ( Raebareli ) जिले में सिंचाई विभाग द्वारा चलाए जा रहे नहरों की सिल्ट सफाई अभियान पर अब भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगने शुरू हो गए हैं। सदर तहसील के अंतर्गत आने वाले राही ब्लॉक के सेमरा गांव के पास स्थित जगतपुर रजबहा नहर में ठेकेदारों द्वारा की जा रही सफाई को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय ग्राम प्रधानों में भारी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई का कार्य मानकों के विपरीत किया जा रहा है, जिससे नहर की क्षमता प्रभावित हो रही है और किसानों की फसलें खतरे में पड़ सकती हैं। इस मुद्दे पर ग्रामीणों ने विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

आज दोपहर करीब 4:00 बजे जगतपुर रजबहा नहर के किनारे सिल्ट सफाई का कार्य चल रहा था, जब स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम प्रधान प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर ठेकेदारों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। ग्रामीणों के अनुसार, सफाई का दावा करते हुए ठेकेदार केवल ऊपरी सतह की पतली परत को हटाने का नाटक कर रहे हैं, जबकि नहर के अंदर जमा गाद (सिल्ट) को पूरी तरह से साफ नहीं किया जा रहा। इससे नहर का जल प्रवाह कम हो रहा है, जो आने वाले रबी मौसम में सिंचाई के लिए गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।

ग्रामीणों के बयान: “यह तो खुला भ्रष्टाचार है!”

स्थानीय ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामू वर्मा ने बताया, “सिंचाई विभाग ने सफाई का ठेका तो दिया, लेकिन ठेकेदार केवल औपचारिकता निभा रहे हैं। नहर में जमा सिल्ट को ट्रैक्टर से हल्की जुताई करके काम पूरा बता दिया जा रहा है। हमने कई बार शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। यह किसानों के साथ धोखा है।” वर्मा ने आगे कहा कि गांव के करीब 200 से अधिक किसान इस नहर पर निर्भर हैं, और यदि सफाई ठीक से नहीं हुई तो उनकी गेहूं-चना जैसी फसलों को भारी नुकसान होगा।

एक अन्य ग्रामीण, 55 वर्षीय किसान रामपाल सिंह ने गुस्से में कहा, “हमारे खेत सूखे पड़े रहेंगे अगर नहर साफ नहीं हुई। ठेकेदार सिल्ट को सड़क किनारे फेंककर पैसे कमा रहे हैं, जबकि विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं। हम प्रदर्शन करने को मजबूर हैं।” सिंह ने बताया कि हाल ही में पड़रिया क्षेत्र में भी इसी तरह की अनियमितताओं पर किसानों ने प्रदर्शन किया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

सेमरा गांव की महिला किसान सुनीता देवी ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा, “हमारे जैसे छोटे किसान पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं। अब यह भ्रष्टाचार हमें और परेशान कर रहा है। विभाग को तुरंत जांच करनी चाहिए, वरना हम जिला मुख्यालय तक धरना देंगे।”

पृष्ठभूमि: सिंचाई विभाग का सफाई अभियान और बढ़ते विवाद

रायबरेली ( Raebareli ) जिले में हर साल मानसून के बाद नहरों और रजबाहों की सिल्ट सफाई का कार्यक्रम चलाया जाता है, ताकि जल निकासी सुचारू रहे। इस वर्ष सिंचाई विभाग ने जिले भर में करीब 150 किलोमीटर लंबी नहरों की सफाई के लिए 5 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया था। हालांकि, हाल के दिनों में कई जगहों पर सफाई में लापरवाही के आरोप लगे हैं। सलोन तहसील क्षेत्र में एक तिहाई नहरें अभी तक साफ नहीं हो पाई हैं, जबकि मंत्री के आदेश के बावजूद काम रुका हुआ है। इसी क्रम में 22 नवंबर को रजबाहा सफाई में अनियमितता पर किसानों ने प्रदर्शन किया था, जहां ठेकेदारों ने केवल सतही सफाई की थी।

जिले के सिंचाई विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “हमारे पास शिकायतें आ रही हैं। जल्द ही एक टीम गठित की जाएगी जो जगतपुर रजबहा का निरीक्षण करेगी। यदि अनियमितता पाई गई तो ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।” हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि ऐसी आश्वासनों से अब तंग आ चुके हैं।

प्रभाव: किसानों की चिंता बढ़ी

जगतपुर रजबहा नहर सेमरा, जगतपुर और आसपास के छह गांवों को सिंचाई सुविधा प्रदान करती है। यहां के किसान मुख्य रूप से धान, गेहूं और दालों की खेती पर निर्भर हैं। सिल्ट जमा होने से नहर का जलग्रहण क्षेत्र कम हो जाता है, जिससे पानी की कमी हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि सफाई ठीक से न हो तो फसल उत्पादन में 20-30 प्रतिशत की कमी आ सकती है। जिले में पहले ही सूखे की आशंका है, ऐसे में यह विवाद किसानों के लिए दोहरी मार साबित हो रहा है।

आगे की कार्रवाई: क्या होगा?

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि 48 घंटों के अंदर सफाई कार्य को मानकों के अनुरूप नहीं किया गया तो वे बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे। स्थानीय विधायक और जिला प्रशासन से भी हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। दूसरी ओर, सिंचाई विभाग ने कहा है कि पूरे जिले में सफाई अभियान दिसंबर तक पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन भ्रष्टाचार के आरोपों से विभाग की छवि पर सवाल खड़े हो गए हैं।

यह घटना रायबरेली में सिंचाई व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करती है, जहां भ्रष्टाचार के कारण किसान सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। जिले के अन्य क्षेत्रों में भी इसी तरह के विवाद सामने आने की आशंका है।

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