Raebareli News : सलोन कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले घोसी का पुरवा (मजरे ख्वाजापुर) गांव में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारियों पर मिलावटी पनीर के नाम पर अवैध वसूली, मारपीट, घर में घुसकर तोड़फोड़ और फर्जी हिरासत का गंभीर आरोप लगा है। पीड़ित व्यापारी मोहम्मद साबिर और उनके बेटे को पुलिस ने 26-27 नवंबर की रात करीब 12 बजे घर से उठा लिया था और तीन दिन तक थाने में अवैध रूप से बंद रखा। एसपी को शिकायत मिलने के बाद ही दोनों को रिहा किया गया।
पहले से थी रंगदारी की शिकायत

पीड़ित मोहम्मद साबिर वर्षों से गांव में पनीर बनाने व बेचने का काम करते हैं। उनका आरोप है कि सलोन थाने के दरोगा विजय शंकर यादव और दीवान बच्चा लंबे समय से उनसे अवैध वसूली कर रहे थे। इसी सिलसिले में 27 नवंबर को ही साबिर ने पुलिस अधीक्षक रायबरेली को लिखित शिकायती पत्र देकर विपक्षियों व उक्त पुलिसकर्मियों पर रंगदारी मांगने और जान से मारने की धमकी देने की शिकायत की थी।
आधी रात घर में घुसे 15 पुलिसकर्मी, की मारपीट-तोड़फोड़
शिकायत के महज कुछ घंटे बाद ही रविवार देर रात करीब 12 बजे तीन गाड़ियों में सवार सलोन पुलिस और एसओजी के लगभग 15 जवान व्यापारी के घर पहुंचे। पीड़ित परिवार की महिलाओं ने बताया कि पुलिसवालों ने घर का दरवाजा तोड़कर अंदर घुसते ही परिवार के साथ मारपीट शुरू कर दी, गाली-गलौज की और धमकाया कि “तुमने पुलिस से पंगा ले लिया है, अब अवैध असलाह और गौकशी की धाराएं लगाकर जेल भिजवाएंगे।”
पुलिस ने बाथरूम से निरमा सर्फ और किचन से सरसों का तेल निकालकर फोटो खींचे और इसे मिलावट का सबूत बताने की कोशिश की। घर में लगे सीसीटीवी कैमरे भी तोड़ दिए गए ताकि कोई सबूत न रह जाए। इसके बाद साबिर और उनके बेटे को जबरन गाड़ी में बैठाकर थाने ले जाया गया।
तीन दिन तक थाने में रखा अवैध हिरासत में
परिजनों के अनुसार दोनों को तीन दिन तक थाने में बंद रखा गया और लगातार अवैध वसूली का दबाव बनाया जाता रहा। जब परिवार ने पुलिस अधीक्षक को दूसरा शिकायती पत्र देकर पूरी घटना की जानकारी दी, तब जाकर सोमवार को दोनों को रिहा किया गया।
बिना सैंपल जांच के लाखों रुपए की पनीर नष्ट
इसी बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग की एक टीम ने व्यापारी के घर पर छापा मारकर भारी मात्रा में बने हुए पनीर को जब्त कर लिया और उसे मौके पर ही नष्ट कर दिया। विभाग का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें ट्रक भरकर पनीर को डंप करके नष्ट किया जा रहा है।
जब मीडिया ने अपर जिला अधिकारी (खाद्य) से इसकी जानकारी मांगी तो उन्होंने कहा कि सैंपलिंग हुई थी और जांच रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी। लेकिन पीड़ित परिवार का साफ आरोप है कि कोई सैंपल नहीं लिया गया, न ही कोई नोटिस दी गई। सीधे पुलिस की मौजूदगी में सारी पनीर नष्ट करा दी गई, जिससे उन्हें लाखों रुपए का नुकसान हुआ।
दोनों विभागों की मिलीभगत पर उठे सवाल
ग्रामीणों और पीड़ित परिवार का कहना है कि पूरा प्रकरण मिलावटी पनीर का नहीं, बल्कि अवैध वसूली का है। पुलिस ने पहले व्यक्ति को उठाया, तीन दिन बंद रखा और उसी दौरान खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को बुलाकर बिना जांच लाखों की पनीर नष्ट कराई। इससे साफ जाहिर है कि दोनों विभाग मिलकर व्यापारी को प्रताड़ित कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने एसएसपी रायबरेली से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषी पुलिसकर्मियों व खाद्य विभाग के अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही पीड़ित परिवार को हुए नुकसान की भरपाई और सुरक्षा प्रदान की जाए।
फिलहाल इस पूरे प्रकरण से सलोन पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।










