Raebareli : उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh ) के रायबरेली ( Raebareli ) जिले में महिला थाने की नवनियुक्त प्रभारी पुष्पा शर्मा पर लापरवाही, मनमानी और कर्तव्य की अवहेलना के गंभीर आरोप लग रहे हैं। जिले के पुलिस अधीक्षक डॉ. यसवीर सिंह के सख्त दिशा-निर्देशों का पालन न करने और कराने में विफलता के कारण थाने का संचालन घर बैठे हो रहा है, जिससे आम जनता में असंतोष व्याप्त है। योगी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं जैसे मिशन शक्ति में भी थाने की ओर से कोई रुचि नजर नहीं आ रही, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के उद्देश्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि थाने का यह हाल जिले के पुलिस अधिकारियों के दो दिवसीय निरीक्षण मात्र से ही उजागर हो सकता है।
थाने की अनुपस्थिति बनी चर्चा का केंद्र

पुष्पा शर्मा को महिला थाने में तैनाती के लगभग दो माह हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान वे समय पर थाने पहुंचने में ही विफल साबित हुई हैं। सूत्रों के अनुसार, दोपहर बाद वे थाने से नदारत रहती हैं और क्षेत्रीय भ्रमण भी शून्य है। थाने के कार्यों को महत्व न देने के कारण आगंतुकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “थाना प्रभारी घर से ही आदेश जारी करती हैं, जबकि थाने का वास्तविक संचालन उनके चहेतों के हाथों में है। इससे छोटे-मोटे विवादों का समाधान भी नहीं हो पा रहा।”
थाने के अंदरूनी स्रोतों से मिली जानकारी के मुताबिक, पुष्पा शर्मा थाने को अपने निजी सहायकों—जिनमें सिपाही प्रीति, प्रभा और ड्राइवर पाल प्रमुख हैं—के सहारे चला रही हैं। ये तीनों ही थाने के अधिकांश फैसले लेते हैं, जबकि प्रभारी की उपस्थिति केवल कागजों पर ही सीमित रहती है। इससे थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं, और जनता में यह चर्चा आम हो गई है कि “घर बैठे थाना चलाने वाली प्रभारी से महिलाओं की कैसे उम्मीद की जाए?”
नाबालिग विवाह और धन उगाही के चौंकाने वाले आरोप
सबसे गंभीर आरोप थाने के इन तीनों सहयोगियों पर लगे हैं। करीब 10 से 15 दिन पूर्व, प्रीति, प्रभा और ड्राइवर पाल ने मिलीभगत से थाने में ही एक नाबालिग लड़की का विवाह करा दिया। यह घटना बाल विवाह निषेध अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है, और सूत्रों का दावा है कि यह “सुलह-समझौता” के नाम पर किया गया। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की चेतावनी दी है।
इनके अलावा, इन तीनों पुलिसकर्मियों पर “सुलह-समझौता” के नाम पर धन उगाही के भी आरोप हैं। थाने पर आने वाले फरियादियों को छोटे-छोटे झगड़ों और पारिवारिक विवादों में भी अनावश्यक तारीखें दी जाती हैं, जिससे वे बार-बार थाने के चक्कर काटने को मजबूर होते हैं। एक प्रभावित महिला ने बताया, “हमारे पारिवारिक मतभेद को सुलझाने के बजाय वे पैसे की मांग करते हैं। तैनाती के दो माह बीतने को हैं, लेकिन एक भी सुलह-समझौता नहीं हुआ।” थाने में काउंसलिंग का काम भी केवल महिला सिपाहियों तक सीमित रह गया है, जबकि प्रभारी की भूमिका नगण्य है।
मिशन शक्ति और अन्य योजनाओं की अनदेखी
योगी सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में महिला थाने की भूमिका अहम मानी जाती है, लेकिन यहां की स्थिति उदासीनता की बानगी पेश कर रही है। मिशन शक्ति, जो महिलाओं की सुरक्षा, सशक्तिकरण और अपराधों के खिलाफ जागरूकता पर केंद्रित है, में थाने की ओर से कोई सक्रियता नहीं दिखाई दे रही। क्षेत्रीय भ्रमण, जागरूकता शिविर या योजनाओं का प्रचार-प्रसार शून्य है। एक वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, “महिला थाना प्रभारी का कर्तव्य है कि वे इन योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाएं, लेकिन यहां तो बुनियादी कर्तव्य भी निभाना मुश्किल हो रहा है।”
जनता में बढ़ता असंतोष, उच्चाधिकारियों की कार्रवाई की मांग
जिस उद्देश्य से पुष्पा शर्मा को महिला थाने में तैनात किया गया था—महिलाओं की शिकायतों का त्वरित निपटारा, पारिवारिक विवादों का सुलह-समझौता और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन—उसका एक भी लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। आम जनता में थाने के प्रति अविश्वास बढ़ता जा रहा है, और लोग कह रहे हैं कि “निष्पक्ष और कर्तव्यनिष्ठ एसपी डॉ. यसवीर सिंह के दिशा-निर्देशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।”
स्थानीय निवासियों और प्रभावित पक्षों ने जिला पुलिस अधिकारियों से मांग की है कि थाने पर दो दिवसीय सघन निरीक्षण कराया जाए, ताकि इन “राज” का पर्दाफाश हो सके। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह मामला उच्च न्यायालय तक पहुंच सकता है। जिला प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्र बताते हैं कि एसपी कार्यालय में शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं।










