बाराबंकी : उत्तर प्रदेश के बाराबंकी (Barabanki) जिले की हैदरगढ़ तहसील के अंसारी गांव में एक हैरान करने वाली घटना सामने आई है, जहां घर बनाने के लिए खरीदी गई अल्ट्राटेक (UltraTech) कंपनी की सीमेंट इतनी घटिया निकली कि पिलर डालते ही सीमेंट-मौरंग का मिश्रण अपने आप छूटकर गिरने लगा। दो सप्ताह बीत जाने के बाद भी पिलर में जरा सी भी मजबूती नहीं आई है, जिससे पूरा परिवार इस डर में जी रहा है कि कहीं उनका नया घर बनने से पहले ही ढह न जाए।
पीड़ित रमेश मिश्रा ने बताया कि सर्दी और कोहरे से बचने के लिए उन्होंने अपने पुराने जीर्ण-शीर्ण मकान को तोड़कर नया मकान बनवाने का फैसला किया। इसके लिए उन्होंने स्थानीय डीलर से अल्ट्राटेक मार्का की सीमेंट 380 रुपये प्रति बोरी की दर से खरीदी। राजमिस्त्री ने जैसे ही पिलर का काम शुरू किया, सीमेंट का मसाला पिलर से अपने आप छिलकने और गिरने लगा। कुछ ही घंटों में पिलर की हालत इतनी खराब हो गई कि उसमें बालू और सीमेंट अलग-अलग दिखाई देने लगे।

रमेश मिश्रा ने बताया कि “मैंने 25-30 बोरी अल्ट्राटेक सीमेंट खरीदी थी। पिलर डालने के कुछ घंटे बाद ही मसाला छूटने लगा। अब दो हफ्ते हो चुके हैं, लेकिन पिलर में एक इंच भी मजबूती नहीं आई। अगर यही हाल रहा तो हमारा पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो जाएगा।”

शिकायत का दौर
- सबसे पहले रमेश ने सीमेंट बेचने वाले स्थानीय डीलर से शिकायत की। डीलर ने हाथ खड़े करते हुए कहा, “मैं तो सिर्फ बेचता हूं, कंपनी और होलसेलर को बता दूंगा, मुझसे ज्यादा कुछ नहीं हो सकता।”
- इसके बाद रमेश ने अल्ट्राटेक कंपनी के टोल-फ्री नंबर और क्षेत्रीय अधिकारियों से संपर्क किया। काफी मशक्कत के बाद कंपनी के दो इंजीनियर मौके पर पहुंचे।
- इंजीनियरों ने घटिया पिलर से कुछ सैंपल लिए और आश्वासन दिया कि “सीमेंट बिल्कुल सही है, कुछ दिन में अपने आप सेट हो जाएगा।” इसके बाद वे भी चले गए।
आज स्थिति यह है कि पिलर अब भी उतने ही कमजोर हैं जितने पहले दिन थे। बारिश या तेज हवा चलने पर पूरा ढांचा गिरने का खतरा बना हुआ है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में अल्ट्राटेक सीमेंट की कई शिकायतें आ चुकी हैं, लेकिन कंपनी कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रही। पीड़ित रमेश मिश्रा ने जिला प्रशासन और उपभोक्ता संरक्षण विभाग से गुहार लगाई है कि उनकी शिकायत की निष्पक्ष जांच कराई जाए और उन्हें हुए नुकसान की भरपाई कराई जाए।
यह घटना एक बार फिर नकली और घटिया निर्माण सामग्री के बाजार में बेलगाम कारोबार पर सवाल उठाती है, जहां आम आदमी अपने जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर घर बनने वाला सपनों का आशियाना महज कुछ बोरी घटिया सीमेंट की वजह से खतरे में पड़ जाता है।










